'वेलेंटाइंस डे न मनाएं, ये इस्लामी परंपरा नहीं'

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- Author, अमृता शर्मा
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
पाकिस्तान में वेलेंटाइन डे को 'इस्लाम विरोधी' बताते हुए इसे न मनाने की अपील की जा रही है.
जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी पार्टियां तो पहले भी इसका विरोध करती रही हैं, लेकिन पहली बार सरकार की तरफ़ से वेलेंटाइन डे मनाने पर रोक लगाई जा रही है.
ख़ुद राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने लोगों से कहा है कि वो वेलेंटाइन डे न मनाएं क्योंकि ये इस्लामी परंपरा का हिस्सा नहीं है बल्कि पश्चिमी संस्कृति का हिस्सा है.
उन्होंने शुक्रवार को कहा, "वेलेंटाइंस डे का हमारी संस्कृति से कोई लेना देना नहीं है और इससे बचना चाहिए."
वैसे भारत में भी कई कट्टरपंथी संगठन वेलेंटाइंस डे का विरोध करते हैं और इस मौके पर अकसर मॉरल पुलिसिंग के मामले देखने को मिलते हैं.
इससे पहले पाकिस्तान के गृह मंत्री निसार अली ख़ान ने राजधानी इस्लामाबाद में प्रशासन को हिदायत दी कि वेलेंटाइंस डे के सभी कार्यक्रमों पर रोक लगाई जाए. इसके लिए गिरफ़्तारी भी हो सकती है.

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उधर कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने फूल और गुलदस्तों की दुकानों पर हमले किए हैं.
इस्लामाबाद में एक मौलवी मौलाना मोहम्मद आमिर का कहना है कि वेलेंटाइंस डे जैसे आयोजनों के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं है.
उधर ख़ैबर पख़्तूनख्वाह प्रांत में कोहाट के ज़िला प्रशासन ने वैलेंटाइन डे मनाने पर रोक लगा दी है.
स्थानीय प्रशासन ने पुलिस अफ़सरों से कहा है कि वे किसी भी दुकान को वैलेंटाइन डे कार्ड या इससे जुड़ी कोई दूसरी चीज बेचने की इजाज़त न दें.

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इससे पहले कई सालों तक धार्मिक समूहों ने वैलेंटाइन डे को बेशर्मी बताते हुए इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.
साल 2013 में मानवाधिकार कार्यकर्ता सबीन महमूद ने वैलेंटाइंस डे के समर्थन में अभियान चलाया था. इस पर उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं और वे कहीं छिप कर रहने लगीं.
साल 2015 में उनकी हत्या कर दी गई.
राष्ट्रपति ममनून हुसैन की इस अपील पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

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ट्विटर पर रज़ा अहमद रूमी (@Razarumi ) ने ट्वीट किया है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति एक ऐसे मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं जो ग़ैरज़रुरी है. प्यार कोई गुनाह नहीं है.
मोइद पीरज़ादा (@मोइदएनजे) ने ट्वीट करते हुए लिखा है वैलेंटाइन डे! हमारे शहरों में वैलेंटाइन डे मनाना इतना बड़ा मुद्दा क्यों है? इस बात को लेकर इतनी चिंताए क्यों जताई जाती है.
बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर भी पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं.
ज़मील अहमद लिखते है वैलेंनटाइन डे पर लड़कियों को गुलाब देने वाले अपनी बहन को आदेश दे कि तुम्हें भी कोई गुलाब दे तो ले लेना. हक़ीकत ये है कि जब किसी और की बहन बेटी के साथ ये हो तो उत्सव है जब अपने पर पड़ता है तो मालूम चलता.
नेहा वर्मा लिखती है कि आरएसएस और पाकिस्तान के विचार मिलते जुलते है लगता है आएसएस और पाकिस्तान की कुंडली एक ही है.
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