असम: मरने वालों की संख्या 72 हुई

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असम में बोडो अलगाववादियों के ग़ैर-बोडो जनजातियों पर हमले, पुलिस फ़ायरिंग और जनजातियों के बोडो गांव पर जवाबी हमले में मरनों वालों की संख्या और बढ़ गई है.
स्थानीय पत्रकार विनोद रंगानिया के मुताबिक अब तक कुल 72 लोगों की जान जा चुकी है.
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई हेलिकॉप्टर से हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे.
स्थानीय पत्रकार विनोद रंगानिया के मुताबिक, "अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस हिंसा की प्रतिक्रिया में बोडो लोगों पर होने वाली बदले की कार्रवाई को रोके, हालांकि कई जगह हमले हुए भी है. इसे रोकने के लिए प्रशासन ने कई जगह रात का कर्फ्यू भी लगाया है. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस तरह की घटनाओं को रोकने की है."
असम पुलिस के अनुसार अलग बोडोलैंड की मांग करने वाले एनडीएफ़बी विद्रोहियों ने मंगलवार को चरमपंथियों सोनितपुर और कोकराझार ज़िले में हमले किए थे और 52 आदिवासियों को मार दिया था.
आदिवासियों ने बुधवार सुबह इन हमलों के ख़िलाफ़ सोनितपुर में प्रदर्शन किया. भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने फ़ायरिंग की जिसमें तीन आदिवासी मारे गए.
पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आदिवासियों ने भी कुछ बोडो गांव पर जवाबी हमला किया जिसमें दो बोडो मारे गए.
कौन है एनडीएफ़बी

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भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में काफ़ी समय से अलग राज्य की मांग, अलग पहचान के मुद्दे और जातीय मुद्दों पर हिंसा भड़कती रही है.
इससे पहले भी बोडो चरमपंथी स्थानीय आदिवासियों और कुछ मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं.
ऐसे एक हमले में मई में कोकराझार और बक्सा ज़िलों में 32 लोगों को मार दिया गया था.
इसके अलावा बांसबाड़ी में हुई एक वारदात में 100 से ज़्यादा मुसलमान प्रवासी मारे गए थे.
बोडो लोगों की इस समय एक स्वायत्तशासी परिषद है जिसे बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट चलाती है लकिन प्रवासियों के वहाँ ज़मीन लेने पर लोगों में ख़ासा असंतोष है.
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