वक़्त बचाने के 5 नुस्ख़ों को आजमाया है?

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आप कई बार सोचते होंगे कि काश ज़िंदगी में और वक़्त होता. दिन कुछ और लंबे होते. घंटे थोड़े और खिंच जाते. तो आप अपने कई ज़रूरी काम निपटा पाते. अकसर आपको काम निपटाने में वक़्त की कमी का एहसास होता है.

बहुत से लोग अपने दिन की शुरुआत, दिन भर में निपटाए जाने वाले काम की फेहरिस्त बनाने से करते हैं. बल्कि कुछ लोग तो कई कई लिस्ट बना लेते हैं कि ये काम आज ही निपटाने हैं. मगर होता यूं है कि उनमें से ज़्यादातर काम अधूरे ही रह जाते हैं.

कभी दफ़्तर के काम, तो कभी, घर की ज़रूरतें, आपको लिस्ट से ध्यान हटाने पर मजबूर करती हैं. फिर दिन ख़त्म होता है और आप उस फेहरिस्त पर हसरत भरी नज़र डालकर कहते हैं, काश! थोड़ा वक़्त और मिल जाता तो ये काम भी निपट जाते.

कभी आपने सोचा कि आख़िर ऐसा होता क्यों है?

वजह साफ़ है जनाब. आप जो हमेशा वक़्त की कमी का रोना रोते रहते हैं, असल में वो इसलिए होता है कि आप वक़्त की अहमियत ही नहीं समझते. जैसे हम वक़्त बर्बाद करते हैं, अगर वैसे ही हम खाना बर्बाद करें तो धरती का हर इंसान आधा पेट ही खा सकेगा.

चलिए आपको पांच तरीक़े बताते हैं जिनसे आप अपना वक़्त बर्बाद होने से रोक सकते हैं.

1. अपना ई-मेल बंद कर दीजिए:

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जब आप कंप्यूटर या लैपटॉप पर अपना काम ख़त्म करते हैं तो आप उसे बंद कर देते हैं. मगर मोबाइल पर वो चालू रहता है. तो मोबाइल या आई-पैड पर भी अपने मेल बंद कर दीजिए. आपको पक्का पता है कि मोबाइल या आईपैड पर ई-मेल चेक कर सकते हैं. वो आपकी पहुंच में होंगे तो आप ज़रूर उन्हें उठा-उठाकर चेक करते रहेंगे.

बेहतर है कि उसे बंद कर दें. और हां, मेल देखिए. उसका जवाब देना ज़रूरी हो तो तुरंत जवाब देकर काम ख़त्म कीजिए. बात को बाद के लिए मत टालिए. जवाब दीजिए और मेल को डिलीट कर दीजिए. जो ग़ैरज़रूरी मेल हों, उन्हें तो फ़ौरन हटा दीजिए.

2. मीटिंग कम कीजिए:

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मीटिंग का ख़याल ही बड़ा सिरदर्द है. ऐसे में बार-बार की मीटिंग्स आपकी टेंशन और बढ़ा देती हैं. इनमें अच्छा ख़ासा वक़्त बर्बाद होता है. आज जिस तरह की कारोबारी ज़रूरते हैं, करियर के लिए मीटिंग की अपनी अहमियत है. तो इन पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाई जा सकती. मगर, इन्हें कम ज़रूर किया जा सकता है.

हर मीटिंग में जाना ज़रूरी न हो तो कोशिश ये कीजिए कि कुछ मीटिंग्स में जाने में कटौती हो सके. ज़रूरी है तो ही जाइए वरना रहने दीजिए. और अगर कई मीटिंग करनी हैं तो उनको एक साथ प्लान कीजिए. इससे रोज़ की मीटिंग में बर्बाद होने वाला वक़्त बचेगा. जो टाइम मीटिंग में देना है वो इकट्ठे देकर काम ख़त्म कीजिए. मीटिंग्स के बीच में उनकी अहम बातें नोट कर लीजिए. इससे आप जो वक़्त मीटिंग टैक्स के तौर पर देते हैं, वो कम होगा.

3. ख़ाली वक़्त का फ़ायदा उठाइए:

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मेट्रो में सफ़र कर रहे हों या फिर हवाई सफर पर हों, ख़ाली वक़्त का फ़ायदा उठाने की कोशिश कीजिए. सफ़र के वक़्त आप एक तरह से बाक़ी दुनिया से कट जाते हैं. इस एकाकीपन का फ़ायदा आप कुछ पढ़कर, कुछ लिखकर उठा सकते हैं. दबाव कम होगा तो आपको इन कामों में ज़्यादा मज़ा भी आएगा.

4. ख़ुद के लिए मियाद तय कीजिए:

रोज़मर्रा के काम आपकी कुशलता की राह में रोड़े अटकाते हैं. दफ़्तर की बहुत सी ज़िम्मेदारियां भी आपकी ज़िंदगी के एजेंडे में स्पीड ब्रेकर का काम करती हैं. साथ ही आप बहुत सी चीज़ों के लिए दूसरों पर भी निर्भर होते हैं. उन्हें आप कंट्रोल नहीं कर सकते. हां, ख़ुद पर आपका कंट्रोल ज़रूर होता है. तो ऐसे में अपने वक़्त का मैनेजमेंट ही बेहतर करने की कोशिश की जानी चाहिए.

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जब आप एक काम ख़त्म कर लें, तो ही दूसरे प्रोजेक्ट पर काम शुरू करें. या कोई काम अटक जाए, तो उसी पर अटके रहने के बजाय दूसरा काम शुरू कर दें. उसे ख़त्म करके आप वापस अधूरा टास्क पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं. दिन के आख़िर में काम को उस मोड़ पर छोड़ने की कोशिश कीजिए जहां से अगले दिन काम आगे बढ़ाने में सहूलियत हो.

5. ख़ुद को कसौटी पर कसिए:

हर महीने के आख़िर में अपने कैलेंडर में दर्ज टारगेट और पूरे हुए कामों का हिसाब ज़रूर लगाइए. देखिए कि आप कितने फ़ीसद काम निपटा सके हैं और कितने अधूरे रह गए. इनके पीछे क्या वजह रही. अपनी कमियों पर ज़रूर निगाह डालिए. लापरवाही, आलस या मजबूरी, वजह जो भी हो, ईमानदारी से उसे मानिए.

फिर उसको बदलने की कोशिश कीजिए. हमेशा ही ऐसा नहीं होगा. कई बार वक़्त के बेहतर इस्तेमाल पर ख़ुद को दाद देने का मौक़ा भी आपको मिल सकता है. लेकिन ऐसा तभी होगा जब आपने अपने टाइम का सही मैनेजमेंट किया होगा.

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कुछ आदतों की वजह से हम अपना क़ीमती वक़्त यूं ही बर्बाद करते रहते हैं. फिर अफसोस करते हैं कि काश! थोड़ा और वक़्त होता. इरादे भले ही आपके नेक हों, मगर उन इरादों को अमली जामा पहनाना भी ज़रूरी है. वरना सिर्फ़ नेक इरादों से काम नहीं चलने वाला. एक्शन तो लेना ही होगा.

ख़ुद से ही अपने काम का हिसाब लेना सबसे अच्छा तरीक़ा है, वक़्त बर्बाद होने से रोकने का. सिर्फ़ ये मत कहिए कि आईंदा से वक़्त नहीं बर्बाद करेंगे. इस पर सख़्ती से अमल भी कीजिए.

आज से ही अगले एक महीने का टारगेट तय कीजिए और लग जाइए काम पर.

ज़िंदगी के बहुत से अहम कामों की तरह वक़्त की बर्बादी रोकना भी कोई बहुत बड़ा काम नहीं. ये कॉमन सेंस और अनुशासन की बात है. तो, साफ़ है कि आप ये काम कर सकते हैं. इसमें कोई मुश्किल बात नहीं.

मगर, क्या आपने सोचा है कि जो वक़्त बचाएंगे, उसमें क्या करेंगे?

(अंग्रेज़ी में मूल <link type="page"><caption> लेख यहां</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20160419-what-does-it-really-take-to-stop-wasting-time" platform="highweb"/></link> पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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