चरमपंथ को वैध हथियार मानता है पाक: भारत

भारत का जवाब

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संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के भाषण में लगाए आरोपों का भारत ने जवाब दिया है.

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान चरमपंथ को एक 'वैध हथियार' के तौर पर इस्तेमाल करता है.

दुनिया भी इसे लेकर चिंतित है क्योंकि इसके परिणाम पाकिस्तान के नज़दीकी पड़ोसियों से आगे तक पहुंच रहे हैं.

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने चरमपंथ को पाला पोसा और अब वो ही उसके हाथ काट रहा है.

भारत ने कहा है कि वो मदद करने के लिए तैयार हैं अगर चरमपंथ के दानव को खड़ा करने वाले उन ख़तरों को जानें जो उन्होंने अपने लिए खड़े किए हैं.

संयुक्त राष्ट्र की 70वीं महासभा की बहस में जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव ने जवाब दाख़िल किया.

'पाकिस्तान करता है फ़ायरिंग'

लाइन ऑफ कंट्रोल

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने लाइन ऑफ़ कंट्रोल और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फ़ायरिंग का ज़िक्र भी किया था.

भारत ने कहा है कि पूरी दुनिया जानती है कि सीमा पार करने वाले चरमपंथियों को बचाने के लिए पाकिस्तान की तरफ़ से फ़ायरिंग की जाती है.

'ग़लत तस्वीर'

नवाज़ शरीफ़

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भारत ने आरोप लगाया है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच का दुरुपयोग कर क्षेत्र की ग़लत तस्वीर पेश की है.

नवाज़ शरीफ़ ने दावा किया था कि वह चरमपंथ का शिकार है. इस पर भारत ने कहा कि सच्चाई ये है कि पाकिस्तान चरमपंथियों को प्रशिक्षण और प्रायोजित करने की अपनी नीतियों का शिकार है.

भारत प्रशासित कश्मीर के अंदरूनी असंतोष को अपनी नीतियों और गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश पर कोई विश्वास नहीं करेगा.

जम्मू-कश्मीर पर विदेशी क़ब्ज़े के पाकिस्तान के आरोप के जवाब में भारत ने कहा है कि अगर 'क़ब्ज़ा' किसी देश ने किया है तो वो पाकिस्तान है.

भारत ने कहा है कि सच्चाई ये है कि भारत को चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडॉर को लेकर जो विरोध है वो इसी बात पर है कि ये कॉरिडॉर भारत के उस क्षेत्र से गुज़रता है जिस पर पाकिस्तान ने कई साल से क़ब्ज़ा कर रखा है.

'समझौतों का अपमान पाकिस्तान ने किया'

नवाज़ शरीफ नरेन्द्र मोदी

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नवाज़ शरीफ़ ने आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर का विवाद सुलझ नहीं पाया है और दोनों देशों के बीच बातचीत लटक गई है.

भारत ने जवाब दिया कि चाहे 1972 का शिमला समझौता हो या चरमपंथ से लड़ने के 2004 का साझा बयान, पाकिस्तान ने कभी उनका सम्मान नहीं किया.

हाल ही में रूस के शहर उफ़ा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत के बाद तय हुए कार्यक्रम के एजेंडे से पाकिस्तान मुकर गया था.

भारत ने कहा है कि हर बार उसी ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया. भारत हमेशा चरमपंथ और हिंसा रहित माहौल में पाकिस्तान से बातचीत करने को तैयार है.

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