आख़िर पृथ्वी पर कहां से आया इतना पानी?

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- Author, मेलिसा होगेनबूम
- पदनाम, बीबीसी अर्थ
हमारी आकाशगंगा में कई ख़त्म हो रहे तारे हैं जो छोटे ग्रहों के अवशेष होते हैं.
ठोस पत्थर के गोले के बतौर ये किसी तारे पर गिरकर ख़त्म हो जाते हैं.
तारों के वायुमंडल पर नज़र रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक क्षुद्र ग्रह पत्थर के बने होते हैं, लेकिन इनमें काफ़ी पानी भी होता है.
इस आधार पर इस सवाल का जवाब मिल सकता है कि पृथ्वी पर पानी कहां से आया?
ब्रिटेन की वॉरिक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता रोबर्तो राडी कहते हैं, "हमारे शोध से पता चला है कि ज़्यादा पानी वाले जिन छोटे ग्रहों की बात हो रही है, वैसे ग्रह हमारे सौरमंडल में बड़ी तादाद में मिलते हैं."

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हालांकि शोधकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि पृथ्वी पर पानी कहां से आया?
वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी शुरू में बहुत सूखा और बंजर इलाक़ा रहा होगा. इसकी टक्कर किसी ज़्यादा पानी वाले क्षुद्र ग्रह से हुई होगी और फिर उस ग्रह का पानी पृथ्वी पर आया होगा.
अपने शोध को विश्वसनीय बनाने के लिए राडी को यह दर्शाना था कि ज़्यादा जल वाले क्षुद्र ग्रहों की मौजूदगी सामान्य बात है. इसके लिए उन्हें पुराने तारों के बारे में जानकारी की ज़रूरत पड़ी.
जब तारा अपने अंत की ओर बढ़ता है तो वह सफेद रंग के बौने तारे में बदलने लगता है.
उसका आकार भले छोटा हो जाता है लेकिन उसके गुरुत्वाकर्षण बल में कोई कमी नहीं आती.

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वह अपने आसपास से गुज़रने वाले छोटे ग्रहों और धूमकेतुओं को अपने वायुमंडल में खींचने की ताक़त रखता है.
इन टक्करों से पता चलता है कि ये पत्थर किस चीज़ के बने हैं. ऑक्सीजन और हाइड्रोजन जैसे रासायनिक तत्व अलग-अलग ढंग से रोशनी ग्रहण करते हैं.
राडी के शोध दल ने ख़त्म हो रहे तारों पर पड़ने वाली रोशनी के पैटर्न का अध्ययन किया. कनेरी द्वीप समूह पर मौजूद विलियम हर्शेल टेलीस्कोप की मदद से यह अध्ययन किया गया.
राडी और उनके सहयोगियों ने 500 प्रकाश वर्ष दूर ख़त्म हो रहे तारों पर शोध किया. उन्होंने बिखरे हुए इन छोटे-छोटे ग्रहों के रासायनिक संतुलन को आंकने की कोशिश की और पाया कि उनमें पत्थर के अलावा पानी की बहुतायत है.
रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के मासिक नोटिस में इन शोधकर्ताओं ने लिखा कि काफ़ी पानी की मौजूदगी वाले क्षुद्र ग्रह आकाशगंगा के दूसरे ग्रहों तक जल पहुँचा सकते हैं.

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राडी का निष्कर्ष था, "कई सारे क्षुद्र ग्रहों पर जल की मौजूदगी से हमारे उस विचार को बल मिलता है कि हमारे महासागरों में पानी छोटे ग्रहों के साथ हुई टक्कर से आया होगा."
हाल के सालों में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल के बाहर कई ग्रहों का पता लगाया है. केपलर टेलिस्कोप ने अकेले 1000 से ज़्यादा ग्रहों को ढूंढा है.
ऐसे बाहरी ग्रहों पर भी जीवन हो सकता है. अगर इनका आकार पृथ्वी के समान हो और ये अपने तारे के 'गोल्डीलॉक्स ज़ोन' में हों, यानी पृथ्वी की तरह, जहां तापमान न तो बहुत ज़्यादा हो और न बहुत कम, तो उन पर जीवन हो सकता है.
शोध के सहलेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ़ वॉरिक के प्रोफ़ेसर बोरिस गैनसिक के मुताबिक़ जल वाले क्षुद्र ग्रहों ने संभवत: ऐसे ग्रहों तक भी पानी पहुँचाया होगा.
हम जानते हैं कि जल के बिना जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती. हालांकि गैनसिक यह भी मानते हैं कि अगर किसी बाहरी ग्रह पर जीवन होगा भी, तो उसका पता लगाना बेहद मुश्किल काम होगा.
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