असम हिंसा की एनआईए करेगी जांच

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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने असम में आदिवासियों पर हुए हमलों की जांच एनआईए (नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी) से कराने की घोषणा की है.
मंगलवार को बोडो चरमपंथियों के आदिवासियों पर हुए हमलों, उसके बाद एक विरोध प्रदर्शन पर पुलिस फ़ायरिंग और आदिवासियों की बोडो लोगों कि ख़िलाफ़ हिंसा में मरने वालों की संख्या 81 हो गई है.
गुरुवार को कोकराझार में तीन लोगों की लाशें मिली हैं. इससे पहले हिंसाग्रस्त कोकराझार और सोनितपुर में बोडो चरमपंथियों के हमले हुए थे.
अर्द्ध सैनिक बल

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हिंसाग्रस्त इलाक़े का दौरा करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि इन संगठनों के तार किससे जुड़े हुए हैं. हम इसे साधारण चरमपंथी कृत्य नहीं मान सकते. राज्य और केंद्र दोनों ही इससे उसी तरह निपटेंगे जिस तरह चरमपंथ से निपटा जाता है."
उन्होंने भूटान और म्यांमार के साथ भारतीय सीमा को 'सील' करने की बात कही है लेकिन ये दुर्गम इलाक़ा है और ऐसा करना आसान नहीं होगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राजनाथ ने कहा कि यदि ज़रूरी हुआ तो नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड से निपटने के लिए सैन्य सहायता मुहैया कराई जाएगी.

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असम को पहले ही अर्द्ध सैनिक बलों की 50 कंपनियां मुहैया करा दी गई हैं.
गृहमंत्री ने अलगाववादी संगठन से बातचीत की संभावना से इनकार किया है, "इस तरह के संगठनों से कोई बातचीत नहीं होगी. केवल कार्रवाई होगी. समयबद्ध कार्रवाई."
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