50 साल बाद जहां राष्ट्रपति ने ली शपथ

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म्यांमार में करीब 50 साल बाद लोकतांत्रिक तौर पर चुने गए पहले राष्ट्रपति ने शपथ ली है.
सैनिक शासक थेन सेन ने नेश्नल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी पार्टी के टिन चॉ को सत्ता की कमान सौंपी और इसी के साथ सैनिक सरकार का लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता का हस्तांतरण पूरा हुआ.
उनके साथ हेनरी वैन थिओ ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली.
इसके अलावा शपथ लेने वाले कैबिनेट मंत्रियों में एनएलडी की नेता आंग सान सू ची भी थीं.

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सू ची के पास विदेश मंत्रालय, राष्ट्रपति कार्यालय, शिक्षा, ऊर्जा और बिजली मंत्रालय होगा.
लेकिन रक्षा, गृह मंत्रालय और सीमा संबंधी मंत्रालय के लिए सेना ने अपने प्रतिनिधियों के नामों का प्रस्ताव दिया है.
69 साल के टिन चॉ ने शपथ लेने के बाद संसद के संयुक्त सत्र में कहा कि वे म्यांमार के लोगों के साथ वफ़ादार रहेंगे.
एनएलडी के लिए संविधान को लोकतांत्रित मूल्यों से जोड़ने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए सेना का ही सहारा लेना होगा क्योंकि अभी भी संसद की 25 फ़ीसदी सीटें सेना के पास हैं.

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संविधान में कोई भी बदलाव करने के लिए सरकार को 75 फ़ीसदी मतों से ज़्यादा की ज़रूरत होगी.
सू ची की पार्टी एनएलडी ने म्यांमार में नवंबर में हुए चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज़ की थी.
संविधान में ऐसे व्यक्ति के राष्ट्रपति बनने पर रोक है जिसके परिवार का कोई सदस्य के पास विदेशी नागरिकता हो. माना जाता है कि ये प्रावधान सू ची को निशाना बनाकर किया गया है.
इस प्रतिबंध के बावजूद आंग सान सू ची कह चुकी हैं कि वो राष्ट्रपति से ऊपर होंगी.
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