'बैंक और कर्ज़ दें या फिर चुकाएं ब्याज'

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जापान के केंद्रीय बैंक ने आर्थिक धीमेपन को दूर करने का नया तरीका निकाला है. जापान का कोई वाणिज्यिक बैंक अब अगर केंद्रीय बैंक में पैसा जमा करता है तो केंद्रीय बैंक इसके ऐवज में ब्याज वसूलेगा.
वाणिज्यिक बैंकों की कुछ जमाओं पर बैंक ऑफ़ जापान 0.1 फ़ीसदी की दर से ब्याज वसूलेगा.
केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे वाणिज्यिक बैंक पैसे जमा रखने के बजाय अधिक से अधिक कर्ज़ बाटेंगे. इससे देश को आर्थिक मंदी से बाहर निकलने में मदद मिलेगी.
हालाँकि यूरोज़ोन के कई देशों में नकारात्मक ब्याज दर काफी पहले से वसूला जा रहा है, लेकिन जापान में केंद्रीय बैंक ने पहली बार ये क़दम उठाया है.
जापान की अर्थव्यवस्था बीते दस साल स्थिर है और तमाम कोशिशों के बावजूद इसे रफ़्तार नहीं मिल पा रही है.
बैंक ऑफ़ जापान ने कहा, "अगर ज़रूरी हुआ तो नकारात्मक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है."

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बैंक ऑफ़ जापान के गवर्नर हारूहिको कुरोदा ने पत्रकारों से कहा, "जापान की अर्थव्यव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, क़ीमतें भी धीरे-धीरे बढ़ रही हैं. तेल की गिरती क़ीमतों और चीन समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अनिश्चितताओं से कारोबारियों का भरोसा कम हो सकता है."
दिसंबर महीने में जापानी अर्थव्यवस्था में 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी.
केंद्रीय बैंक के गवर्नर के नाम पर ऋणात्मक ब्याज प्रणाली को लोगों ने "कुरोदा बज़ूका" कहना शुरू कर दिया है.
कुरोदा निवेशकों को चौंका देने वाले अप्रत्याशित कदम उठाने के लिए जाने जाते हैं.

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केंद्रीय बैंक के इस फ़ैसले के बाद जापान के शेयर बाजार में तेज़ी देखी गई. पर जापानी मुद्रा येन की क़ीमत गिरी.
टोक्यो की फ़ूजित्सु इंस्टीच्यूट ने बीबीसी को बताया, "ऋणात्मक ब्याज प्रणाली लागू करना बैंक ऑफ़ जापान के अंतिम हथियारों में से एक है. पर इसका असर बहुत ज़्यादा नहीं होगा."

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मिंट पार्टनर्र के बि ब्लेन के मुताबिक काफ़ी कम दरों पर पैसे देने से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर बुरा असर पड़ता है.
उन्होंने कहा, "इससे हर किसी को लगने लग है कि उसके बुरे दिन आने वाले हैं."
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