मध्य-पूर्व वार्ता अमरीका में शुरू

अमरीका की मध्यस्थता में इसराइल और फलस्तीन के बीच शांति वार्ता एक बार फिर शुरू हो गई है.
दोनों पक्षों के वार्ताकारों ने वाशिंगटन में अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी के साथ इफ़्तार पार्टी में हिस्सा लिया और इसके साथ ही तीन साल से बंद पड़ी मध्य पू्र्व शांति वार्ता की औपचारिक शुरुआत हो गई.
इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस वार्ता का स्वागत किया लेकिन साथ ही कहा कि दोनों पक्षों को कड़े फ़ैसले लेने पड़ सकते हैं.
इसराइल के 100 से अधिक फ़लस्तीनी क़ैदियों को छोड़ने को मंजूरी दिए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू हुई है.
मतभेद
इन क़ैदियों को अगले कई महीनों के दौरान छोड़ा जाना है लेकिन इससे इसराइल की कैबिनेट में मतभेद उभर आए हैं.
शांति वार्ता शुरू कराने के लिए केरी ने पिछले पांच महीने में छह बार मध्य पूर्व की यात्रा की है.
केरी ने सोमवार शाम विदेश विभाग के कार्यालय में कहा कि अमरीकी राजधानी में मध्य पूर्व के वार्ताकारों की मौजूदगी एक विशेष पल है.
उनके सामने इसराइल के मुख्य वार्ताकार और क़ानून मंत्री ज़िपी लिवनी बैठी थीं और उनके बगल में फलस्तीन के वार्ताकार साएब एरेकात थे.
इस वार्ता के लिए अमरीका के विशेष दूत नियुक्त किए गए और इसराइल में अमरीका के पूर्व राजदूत मार्टिन इंडिक भी इफ़्तार में शामिल हुए.
समझौते
इंडिक ने पहले कहा था कि वह मध्य पूर्व में राष्ट्रपति ओबामा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे.
उन्होंने साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल में कैंप डेविड वार्ता में अहम भूमिका निभाई थी लेकिन वो वार्ता नाकाम रही थी.
विदेश विभाग के मुताबिक़ इसराइल और फलस्तीन के वार्ताकारों के बीच वार्ता सोमवार शाम शुरू हो गई और ये मंगलवार को भी जारी रहेगी.
केरी ने दोनों पक्षों से शांति के लिए ‘मुनासिब समझौते’ करने का अनुरोध किया.
उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं कि इस बातचीत की राह बहुत कठिन है लेकिन मैं ये भी जानता हूं कि बातचीत न करने के परिणाम बदतर होंगे.”
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