सोलर बाइक पर 30 मील की रफ़्तार से घूमें..

इमेज स्रोत, Jesper Frausig

    • Author, केन वायसॉकी
    • पदनाम, बीबीसी ऑटोस

सोलर सेल की मदद से चलने वाले इलेक्ट्रिक साइकिल का कॉन्सेप्ट नया नहीं है.

लेकिन अब तक बनाए जा रहे ई-साइकिलों पर महंगे फ़ोटोवोल्टाइक पैनल आगे, पीछे, छत पर इस तरह लगाए जाते हैं कि दोपहिया साइकिल नहीं, कोई भारीभरकम अंतरिक्ष यान दिखाई देता है.

लेकिन सोलर बाइक ये सब कुछ बदल देगा. और भारत जैसे देश में तो इसकी संभावनाओं की केवल कल्पना की जा सकती है.

ये बदलाव ला रहे हैं डेनमार्क के सौर ऊर्जा इंजीनियर जेसपर फ्राउसिग. उन्होंने ऐसा सोलर बाइक बनाया है जिसमें फ़ोटोवोल्टाइक उपकरण भी हैं और ये बिल्कुल सामान्य बाइक की तरह ही दिखती है.

जेसपर कोपनहेगन के पास एक सोलर एनर्जी इंटीग्रेशन कंपनी गाइया सोलर के लिए काम करते हैं. उन्होंने कई कॉन्सेप्ट्स का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अपनी सोलर बाइक तैयार की है.

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इसमें उन्होंने सोलर पैनल और बैटरी को साइकिल के पहिए के सेंट्रल फ्रेम में फ़िट किया है. इस इंटीग्रेटेड डिज़ाइन के कारण जहाँ दूसरी सोलर ई-बाइक का वज़न 31 किलो होता है, वहीं जेसपर की ई-बाइक केवल 16.7 किलो भारी है.

इन्होंने अपनी बाइक में 500 वॉट की इलेक्ट्रिक मोटर लगाई है, जो पेडल से जुड़ी होती है. ट्यूब के आकार के एक कंटेनर में लिथियम आयन बैटरी का पैक होता है. इसके अलावा सोलर पैनल साइकिल के चक्के के स्पोक्स की जगह पर लगा होता है.

90 फ़ीसदी लोगों के पास साइकिल

जेसपर कहते हैं, "सामान्य इलेक्ट्रिक बाइक बहुत आकर्षक नहीं हैं. वो बहुत भारी होती हैं, विशालकाय होती हैं और युवाओं के लिए तो बिलकुल ही नहीं बनी होती."

जेसपर ख़ुद काफी ज्यादा साइक्लिंग करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक डेनमार्क के 90 फ़ीसदी लोग साइकिल चलाते हैं और इसमें 36 फ़ीसदी लोग प्रत्येक दिन अपने दफ़्तर साइकिल से ही पहुंचते हैं.

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जेसपर ने बताया, "अगर स्पोर्टी लुक और डिज़ाइन में इलेक्ट्रिक बाइक तैयार हों और सोलर एनर्जी से चलें तो लोग इसके प्रति ज़रूर आकर्षित होंगे."

क्या कोई मुश्किलें भी हैं?

सूरज की रोशनी से भरे किसी भी दिन में पहिए के एक तरफ के पैनल 25 वॉट ऊर्जा एकत्रित कर लेते हैं. दूसरी तरफ़ के पेनल से भी ऊर्जा एकत्र की जा सकती है और जेसपर इस पर काम कर रहे हैं.

अगर सूर्य न निकला हो तो उसे घर पर भी चार्ज किया जाता है. हालाँकि इसे पूरी तरह चार्ज होने में पांच दिन तक लग सकते हैं.

दक्षिण एशियाई और अफ़्रीकी देश जहाँ कई-कई महीने सूरज की तेज़ और तीखी किरणें नज़र आती हैं, वहाँ चार्जिंग कोई बड़ा मसला नहीं होगा.

इस बाइक को 30 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से चलाया जा सकता है.

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इस बाइक के आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने में अभी वक्त लगेगा.

कई साइकिल निर्माताओं ने जेसपर की बाइक में दिलचस्पी दिखाई है. जेसपर कहते हैं, "मैं अगले चरण के लिए फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रहा हूं. बाइक के डिज़ाइन और गति को भी बेहतर करने की कोशिश की जा रही है."

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