असम: 'महिलाओं, बच्चों को भी नहीं बख़्शा'

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असम में बोडो अलगाववादियों के ग़ैर-बोडो जनजातियों पर हमले, विरोध प्रदर्शन पुलिस की फ़ायरिंग और जनजातियों के बोडो गांव पर जवाबी हमले में 67 लोग मारे गए हैं.
असम पुलिस के अनुसार अलग बोडोलैंड की मांग करने वाले एनडीएफ़बी विद्रोहियों ने मंगलवार को चरमपंथियों सोनितपुर और कोकराझार ज़िले में हमले किए और 52 आदिवासियों को मार दिया.
आदिवासियों ने बुधवार सुबह इन हमलों के ख़िलाफ़ सोनितपुर में प्रदर्शन किया. भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने फ़ायरिंग की जिसमें तीन आदिवासी मारे गए.
पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आदिवासियों ने भी कुछ बोडो गांव पर जवाबी हमला किया जिसमें दो बोडो मारे गए.
'हिंसा आतंकवादी घटना'
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है, "असम में हुई हिंसा आतंकवादी घटना है और इसका उसी के मुताबिक सामना किया जाएगा." वे असम के दौरे पर हैं.

इस बीच असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा है कि राज्य और केंद्र सरकार ऐसे किसी ग्रुप के आगे नहीं झुकेगी और उग्रवादियों से सख़्ती से निपटेगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है, "सोनितपुर और कोकराझार में मासूमों को मारना कायरता है. मैंने असम के मुख्यमंत्री से बात की है."
'बदले में हमला'
असम पुलिस के आईजी (कानून व्यवस्था) एसएन सिंह ने बीबीसी को बताया कि पुलिस अभियान में सोमवार को एनडीएफबी के दो अहम नेता मारे गए थे, जिसका बदला लेने के लिए ये हमले किए गए.
उन्होंने कहा कि ये हमले दूरदराज के इलाक़ों में किए गए. उनका कहना था कि पुलिस को जब सूचना मिली, तब कार्रवाई के लिए समय कम था, इसलिए पुलिस उन जगहों पर नहीं पहुंच पाई.

सोनितपुर ज़िले में कर्फ़्यू लगा दिया गया है. मारे गए ज़्यादातर लोग आदिवासी थे जो स्थानीय चाय बागानों में काम करते थे.
हमले में बचे गांववालों ने पुलिस को बताया कि हमलावर पैदल आए थे, जबरन उनके दरवाज़े तोड़कर घरों में घुसे और गोलियां चलाने लगे. गांववालों के मुताबिक़ कुछ को घरों से खींचकर मारा गया.
एक पुलिसकर्मी ने रॉयटर्स एजेंसी को बताया कि ''उन्होंने महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख़्शा.''
कौन है एनडीएफ़बी

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भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में काफ़ी समय से अलग राज्य की मांग, अलग पहचान के मुद्दे और जातीय मुद्दों पर हिंसा भड़कती रही है.
इससे पहले भी बोडो चरमपंथी स्थानीय आदिवासियों और कुछ मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं.

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ऐसे एक हमले में मई में कोकराझार और बक्सा ज़िलों में 32 लोगों को मार दिया गया था.
इसके अलावा बांसबाड़ी में हुई एक वारदात में 100 से ज़्यादा मुसलमान प्रवासी मारे गए थे.
बोडो लोगों की इस समय एक स्वायत्तशासी परिषद है जिसे बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट चलाती है लकिन प्रवासियों के वहाँ ज़मीन लेने पर लोगों में ख़ासा असंतोष है.
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