ब्रिटेन: एचआईवी मरीज का अंग दूसरे को लगाया

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ब्रिटेन में एक एचआईवी संक्रमित मरीज के शरीर में एक अन्य एचआईवी संक्रमित मरीज के अंगों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है.

एचआईवी वायरस के कारण गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की मौत होने के बाद उनकी किडनी और लीवर को दान कर दिया गया था.

एनएचएस प्रत्यारोपण विशेषज्ञ का कहना है कि नए तरह का प्रयोग अंगदान की कमी को पूरा करेगा और इससे उन लोगों को भी अंगदान करने का मौका मिलेगा जो एचआईवी से संक्रमित हैं.

अंगदान के इंतज़ार में क़रीब तीन लोगों की मौत रोजाना हो जाती है.

एनएचएस ब्लड एंड ट्रांसप्लांट के अंगदान और प्रत्यारोपण के एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर प्रोफ़ेसर जॉन फोरसाइथ का कहना है कि यह खुशी की बात है कि एचआईवी संक्रमित कुछ लोगों ने अपने अंग दान कर इसी वायरस से संक्रमित दूसरे लोगों की मदद की है.

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इस तरह के नए प्रयोग से अंगदान की कमी को दूर करने की संभावना जगी है.

मौजूदा समय में एचआईवी संक्रमित व्यक्ति अपने जैसे ही किसी दूसरे मरीज को अंग दान कर सकता है.

अंगदान करने की संभावना वाले सभी मरीजों की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी की जांच की जाती है.

पहला किडनी प्रत्यारोपण 2015 में सेंट थॉमस हॉस्पिटल में हुआ था.

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किडनी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रचेल हिल्टन कहती हैं इस तरह किडनी का सफल प्रत्यारोपण होना एक नया प्रयोग है.

उनका कहना है कि पहले एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का अंग बेकार चला जाता था, क्योंकि यह पता ही नहीं था कि उन अंगों का किसी और में प्रत्यारोपण करना सुरक्षित रहेगा या नहीं.

अब हम जानते हैं कि अब एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का अंग ऐसी ही बीमारी से जूझ रहे दूसरे मरीज में भी लगाया जा सकता है.

हालांकि इसमें ख़तरा इस बात का भी है कि एचआईवी संक्रमित मरीज का अंग दूसरे व्यक्ति के स्वास्थ्य में जटिलताएं बढ़ा दे.

प्रोफ़ेसर फोरसाइथ कहते हैं कि यह बहुत अहम है कि अंगों का प्रत्यारोपण सुरक्षित तरीके से किया जाए जिससे कि अंग लेने वाले व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचे.

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