पाकः लश्कर को छूट और तालिबान से जंग?

इमेज स्रोत, AFP
- Author, ओवेन बेनेट-जोंस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तानी तालिबान के चरमपंथियों के ख़िलाफ़ की जा रही फ़ौजी कार्रवाई में किसी भी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी.
यह कार्रवाई अफ़ग़ानिस्तान के सीमा से लगे पाकिस्तानी इलाक़े में की जा रही है.
तीन दिनों के लंदन दौरे के दौरान जनरल शरीफ़ ने कहा, "सैन्य अभियान सर्दियों के दौरान भी जारी रहेगा. ये फ़ैसला पलटा नहीं जाएगा."
पढ़ें पूरा विश्लेषण

इमेज स्रोत, Reuters
पाकिस्तानी तालिबान के गढ़ माने जाने वाले उत्तरी वज़ीरिस्तान के इलाक़े में फ़ौज की कार्रवाई पेशावर के स्कूल पर हुए हमले पर कहीं पहले पिछली गर्मियों में ही शुरू कर दी गई थी.
पेशावर के स्कूल पर हमला करके पाकिस्तानी तालिबान चरमपंथियों ने 130 से ज़्यादा बच्चों की जान ले ली थी.
जनरल शरीफ़ ने कहा है कि बच्चों के इस नरसंहार के बाद फ़ौज का संकल्प और मजबूत हुआ है. उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि वे बच्चों पर हमला करेंगे."
पाकिस्तानी तालिबान

इमेज स्रोत, AP
जनरल शरीफ़ ने ब्रिटेन के रक्षा मंत्री माइकल फ़ैलोन को बताया कि अफ़ग़ान सीमा इलाक़े में चरमपंथी अब 'बहुत कम संख्या में' रह गए हैं.
लेकिन पेशावर में जानकारों और पत्रकारों का कहना है कि चरमपंथियों के नियंत्रण में अभी भी उत्तरी वज़ीरिस्तान का एक बड़ा इलाक़ा है और सेना केवल शहरी इलाक़ों में ही उनका नियंत्रण ख़त्म कर पाई है.
पाकिस्तान में इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि फ़ौज किस तरह से अपने दुश्मनों को परिभाषित कर रही है.

इमेज स्रोत, Reuters
एक ओर वह जहां पाकिस्तानी तालिबान के ख़िलाफ़ जंग का एलान किए हुए है वहीं पंजाब सूबे से अपना ऑपरेशन चला रहे चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा को बेरोकटोक अपनी गतिविधियां संचालित करने की छूट है.
इसी चरमपंथी गुट पर साल 2008 में मुंबई शहर पर हमला करने के आरोप हैं.
फ़ौज का रवैया
पाकिस्तानी सेना के अधिकारी निजी बातचीत में दलील देते हैं कि अफ़ग़ान सीमा के पास जिस पैमाने पर लड़ाई जारी है उसे देखते हुए वे पंजाब सूबे के चरमपंथी गुटों के ख़िलाफ़ एक साथ संघर्ष करने की स्थिति में नहीं हैं.

इमेज स्रोत, AFP
आलोचकों का कहना है कि पंजाब सूबे से सक्रिय इन चरमपंथी गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का फ़ौज का कोई इरादा नहीं है. इनमें से ज़्यादातर संगठनों का मकसद भारत को निशाना बनाना है.
कुछ इसी तरह की चिंताएं अफ़ग़ान तालिबान और अफ़ग़ानिस्तान के हक़्क़ानी नेटवर्क के प्रति पाकिस्तानी फ़ौज के रवैये को लेकर भी जताई जा रही हैं.
साल 2011 में अमरीकी सेना के तत्कालीन ज्वॉयंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ माइक मुलेन ने हक़्क़ानी नेटवर्क को पाकिस्तान की सबसे ताक़तवर ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का 'असली साथी' बताया था.

इमेज स्रोत, Getty
'अच्छे' और 'बुरे' तालिबान के बीच फ़र्क़ करने की पाकिस्तानी कोशिशों से जुड़े तमाम सवालों के बावजूद जनरल शरीफ़ ने ज़ोर दिया कि पाकिस्तान ने अपनी अफ़ग़ान नीति की समीक्षा की है और वह राष्ट्रपति अशरफ ग़नी के नेतृत्व में काबुल में एक व्यापक असर वाली सरकार की स्थापना को लेकर प्रतिबद्ध है.
सहयोग
जनरल शरीफ़ के लंदन दौरे के दौरान पाकिस्तान से सैन्य साजो सामान और ट्रेनिंग पाने की पाकिस्तानी ख़्वाहिश के अलावा दोनों देशों के अधिकारियों ने एक दूसरे की ज़मीन पर मौजूद कुछ लोगों के बारे में सहयोग करने की बात भी उठी है.

इमेज स्रोत,
जनरल ने लंदन में रह रहे बलूच अलगाववादियों के ख़िलाफ़ ब्रिटेन से कार्रवाई करने के लिए कहा है.
उधर ब्रिटेन के गृह विभाग के अधिकारियों ने भी राजनीतिक पार्टी एमक्यूएम से जुड़े मुद्दे पर पाकिस्तान से सहयोग मांगा है.
पाकिस्तान की नेशनल एसेम्बली में एमक्यूएम के 20 सदस्य हैं और इनमें से ज़्यादातर पाकिस्तान के सबसे बड़े और समृद्ध शहर कराची से निर्वाचित होते हैं.

इमेज स्रोत, Getty
एमक्यूएम के नेता अल्ताफ़ हुसैन उत्तरी लंदन में 20 साल से भी ज़्यादा अर्से से रहे हैं और अतीत में पाकिस्तानी सरकारों की ये शिकायत रही है कि ब्रितानी सरकार इसके हिंसक तौर तरीकों को लेकर आंख बंद किए रहती है.
2010 में एमक्यूएम के नेता इमरान फ़ारूक की लंदन में हत्या कर दी गई थी जिसके बाद से ब्रितानी पुलिस की जांच जारी है.
गुंजाइश
ब्रिटेन पाकिस्तान से मोहसिन अली सईद और मोहम्मद कासिफ़ ख़ान कामरान को रिहा करने के लिए दबाव बना रहा है.

इमेज स्रोत, AP
पाकिस्तान में आईएसआई की हिरासत में बंद इन दोनों लोगों के बारे में ब्रिटेन को शक है कि ये इमरान फारूक़ की हत्या की साजिश में शामिल थे.
दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच गर्मजोशी भरी जितनी भी बातें हो जाएं लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है कि वे एक दूसरे की मदद करेंगे.
एक ओर जहां बलूच अलगाववादियों पर ब्रितानी कार्रवाई की गुंजाइश कम ही है वहीं एमक्यूएम के संदिग्धों को सौंपने के मसले पर पाकिस्तान हिचकिचा रहा है.
वे जब तक आईएसआई की हिरासत में रहेंगे पाकिस्तानी फ़ौज को एमक्यूएम के सशस्त्र गुटों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती रहेगी.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












