'आतंकवाद छोड़िए और बैठकर बात कीजिए'

इमेज स्रोत, ap
- Author, सलीम रिज़वी
- पदनाम, न्यूयॉर्क से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत और पाकिस्तान के बीच रुकी हुई बातचीत पर कहा है कि बातचीत और आतंकवाद साथ साथ नहीं चल सकते.
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विश्व समुदाय को चेताया है कि आतंकवाद अच्छा और बुरा नहीं, बल्कि आतंकवाद आतंकवाद होता है.
सुषमा स्वराज ने कहा, ''जो राष्ट्र आतंकवादियों को समर्थन देते हैं, उन्हें हथियार मुहैया कराते हैं या उनके अभियानों में मदद करते हैं तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे राष्ट्रों के ख़िलाफ़ खड़ा होना पड़ेगा.''
सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का सामना कर रहा है.
'आतंकवाद छोड़ बातचीत कीजिए'

इमेज स्रोत, PTI
उन्होंने नवाज़ शरीफ़ के यूएन में शांति के लिए दिए गए चार सूत्र की जगह एक सूत्र को ही काफ़ी बताते हुए पाकिस्तान से कहा कि आतंकवाद छोड़िए और बैठकर बातचीत कीजिए.
सुषमा स्वराज ने कहा, ''आतंकवाद के संबंध में पूर्व में दिए गए आश्वासनों पर अमल करने की बात तो दूर, सीमा पार से हाल ही में भारत में नए हमले हुए हैं. हम सब जानते हैं कि यह हमले भारत में अस्थिरता फैलाने और भारत के कश्मीर राज्य के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान के नाजायज़ कब्ज़े को सही ठहराने की कोशिश है.''
विदेश मंत्री ने विश्व के देशों को संबोधित करते हुए कहा, “हम में से कोई भी आतंकवाद को सरकार के औज़ार के तौर पर प्रयोग करने वालों को बर्दाश्त नहीं कर सकता.''
कार्रवाई

इमेज स्रोत, AFP
उन्होंने कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले राज्यों का उचित तरीके से सामना नहीं किया जा रहा है. उन्होंने ऐसे राज्यों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
सुषमा स्वराज ने कहा, ''1996 में भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के विरूद्ध एक व्यापक कंवेंशन का प्रस्ताव पेश किया था, हम आज तक उसे पारित नहीं कर पाए. हम आतंकवाद की परिभाषा तय करने में ही उलझे हुए हैं. उसे अब टाला नहीं जा सकता. आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता, आतंकवाद तो आतंकवाद ही होता है.''
मुंबई हमलों का ज़िक्र करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, ''मैं समझती हूं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह अपमान की बात है कि मुंबई हमलों की योजना बनाने वाला , उसे अंजाम देने वाला आतंकवादी सरेआम खुला घूम रहा है.''
सुषमा स्वराज ने सुरक्षा परिषद में सुधार को ज़रूरी बताते हुए कहा कि हम वर्ष 2015 में उस सुरक्षा परिषद के साथ कैसे रह सकते हैं जो 1945 की वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों के लिए गठित की गई थी.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक </caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












