'इंतज़ार करूं या रूह के सुकून के लिए दुआ'

    • Author, सबा ऐतज़ाज़
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान

पाकिस्तान की ज़ीनत शहज़ादी को लापता हुए एक साल बीतने को है.

ज़ीनत परिवार की इकलौती कमाने वाली थीं और एक भारतीय नागरिक हामिद अंसारी की गुमशुदगी के केस की छानबीन कर रही थीं.

उन्होंने मुंबई में हामिद की मां से संपर्क किया और इसके बाद हामिद के अपहरण का केस दायर किया था और इस केस की पड़ताल में अहम भूमिका निभाई थी.

इस साल फ़रवरी में सुरक्षा एजेंसियों ने हामिद अंसारी को फ़ौजी अदालत में पेश किया और उन्हें तीन साल की सज़ा सुनाई गई.

मानवाधिकार वकील हिना जिलानी के मुताबिक़ ज़ीनत के घर वालों से उन्हें पता चला कि हामिद के बारे में पूछताछ के लिए ज़ीनत को सुरक्षा एजेंसी वाले जबरन ले गए थे और चार घंटे बाद छोड़ा था.

पिछले साल 19 अगस्त 2015 को ज़ीनत शहज़ादी रिक्शे में अपने दफ़्तर जा रही थीं कि तभी दो कारों ने उनका रास्ता रोका और बंदूक़ दिखाकर उन्हें जबरन कार में डालकर ले गए.

अगले दिन ज़ीनत को हामिद के मामले में अगवा और गुमशुदा लोगों के लिए बने सरकारी आयोग में पेश होना था.

यह आयोग पाकिस्तान में लापता और अगवा लोगों के मामलों को लेकर 2011 में बना था.

लाहौर जैसे शहर में दिनदहाड़े एक महिला पत्रकार के लापता होने से चिंतित हिना जिलानी इसके लिए सरकारी एजेंसियों को ज़िम्मेदार मानती हैं.

उनका कहना है, "हमें बहुत हद तक यक़ीन है कि यह काम खुफ़िया एजेंसियों का है क्योंकि उनकी हिरासत में अगर कोई होता है तो पुलिस की कुछ नहीं चलती. और हम देख रहे हैं कि इस मामले में पुलिस लगभग बेबस हो चुकी है."

ज़ीनत के अपहरण के केस में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ और सरकारी आयोग भी इसकी जांच कर रहा है.

उधर, ज़ीनत के छोटे से घर में मानो वक़्त थम सा गया है. टूटी-फूटी ड्रेसिंग टेबल पर कंघी और लिपिस्टिक ज्यों की त्यों धरी हैं. अलमारी में कपड़े लटके हैं और उनकी बीमार माँ एक साल से बेटी के लौटने की आस लगाए बैठी हैं.

परेशान कनीज़ बीबी कभी ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी चीज़ें ठीक करती हैं, तो कभी कपड़ों की सिलवटें. उनकी आवाज़ में कंपकंपाहट है.

वह कहती हैं, "मैंने ज़ीनत के सर्दियों के कपड़े संभालकर रख दिए हैं और अब गर्मी के निकाल रही हूँ. मुझे पता है कि वह लौटकर पहनेगी."

24 मार्च को ज़ीनत के सबसे चहेते भाई सद्दाम ने ख़ुदकुशी कर ली. कनीज़ बीबी का कहना है कि वह ज़ीनत के गुमशुदा होने से सदमे में था.

कनीज़ बीबी कहती हैं, "वह रोज पूछता था कि उसकी बहन कब आएगी. बस अपनी ज़िंदगी के आख़िरी दिन उसने कहा कि अम्मी आपी अब नहीं आएगी. शायद यह मेरा ही दोष है क्योंकि उसके सामने ज़ीनत को याद करके मैं रोती रही. यह उससे बर्दाश्त नहीं हुआ."

अधिकारियों का कहना है कि वो ज़ीनत शहज़ादी को तलाश रहे हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें अगले एक महीने में ज़ीनत का केस सुलझने की उम्मीद है.

पाकिस्तान में 3000 से ज़्यादा लोगों के लापता होने के मामले दर्ज हैं जिनमें से अब तक 1300 से ज़्यादा अनसुलझे ही हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चरमपंथ विरोधी क़ानून की आड़ में ख़ुफ़िया एजेंसियां लोगों को बिना वॉरंट के हिरासत में ले रही हैं.

हिना जिलानी के मुताबिक़, "इन संस्थाओं पर कोई जवाबदेही या निगरानी न होना बहुत ख़तरनाक है और हम देख रहे हैं कि अगवा और लापता लोगों की तादाद बढ़ रही है. "

ज़ीनत की मां कनीज़ बीबी रोज़ अपने बेटे की क़ब्र पर आकर फूल चढ़ाती हैं जबकि बेटी के मामले में उन्हें यह सुकून मयस्सर नहीं.

उन्होंने रोते हुए मुझसे कहा, "बेटा मुझे इतना तो बता दे कि अपनी ज़ीनत का इंतज़ार करूं या उसकी रूह के सुकून के लिए दुआ माँगू?"

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