बिना पेट्रोल-डीज़ल, हमर जाएँगे दक्षिण ध्रुव !

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    • Author, केन वायसोकी
    • पदनाम, बीबीसी ऑटोस

ज़रूरत से ज़्यादा ईंधन जलाने के लिेए बदनाम हमर को मॉडिफ़ाई कर ज़ीरो-प्रदूषण वाहन बनाया जाए, तो ये कितना क्रांतिकारी बदलाव होगा?

इस साल दिसंबर में ऐसा ही होना जा रहा है, जब एंटार्क्टिका के एक कोने से 1200 मील का सफ़र तय कर, दक्षिण ध्रुव तक जाने और लौटने की एक योजना को अंजाम दिया जाएगा.

गैर सरकारी संस्था ड्राइव अराउंड द वर्ल्ड ( डीएडब्ल्यू) ने इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड इंजन से चलने वाली दो हमर को दक्षिण ध्रुव तक ले जाने का प्लान - ज़ीरो साउथ - बनाया है.

इस अभियान का उद्देश्य पृथ्वी के दक्षिण सिरे पर जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल के बिना पहुंचना है.

सिलिकॉन वैली के पूर्व साफ्टवेयर इंजीनियर निक बैगर्ली और उनके सहयोगी टॉड बॉर्जी ने मानवीय मुद्दों पर काम करने के मकसद से ये संस्था बनाई है.

बैगर्ली बताते हैं, "हमें ऐसा आदमी चाहिए जो हल्के ट्रक को चलाते हुए रुके और सोचे - अब आगे हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक वाहन ही चलाऊँगा !"

एमिशन फ़्री अभियान

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ज़ीरो साउथ अभियान के लिए डीएडब्ल्यू ने हमर को उसकी स्पेस और भारी-भरकम होने के लिए चुना है.

बैगर्ली ने बताया, "हम नए युग में प्रवेश करना चाहते हैं जहां ऐसे वाहन हों जिनसे प्रदूषण न हो. हमने इस विचार को फैलाने के लिए हमर का इस्तेमाल किया है, जिसमें पुरानी तकनीक को निकालकर उसमें एमिशन फ़्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया है."

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इन दोनों गाड़ियों को तैयार करने के लिए 1996 और 1998 के हमर एच 1 मॉडल का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि इसे आंतरिक तौर पर नए सिरे से डिजाइन किया गया है, उसकी छत भी नई बनाई गई है.

इसके अलावा इसमें 18 इंच चौड़ाई का ट्रैक भी लगाया गया है जिसकी मदद से हमर बर्फ की सतह पर आसानी से चलेगा. इस ट्रैक के चलते करीब 4,990 किलोग्राम वज़नी हमर अपने वज़न को ज्यादा सतह पर फैला सकता है. इस ट्रैक की मदद से ध्रुवीय इलाके में गाड़ी को चलाने में सहूलियत मिलेगी.

एविएशन बायोफ्यूल का इस्तेमाल

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हमर की क्षमता को और भी बेहतर बनाने के लिए इसमें एक्सल, डिफरेंशियल और गीयर सैन्य वाहन निर्माता हमवीज़ से लेकर जोड़ी गई हैं.

इन सबको मिलाकर हाइब्रिड रुप देने के लिए डिज़ाइनरों ने डीज़ल और इलेक्ट्रिक सीरीज के ईवी आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया है. छह सिलेंडरों वाले टर्बो डीज़ल इंजन का इस्तेमाल किया गया है जो एविएशन बायोफ्यूल सिथेंटिक पराफिन किरोसीन से चलेगी.

यह -54 डिग्री सेल्सियस यानी शून्य से 54 डिग्री नीचे के तापमान पर जाकर जमता है. इस ईंधन के स्टोरेज लिए 30-30 गैलन तेल रखने के लिए दो टैंक बनाए गए हैं.

ये इंजन करीब 218 हॉर्स पावर पैदा कर सकती है और इलेक्ट्रिक मोटर के चलाने पर बिजली भी पैदा होगी. ये बिजली दो बैटरी के पैक में स्टोर होती जाएगी.

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बैगर्ली के मुताबिक हमर का इंजन डीज़ल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की तरह काम करेगा. प्रत्येक बैटरी पैक में चार 97 वोल्ट की लिथियम सुपर पॉलिमर बैटरी होगी, यानी कुल क्षमता 388 वॉट होगी और इसकी स्टोरेज क्षमता 24 किलोवाट की होगी.

हाइब्रिड इंजन का दम

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बैटरी को एक गर्म और अलग बॉक्स में रखा जाएगा. इससे 150 किलोवॉट के दो इलेक्ट्रिक मोटर चलाए जा सकते हैं. वाहन की इलेक्ट्रिक क्षमता 32 मील की होगी. गाड़ी की अधिकतम स्पीड 45 मील प्रति घंटा हो सकती है.

डीएडब्ल्यू के तीन दर्जन स्वयंसेवकों की टीम इस अभियान में जुटी है. दक्षिण ध्रुव के मौसम को देखते हुए गाड़ी के सामानों के इस्तेमाल पर ध्यान रहेगा. गाड़ी के ब्रेक डाउन होने की स्थिति से निपटने के भी उपाय किए गए हैं.

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यही वजह है कि 6 से 10 दिनों के अनुमानित ट्रिप के लिए दो हमर का इस्तेमाल किया जा रहा है. बैगर्ली बताते हैं, "अगर ज़रूरत हुई तो हम दोनों गाड़ियों को एक साथ जोड़ सकते हैं और एक ही बैटरी से चला सकते हैं."

'ये कूल है आइडिया'

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दक्षिण ध्रुव पर पहले भी मोटरयुक्त वाहन जा चुके हैं. माउंट एवरेस्ट पर सबसे पहले पहुंचने वाले एडमंड हिलेरी के नेतृत्व में एक दल 1958 में मोटर वाले वाहन से दक्षिण ध्रुव तक पहुंचा था. उस वक्त ख़ास तौर पर तैयार किए गए फर्ग्यूसन टीई20 ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया था.

2014 में साहसी डच महिला मानन ओसीवूर्ट ट्रैक्टर के साथ दक्षिण ध्रुव की यात्रा करने वाली पहली महिला थीं. उन्होंने मैसी फर्ग्यूसन के बनाए एमएफ5610 मॉडल का इस्तेमाल किया था.

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रॉयल ज्योग्राफिकल सोसायटी के फैलो और न्यूयार्क स्थित एक्सप्लोरर क्लब के सदस्य होने के नाते बैगर्ली को इन यात्राओं के साहस और जोख़िम का बखूबी अंदाज़ा है.

1999 में उन्होंने खुद 16,000 मील की दूरी तय करते हुए दुनिया का चक्कर (1960 के मॉडल के) लैंड रोवर कार के ज़रिए लगाई. 2005 में 44,000 मील की यात्रा करने वाले दल से भी वे जुड़े रहे.

लेकिन अब वे अपनी इस नए मुहिम को लेकर काफी उत्साहित हैं. वे कहते हैं, "यह क्रेज़ी है. लेकिन अगर इससे समाज में बदलाव का संदेश फैलता है तो यह उतना क्रेजी भी नहीं होगा."

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बैगर्ली आख़िर में कहते हैं, "पहला हाइब्रिड वाहन जो दक्षिण ध्रुव तक पहुंचेगा वो हमर होगा और बिना जीवाश्म ईधंन के वहां तक पहुंचेगा. ये कूल है."

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/autos/story/20150514-hybrid-hummers-make-tracks-to-south-pole" platform="highweb"/></link> यहाँ पढ़ें जो <link type="page"><caption> बीबीसी ऑटोस</caption><url href="http://www.bbc.com/autos" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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