सऊदी अरब, बहरीन और सूडान ने ईरान से तोड़े रिश्ते

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सऊदी अरब ने ईरान के साथ कूटनीतिक संबंध तोड़ दिया है.
सऊदी अरब में शिया धर्मगुरु निम्र अल निम्र को सज़ा-ए-मौत दिए जाने के बाद दोनों देशों के संबंध काफ़ी तनावपूर्ण हो गए हैं.
ईरान में प्रदर्शनकारियों ने तेहरान स्थित सऊदी अरब दूतावास में आग लगा दी थी.
सऊदी अरब के साथ-साथ उसके सहयोगी देश बहरीन और सूडान ने भी ईरान से संबंध तोड़ लिए हैं जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान से अपने कुछ राजनयिक वापस बुला लिए हैं
इससे पहले ईरान के शीर्ष धार्मिक नेता अयातुल्ला अली ख़मेनेई ने शेख निम्र को सज़ा देने पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है.
उन्होंने कहा है कि सऊदी अरब को इसके लिए 'दैवीय प्रतिशोध' का सामना करना पड़ेगा.
ख़मेनेई ने ट्वीट कर कहा, "मारे गए धर्मगुरु ने न कभी लोगों को हथियारबंद आंदोलन के लिए उकसाया, न ही वो किसी साज़िश का हिस्सा रहे."
उन्होंने आगे लिखा, "शेख़ निम्र की ग़लती केवल इतनी थी कि वो मुखर आलोचक थे."
ख़मेनेई के मुताबिक़, "निम्र अल निम्र का ख़ून अनुचित तरीके से बहाया गया. इसका असर जल्द ही होगा और सऊदी अरब को 'अल्लाह के कहर' का सामना करना पड़ेगा."
दूसरी अोर, प्रदर्शनकारियों ने तेहरान में सऊदी अरब के दूतावास में घुस कर इमारत को आग लगा दी.

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प्रदर्शनकारी दोबारा इमारत के सामने इकट्ठा हुए. जिस सड़क पर सऊदी अरब का दूतावास है, उसका नाम ईरानी अधिकारियों ने अल निम्र के नाम पर रख दिया है.
दूसरी तरफ, निम्र अल निम्र को मौत की सज़ा दिए जाने पर अमरीका ने कहा है कि इससे नस्लीय तनाव बढ़ने का ख़तरा पैदा हो गया है.

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वॉशिंगटन स्थित सऊदी अरब मामलों के विशेषज्ञ साइमन हेंडरसन ने कहा, "वे कोई बंदूकधारी नहीं थे. वे एक तेज़ तर्रार नेता थे और वास्तव में इस पर विवाद है कि वे एक ख़ास तौर के तेज़ तर्रार आदमी थे."
वे आगे कहते हैं, "वे कोई बंदूक रखनेवाले या ऐसे शख़्स नहीं थे जो कहीं बम लगा दें. लेकिन वे सऊदी अरब में रहनेवाले शियाओं का ज़बरदस्त समर्थन करते थे. उन्हें लगता था कि वे सऊदी अरब में दोयम दर्ज़े के नागरिक हैं."
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