लदेंगे स्मार्टफ़ोन के दिन, लौटेगा फ़्लिप फ़ोन?

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- Author, निक क्लेटन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
आज स्मार्टफ़ोन का ज़माना है. हर इंसान इसे लेना और इसे इस्तेमाल करना चाहता है. ख़ास तौर से युवा वर्ग तो नए से नया स्मार्टफ़ोन लेने को बेताब रहता है.
स्मार्टफ़ोन के इस दौर में बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो इन्हें छोड़कर पुराने मोबाइल फ़ोन की तरफ़ लौट रहे हैं. मशहूर निवेशक वॉरेन बफ़ेट से लेकर ब्लैकस्टोन के स्टीफ़ेन स्वार्ज़मैन तक, बड़े-बड़े लोग स्मार्टफ़ोन से दूरी बना रहे हैं.
अमरीका के डैनी ग्रोनर को ही लीजिए. वो करोड़ों डॉलर की बेहद क़ामयाब स्टार्टअप कंपनी ''शटरस्टॉक'' में मैनेजर हैं. न्यूयॉर्क की मशहूर एंपायर स्टेट बिल्डिंग में उनका शानदार दफ़्तर है.
मगर वो न्यूयॉर्क में रहने वाले गिने चुने लोगों में हैं जिनके हाथ में स्मार्टफ़ोन नहीं दिखेगा. ऐसा नहीं कि डैनी की उम्र कोई ज़्यादा हो. वो महज़ 32 बरस के हैं. स्मार्टफ़ोन बनाने वाली कंपनियों के आदर्श ग्राहक.

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आख़िर डैनी क्यों स्मार्टफ़ोन से दूरी बनाए हुए हैं? उनका जवाब साफ़ है. डैनी कहते हैं कि वो रोज़ दफ़्तर में 13-14 घंटे लैपटॉप के साथ बिताते हैं. इसके बाद भी उन्हें चमकदार स्क्रीन पर आंखें न गड़ानी पड़ें, इसीलिए वो स्मार्टफ़ोन नहीं रखते.
हालांकि डैनी ये मानते हैं कि ये बड़ा मुश्किल काम है. डैनी कहते हैं कि हर कोई उनके जैसे ही स्मार्टफ़ोन से दूरी बना लेगा तो आज बहुत से काम हो ही नहीं पाएंगे.
हालांकि वो यह भी कहते हैं कि स्मार्टफ़ोन से दूरी बनाकर वो बेहतर कामकाजी बन गए हैं. डैनी कहते हैं कि स्मार्टफ़ोन आज के दौर में सबसे असरदार गैजेट है.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफ़ेसर डॉक्टर हॉली पार्कर कहती हैं कि स्मार्टफ़ोन की जगह बेसिक फ़ोन का इस्तेमाल करके हम घर और दफ़्तर की दुनिया में फ़र्क़ कर सकते हैं. डॉक्टर हॉली कहती हैं कि आपको हर वक़्त दफ़्तर से जुड़े रहने की ज़रूरत नहीं.
अगर कंपनियां, अपने कर्मचारियों को लगातार दफ़्तर से जुड़े रहने पर मजबूर नहीं करतीं, तो उनका काम बेहतर ही होता है. वो घर जाकर, परिवार के साथ वक़्त बिताकर दफ़्तर का तनाव कम कर पाते हैं. इससे कंपनी को ही फ़ायदा होता है.

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अमरीका के वक़ील डेविड रेयान पॉल्गर कहते हैं कि फ्लिप या बेसिक फ़ोन आपकी आज़ादी का एलान करते हैं. वो दुनिया को बताते हैं कि आप स्मार्टफ़ोन के ग़ुलाम नहीं. चीज़ें आपके नियंत्रण में हैं. न कि, आप स्मार्टफ़ोन के क़ब्ज़े में.
हालांकि रेयान यह भी कहते हैं कि स्मार्टफ़ोन की ग़ुलामी से छुटकारा पाने का एक और तरीक़ा है. वो ये कि आप इसे ख़ुद से दूर रखें.
हमेशा स्मार्टफ़ोन पर लगे रहने वाला इंसान और बेसिक मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वाले शख़्स में फ़र्क़ ये है कि बिना स्मार्टफ़ोन वाला इंसान अपनी ताक़त और आज़ादी का एलान कर रहा होता है. फ्लिप फ़ोन आज स्टेटस सिंबल बन गए हैं.
वैसे स्मार्टफ़ोन साथ रखकर भी इससे दूरी बनाना बड़ी बात है. मुश्किल है. मगर एक बार आपने ये कर लिया तो बहुत सी चीज़ें आपकी पहुंच में होंगी.
कई देशों में तो ये क़ानून बनाने की बात भी हो रही है कि लोगों को अपने स्मार्टफ़ोन बंद करने का हक़ होना चाहिए. फ्रांस में तो ऐसे क़ानून का मसौदा भी तैयार कर लिया गया है.

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आपको ये जानकर हैरानी होगी कि फ़्रांस में इस क़ानून का प्रस्ताव किसी मज़दूर यूनियन का नहीं. ये सुझाव असल में वहां की बड़ी संचार कंपनी ऑरेंज के डिप्टी डायरेक्टर के ब्रूनो मेटलिंह का है. ब्रूनो ने पिछले साल सितंबर में फ़्रांस के श्रम मंत्रालय को एक प्रस्ताव दिया था.
उन्होंने ये कहा था कि यूं तो हर वक़्त स्मार्टफ़ोन पर बने रहने का नियम किसी कंपनी में नहीं है. मगर लोगों पर काम का इतना दबाव होता है कि वो ख़ुद इसकी आदत डाल लेते हैं. हर वक़्त स्मार्टफ़ोन चेक करते रहते हैं.
वैसे क़ानूनी सुरक्षा के बावजूद बहुत मुमकिन है कि लोग स्मार्टफ़ोन से दूरी न बना पाएं. कभी ई-मेल तो कभी मैसेज या फिर सोशल नेटवर्किंग साइट्स के नोटिफ़िकेशन चेक करने का लालच तो बना ही रहेगा.
मशहूर कंपनी, ''एक्सेंचर'' की प्रमुख एचआर ऑफ़िसर एलिन शूक को ही ले लीजिए. उन्होंने बहुत कोशिश की कि अपने आई-फ़ोन को अपने सिरहाने से दूर रख सकें. मगर वो ऐसा करने में नाकाम रहीं. फिर उन्होंने एक पुराने टाइप का फ्लिप फ़ोन ख़रीद लिया.

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ये एलिन के लिए स्मार्टफ़ोन का कोई स्थायी विकल्प नहीं था. हां, घर जाकर वो ज़रूर आईफ़ोन बंद करके रख देती थीं और ये फ़्लिप फ़ोन अपने पास रखती थीं. एलिन के लिए ये नुस्खा क़ामयाब रहा.
नई के बजाय पुरानी तकनीक वाला फ़ोन इस्तेमाल करके उन्होंने अपने वक़्त का भरपूर फ़ायदा उठाया. कई बार उन्होंने अपना वीकेंड समंदर किनारे बिताया, बिना फ़ोन चेक किए.
वहीं, ''शटरस्टॉक'' के डैनी ग्रोनर कहते हैं कि वो कभी स्मार्टफ़ोन नहीं लेंगे. बहुत से लोग उन्हें सलाह देते हैं कि वो एक स्मार्टफ़ोन ले लें. इसे बंद करके सिर्फ़ अपनी जेब में रखें. खोलने का लालच न करें.
मगर ग्रोनर को लगता है कि ऐसा करेंगे तो धीरे-धीरे वो उसका इस्तेमाल भी शुरू कर देंगे. फिर उसकी लत पड़ने में भी देर नहीं लगेगी.

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तो, आपने क्या सोचा? क्या आप अपना स्मार्टफ़ोन छोड़कर पुराने टाइप का फ़ोन लेंगे? या फिर एक्सेंचर की एलिन की तरह स्मार्टफ़ोन पास रखकर भी उससे दूरी बनाएंगे?
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