जॉन केरी के पीछे पड़ा स्नोडन का भूत

जॉन कैरी का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से ही फ़ोन कॉल्स और ईमेल पर नज़र रखी जा रही है
इमेज कैप्शन, जॉन कैरी का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से ही फ़ोन कॉल्स और ईमेल पर नज़र रखी जा रही है

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी का कहना है कि अमरीका सरकार खुफिया विश्लेषक <link type="page"><caption> एडवर्ड स्नोडेन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130610_edward_snowden_missing_ra.shtml" platform="highweb"/></link> को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही है और इस सिलसिले में रूस के साथ ही दक्षिण अमरीकी देशों से बात की जा रही है.

भारत की यात्रा पर आए जॉन केरी ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) द्वारा फ़ोन कॉल्स के रिकॉर्ड और इंटरनेट डाटा की निगरानी सुरक्षा की दृष्टि से ही की जाती है.

केरी ने भारत को अमरीका का महत्वपूर्ण सहयोगी बताया और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया.

संबंधों पर असर

एडवर्ड स्नोडेन अमरीका से <link type="page"><caption> भागकर हॉन्गकॉन्ग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130609_us_prism_snowden_sm.shtml" platform="highweb"/></link> पहुंचे थे. वहाँ से वे रविवार सुबह रवाना होकर मॉस्को पहुंच गए हैं. उन्होंने इक्वाडोर से शरण भी मांगी है.

इस मामले पर अमरीकी विदेशमंत्री ने कहा कि दक्षिण अमरीकी देशों को बता दिया गया है कि स्नोडन <link type="page"><caption> अमरीका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130618_us_taliban_talks_fma.shtml" platform="highweb"/></link> में वांछित हैं.

उन्होंने कहा कि हांगकांग के साथ अमरीका की प्रत्यर्पण संधि है और अगर उसने सही जानकारी होते हुए भी स्नोडन को जाने दिया है तो इसका असर आपसी संबंधों पर पड़ेगा.

इस मामले पर हॉन्गकॉन्ग सरकार ने कहा था कि अमरीकी सरकार प्रत्यर्पण की आवश्यक्ताएँ पूरी नहीं कर सकी थी.

रूस के मामले पर केरी ने कहा कि पिछले दो साल में अमरीका ने रूस को सात ऐसे लोगों को सौंपा है जिनकी उसने मांग की थी.

रूस को इसका ख़्याल रखना चाहिए कि कानून का पालन किया जाना बहुत ज़रूरी है.

सुरक्षा के लिए

जॉन कैरी और सलमान खुर्शीद ने एक साझा प्रेस कांफ्रेंस को भी संबोधित किया
इमेज कैप्शन, जॉन कैरी और सलमान खुर्शीद ने एक साझा प्रेस कांफ्रेंस को भी संबोधित किया

अमरीका में आम नागरिकों के फ़ोन और ईमेल चेक किए जाने के मामले पर जॉन केरी का कहना था कि इस बारे में बहुत भ्रामक और ग़लत जानकारियां दी गई हैं.

उनका कहना था कि अमरीका में लागू कानून के अनुसार कोई फ़ोन पर लोगों की बातें नहीं सुनता, निजी मेल नहीं देखता. यह कंप्यूटर द्वारा किया जा रहा एक आकस्मिक सर्वेक्षण होता है.

यह किसी भी नाम की नहीं नंबर की अचानक जांच करता है कि कहीं वह किसी आंतकी समूह से तो नहीं जुड़ा हुआ है.

अगर कोई संबंध मिलता है तो कानूनी प्रक्रिया का पालन कर आगे की कार्रवाई की जाती है.

उन्होंने कहा कि अमरीका के कार्यपालिका, विधायिका और न्यायिक तंत्र तीनों इसके बारे में जानते हैं.

उन्होंने इस प्रक्रिया को सही ठहराने की कोशिश करते हुए कहा कि हम अब एक ऐसे समय में रह रहे हैं जहां कुछ लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करने के बजाय लोगों की हत्या करने में यकीन करते हैं.

बॉस्टन मैराथन का ज़िक्र करते हुए केरी ने कहा कि लोगों ने हमसे पूछा कि आपने संदिग्ध चरमपंथियों को पहले ही क्यों नहीं रोका. वह इसलिए कि हम लोगों की निजी ईमेल नहीं देखते हैं.

भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने अमरीकी राष्ट्रपति की बात को दोहराया कि ऐसी कोशिशों के चलते ही कई देशों में आतंकी हमलों को रोका जा सका है.

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