अफ़गान-तालिबान के बीच मध्यस्थता को चीन तैयार

अफ़गानिस्तान चीन

इमेज स्रोत, Getty

चीन ने अफ़गानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच समझौते के लिए मध्यस्थ बनने की इच्छा ज़ाहिर है.

पाकिस्तान की यात्रा के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग ली ने बुधवार को कहा कि अफ़ग़ानिस्तान का स्थायित्व 'सबको मिलाकर किए गए राष्ट्रीय समझौते' पर निर्भर है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की ज़रूरत है.

अफ़ग़ान सरकार और तालिबान के बीच शांति समझौते में लंबे समय से गतिरोध जारी है.

अक्तूबर में अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी जब सत्ता संभालने के बाद चीन की यात्रा पर गए थे तो चीन की सरकार ने 24.50 करोड़ अमरीकी डॉलर (क़रीब 15.27 अरब रुपये) की मदद का वादा किया था.

'रचनात्मक भूमिका'

चीनी विदेशमंत्री वांग ई

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, चीनी विदेशमंत्री वांग ई ने तालिबान-अफ़गानिस्तान समझौते को समर्थन की बात कही है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, वांग ने इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉंफ्रेंस में कहा, "हम अफ़ग़ान सरकार के विभिन्न राजनीतिक समूहों, जिनमें तालिबान भी शामिल है, से समझौते की कोशिशों का समर्थन करते हैं."

वांग ने यह बयान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सलाहकार सरताज अज़ीज़ के साथ एक साझा प्रेस कॉंफ्रेंस में दिया.

उन्होंने यह भी घोषणा की कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 'अगले साल की शुरुआत में' पाकिस्तान यात्रा पर आएंगे.

अफ़ग़ानिस्तान और इसे समर्थन करने वाले पश्चिमी देश नरम तालिबान नेताओं को बातचीत की मेज़ पर लाने की कोशिशें करते रहे हैं ताकि देश में सालों से चल रहे युद्ध को समाप्त किया जा सके.

तालिबान नेतृत्व के साथ ऐतिहासिक जुड़ावो को देखते हुए इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका मुख्य है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>