पाकिस्तान भारत की ‘चुनावी राजनीति का शिकार’

पाकिस्तान मीडिया
इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी मीडिया भारत के गुस्से को आक्रामक रणनीति का हिस्सा बताया गया है

बीते हफ्ते भारत और पाकिस्तान के उर्दू अखबारों में दोनों देशों की तल्खी सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही, हालांकि उनके सुर बिल्कुल अलग अलग सुनाई पड़े.

इसके अलावा दूसरी खबरों में दिल्ली से छपने वाले अखबार-ए-मशरिक में खबर छपी ‘बीजेपी का चुनावी प्लान तैयार. मोदी पोस्टर ब्वॉय, नया नारा, नई सोच नई उम्मीद.’ अखबार के अनुसार पार्टी तकरीबन तय कर चुकी है कि मोदी पर ही उसकी उम्मीदें टिकी हैं.

वहीं मध्य प्रदेश के मदरसों में गीता की शिक्षा देने के मामले मामले पर भी अखबारों की खास नजर रही. 'राष्ट्रीय सहारा' ने लिखा बीजेपी की सरकार बैकफुट पर. चौतरफा आलोचना के बाद नोटिफिकेश वापस ले लिया गया.

'आज समाज' ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और अगर कोई चीज किसी पर थोपी जाती है तो ये धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विपरीत है.

तीखा विरोध

एके एंटनी
इमेज कैप्शन, पहले भारतीय रक्षा मंत्री एंटनी ने कहा था कि हमला पाकिस्तान सेना की वर्दी में आए हमलावरों ने किया

‘बाबरी मस्जिद को गिराने में था कांग्रेस का हाथ.’ समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के हवाले से ‘आज समाज’ में छपी इस खबर में कहा गया है कि उस वक्त के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की जानकारी थी और ये बात खुद उन्होंने मुलायम सिंह को बताई थी.

लेकिन जम्मू के पुंछ सेक्टर में हुए हमले में पांच भारतीय सैनिकों की मौत सबसे ज्यादा चर्चा में रही. सरकार और विपक्ष के नेताओं की ओर से इस हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराने वाले बयान सब जगह छपे.

‘हिंदुस्तान एक्सप्रेस’ में बीजेपी नेता यशवंत सिंह का ये बयान दिखा- कि पाकिस्तान को उसी भाषा में जवाब दिया जाए तो राष्ट्रीय सहारा ने इस मुद्दे पर भारत की तरफ से दर्ज कराए गए तीखे विरोध को अहमियत दी.

अखबार-ए-मशरिक में इस मुद्दे पर होने वाली राजनीति की झलक भी देखने को मिली जब कांग्रेस ने दावा किया कि एनडीए के शासन काल में हर साल जहां 874 लोग मारे गए थे वहीं यूपीए सरकार के दौर में पिछले साल सिर्फ 15 लोग मारे गए.

अखबार लिखता है कि नियंत्रण रेखा पर पांच जवानों की मौत पर रोष के बावजूद संयम से काम लेने की जरूरत है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत के टकराने के पक्ष में नहीं हो सकते.

'चुनावों के चलते'

नवाज़ शरीफ़
इमेज कैप्शन, नवाज़ शरीफ का कहना है कि वो भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने को उत्सुक हैं

इस्लामाबाद से छपने वाले न्यूज़ एक्सप्रेस ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सऊदी अरब से लौटते ही बैठक बुलाई और भारत के आरोपों से पैदा स्थिति का जायजा लिया. नवाज शरीफ ने कहा कि भारत को पाकिस्तान पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाने चाहिए.

पाकिस्तान के सभी अखबारों में पाकिस्तानी सेना के इस बयान को प्रमुखता दी गई कि उसकी तरफ से ऐसा कोई हमला हुआ ही नहीं है.

शरीफ के मुताबिक वो संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात को लेकर उत्सुक हैं और ऐसे में दोनों देशों के नेतृत्व पर जिम्मेदारी बनती है कि वो माहौल को खराब न होने दें.

अखबार के अनुसार बैठक में कहा गया कि कुछ ताकतें नियंत्रण रेखा पर तनाव फैला कर दोनों देशों के प्रधानमंत्री की बैठक में रुकावटें पैदा करना चाहती हैं.

अखबार ‘नवाए वक्त’ ने लिखा है कि भारत में पाकिस्तान विरोधी भावनाएं इतनी प्रबल हैं कि रक्षा मंत्री एके एंटनी को अपना बयान बदलना पड़ा और उन्हें पुंछ में हुए हमले में पाकिस्तानी सेना का हाथ बताना पड़ा.

कराची से छपने वाले जंग ने लिखा है कि भारत में अगले साल आम चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां राजनीतिक पार्टियों में पाकिस्तान विरोधी भावना भड़काने और अपने सियासी नंबर बढ़ाने की होड़ मची है.

अखबार कहता है कि भारतीय सैनिकों के मारे जाने के आरोपों पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के आक्रामक रुख को देखते हुए कांग्रेस ने अपनी छात्र शाखा को उतारा और उसके कार्यकर्ता पाकिस्तानी उच्चायोग पर पहुंच गए और वहां धावा बोल दिया और वहा तोड़फोड़ की. चुनावी फायदे के लिए होने वाली ऐसी अफसोसनाक कार्रवाई है और भारत में राजनयिक जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए तैनात पाकिस्तानी कर्मचारियों की सुरक्षा भारतीय सरकार की जिम्मेदारी है.

‘नवाए वक्त’ के अनुसार कट्टरपंथी तत्व भारत और पाकिस्तान की बातचीत के अडंगा डालने में लगे हुए हैं.

रमज़ान में भी रहम नहीं

न्यूज़ एक्सप्रेस ने लिखा है रमजान के पवित्र महीने में भी चरमपंथियों और टारगेट किलिंग करने वालों को कराची पर रहम नहीं आया. बम धमाकों, टारगेट किलिंग और खून खराबे की घटनाओं में महीने भर में शहर में 186 लोग मारे गए. हालांकि सुरक्षा बलों ने एक इमरजेंसी प्लान बनाया था. लेकिन कहीं उस पर अमल होता नहीं दिखा.

कराची में एक फुटबॉल मैच के दौरान हुए धमाके में आठ लोग मारे गए
इमेज कैप्शन, कराची में एक फुटबॉल मैच के दौरान हुए धमाके में आठ लोग मारे गए

रमजान के महीने में ही कराची में एक फुटबॉल मैच के दौरान हुए धमाके में सात बच्चों समेत आठ लोगों की मौत पर जंग ने संपादकीय लिखा. तो दूसरी तरफ क्वेटा में एक पुलिसकर्मी के अंतिम संस्कार के वक्त हुए हमले में धमाका हुआ और तीस से ज्यादा लोग मारे गए. यहां तक कि ईदन के दिन भी क्वेटा में चरमपंथियों ने गोलीबारी कर नौ लोगों की जान ले ली.

लाहौर से छपने वाले दैनिक ‘खबरें’ में जावेद अफजल अपने कॉमल में लिखते हैं कि पाकिस्तान की स्थिति इराक और अफगानिस्तान से भी बदतर हो गई है और जनता असुरक्षित और बेबस है.

लाहौर से ही छपने वाले आजकल में माधुरी दीक्षित का ये बयान भी है कि मेरे बच्चे मेरी शोहरत से वाकिफ नहीं हैं. माधुरी के मुताबिक उनके बच्चे उसने पूछते हैं कि सच में क्या आप इतनी मशहूर हो.

दैनिक इंसाफ में पहले पन्ने पर ईद पर मुस्लिम जगत को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा की बधाई को जगह दी गई और साथ ही पेशावर में संगीनों के साए में नमाज़ पढ़ते लोगों की तस्वीर भी है.

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