सीरियाई कैंप से विद्रोहियों का हटना रुका

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रिपोर्टों के मुताबिक़ सीरिया में दक्षिणी दमिश्क़ के यरमूक शरणार्थी शिविर के आसपास से हज़ारों विद्रोहियों को हटाए जाने की योजना फ़िलहाल रुक गई है.
देरी के लिए सुरक्षा कारणों और शीर्ष विद्रोहियों के मारे जाने को ज़िम्मेदार बताया जा रहा है.
सरकार और विद्रोहियों के बीच हुए एक समझौते के तहत विद्रोहियों और उनके परिवारों को बसों के ज़रिए विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में भेजा जाना था.
2012 के बाद से सरकारी बलों की घेराबंदी और लड़ाई में 18 हज़ार नागरिक यरमूक में फँसे हैं.

इस साल इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों ने कैंप के कुछ हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर लिया था.
हफ़्तों तक चली भीषण लड़ाई के बाद फ़लस्तीनी चरमपंथियों और सीरियाई विद्रोहियों ने इस्लामिक स्टेट को पीछे खदेड़ दिया था.
तब से यरमूक कैंप इस्लामिक स्टेट, अल क़ायदा से जुड़े अल नुस्र फ़्रंट और फ़लस्तीनी लड़ाकों के बीच बंटा था.
सराकरी सैन्यबलों ने यरमूक के बाहरी इलाक़े में सुरक्षा चौकियां बना रखी हैं जिस वजह से नागरिक इस कैंप को छोड़ नहीं पा रहे हैं.

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सरकार के साथ हुए समझौते के तहत लड़ाकों को यरमूक कैंप और नज़दीक ज़िलों हजार अल अस्वाद और अल क़दम छोड़कर जाना था.
रिपोर्टों के मुताबिक़ शुक्रवार को विद्रोहियों और उनके परिवारों को बाहर ले जाने के लिए 18 बसें कैंप पहुँच गईं थीं.
लेबनानी हिज़बुल्लाह के अल-मनार टीवी के मुताबिक़ बसों को जैश-अल-इस्लाम के नियंत्रण वाले इलाक़े से गुज़रना था.
शुक्रवार को एक हवाई हमले में जैश-अल इस्लाम के कई नेता मारे गए थे.

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वहीं ब्रिटेन स्थित सीरिया पर नज़र रखने वाले संगठन सीरियन ऑब्ज़रवेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स का कहना है कि इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण वाले रक़्क़ा के लिए रास्ता सुरक्षित करने के कारण इस योजना पर रोका जा रहा है.
योजना के तहत इस्लामिक स्टेट और उनके परिजनों को रक़्क़ा के लिए सुरक्षित रास्ता दिया जाना है और अल नुस्र फ़्रंट के लड़ाकों को उत्तर-पूर्व के इदलिब जाने दिया जाएगा.
यरमूक के सुरक्षित हो जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र यहां फंसे नागरिकों तक मानवीय मदद पहुँचा सकेगा.

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यरमूक कैंप सबसे पहले 1948 में अरब-इसराइल युद्ध से बचकर भागे फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए बसाया गया था. 2011 में सीरियाई गृहयुद्ध शुरू होने से पहले यहां क़रीब डेढ़ लाख शरणार्थी थे.
इस कैंप में फंसे लोग पिछले दो सालों से खाने-पीने, साफ़ पानी और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जूझ रहे हैं.
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