शिक्षण संस्थान पश्चिमी मूल्यों से परहेज़ रखें!

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चीन में विश्वविद्यालयों को सरकारी फ़रमान जारी किया गया है कि वे पश्चिमी मूल्यों को बढ़ावा देने वाली किताबों से परहेज़ रखें.
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार शिक्षा मंत्री युआन गुइरिन ने कहा है कि विश्वविद्यालय क्लासरूम के भीतर चीन की राजनीतिक व्यवस्था या राजनेताओं की आलोचना से बाज़ आएं.
शिक्षा मंत्री का ये बयान शैक्षणिक फ़ोरम के मौक़े पर आया है.
पिछले कई महीनों से चीन के अकादमिक संस्थानों पर ऐसी पाबंदियां बढ़ती जा रही हैं.
क़ानून के प्रोफ़ेसर जांग शुइहोंग बताते हैं कि दिसंबर में उन्हें शंघाई स्थित 'ईस्ट चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ़ पोलीटिकल साइंस एंड लॉ' से बर्ख़ास्त कर दिया गया क्योंकि उन्होंने सरकार की आलोचना की थी और इस पर माफ़ी मांगने से इंकार कर दिया था.
इससे पहले अक्तूबर में अभिव्यक्ति की आज़ादी के पैरोकार और मुखर अर्थशास्त्री शिया येलियांग को भी पेइकिंग यूनिवर्सिटी से हटा दिया गया था.
आजीवन कारावास
प्रमुख युगुर अकादमी के विद्वान इल्हाम तोहती को पिछले साल आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई.

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इल्हाम तोहती का कसूर ये था कि उन्होंने चीन और शिंगजियांग के अल्पसंख्यकों के बीच बेहतर संवाद की मांग उठाई थी.
उनके साथ उनके कई छात्र भी साथ जेल में बंद हैं.
शिन्हुआ ने अनुसार युआन ने क्षेत्रीय शिक्षण संस्थान को आदेश दिया है कि वे अपनी कक्षाओं में कभी वैसी किताबों को बढ़ावा ना दें जो पश्चिमी सभ्यता का पाठ पढ़ाती हों.
एजेंसी ने उनके हवाले से कहा, "कॉलेज चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के नेतृत्व की निंदा, समाजवाद पर कीचड़ उछालने या चीन के संविधान और कानून के उल्लंघन से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि से दूर रहें."
पिछले साल के आख़िर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात का आह्वान किया था कि विश्वविद्यालयों को वैचारिक देख-रेख में रखा जाए.
शी जिनपिंग ने अधिकारियों से गुज़ारिश की थी कि वे पार्टी के "नेतृत्व और मार्गदर्शन" तथा "वैचारिक और राजनीतिक कामों में सुधार" के लिए आगे आएं.
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