पाकिस्तान: 'कोर कमांडर का मोर, उसका चोर और देश के हालात'

कोर कमांडर के मोर

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    • Author, मोहम्मद हनीफ़
    • पदनाम, पत्रकार और विश्लेषक

चोर चाहता तो कोर कमांडर के घर से कोई क़ीमती चीज़ उठा ले जाता. वो दीवार पर लगी घड़ी, छत पर लगा झूमर, किचन में पड़ा डिनर सेट ले जा सकता था. वो फ़्रिज में रखा क़ोरमा या ठंडी स्ट्रॉबेरी भी खा सकता था.

वो सोफ़े के डिज़ाइनर कुशन, दीवारों पर लगी क़ीमती पेटिंग या फिर कोर कमांडर के घर में लगी तलवारें, सजावटी बंदूकें ले जा सकता था.

वो पैसे, महंगे इत्र, फूलदान, क्रिस्टल का ऐशट्रे, रेशम के पर्दे या टेबल लैंप ले जा सकता था. वो वहां लगी वो तस्वीरें ले जा सकता था जो ऐतिहासिक मौक़ों की याद दिलाती थीं.

लेकिन ये सब सामान उसने लाहौर में कोर कमांडर के घर के लॉन में छोड़ दिया. जो चीज़ उसने चुराई- वो थी मोर. उसने सारा सामान छोड़कर मोर को उठाया और उसे अपने साथ ले गया.

जब एक कैमरामैन ने वहां एक व्यक्ति से पूछा कि 'क्या कर रहे हो' तो उन्होंने बड़ी सादगी से जवाब दिया 'हमारी संपत्ति चुरा ली गई है जिसे अब हम वापस ले रहे हैं.' जब ये पूछा गया कि 'चोर क्या ले गया है', तो उसने कहा कि 'वो एक मोर ले गया है.'

आसपास के लोगों का यही कहना था कि पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ. पाकिस्तान में कई ऐसी बातें हुई हैं जो अख़बारों की सुर्खियां बनीं हैं, जैसे यहां प्रधानमंत्री जेल आते-जाते रहे हैं, प्रधानमंत्री को फांसी दी गई है, नेता शहीद होते रहे हैं और उन्हें देश निकाला भी दिया जाता रहा है.

यहां सालों से राजनेता जेलों में हैं और किसी जज ने फ़ोन कर उन्हें ये नहीं पूछा कि अपना अपराध बताइए.

लेकिन इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब लोगों ने देखा कि पाकिस्तान के कोर कमांडर का घर भीतर से आख़िर दिखता कैसा है. उनके घर में कितनी तस्वीरें हैं, कितना बड़ा स्विमिंग पूल है, कितने पेड़ हैं जिन्हें करीने से काटा गया है.

लोगों को ये भी पता चला कि कोर कमांडर के घर का असल नाम 'जिन्ना हाउस' है, जिसे कभी देश के क़ायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना ने खरीदा था.

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जमात-ए-इस्लामी, तहरीक़-ए-लब्बैक और मुस्लिम लीग सभी ख़ुद के क़ायद-ए-आज़म का असली वारिस होने का दावा करते हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के बारे में कहा जाता है कि वो क़ायद-ए-आज़म द्वितीय की तरह हैं. लेकिन वारिस वो होता है जिसे क़ायद-ए-आज़म के बाद उनकी संपत्ति मिले.

लिहाज़ा इस बारे में अब किसी को शक़ नहीं होना चाहिए कि क़ायद-ए-आज़म के असली वारिस कौन हैं. और ये हैं लाहौर के कोर कमांडर जो क़ायद-ए-आज़म के खरीदे घर में रहते हैं.

लाहौर के मुख्यमंत्री आवास में शहबाज़ शरीफ़ बैठे हों या फिर वहां चौधरी या बुज़दार हों, लाहौर के असली बादशाह तो कोर कमांडर हैं. इसलिए किसी को भी उनके घर की भव्यता और समृद्धि पर संदेह नहीं करना चाहिए.

सवाल ये उठना चाहिए कि वो कैसे दयालु राजा हैं जो अपने घर की रक्षा नहीं कर पाए और जो इतने निर्दयी हैं कि उन्होंने अपने प्यारे मोर को चोरों की दया पर छोड़ दिया.

आम तौर पर मोर वो लोग रखते हैं जो अमीर होते हैं और जिनकी जिज्ञासा अधिक होती है. ये ऐसे लोग होते हैं जिनके घरों में बड़े-बड़े बाग़ीचे होते हैं और इन बाग़ीचों में मोर को घूमता देख उन्हें अपने छोटे-मोटे मुग़ल बादशाह होने का आभास होता है.

मोर, बिल्ली या कुत्ते जैसा पालतू जानवर नहीं होता जो अपनी पूंछ हिलाकर बच्चों के साथ खेलता है. मोर लोगों से दूर-दूर चलता है. वो कहता है 'मुझे देखो, मैं कितना सुंदर हूं.' जब मोर अच्छे मूड में होता है, वो अपने पंख फैलाता है और आकाश को ढंक देता है.

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कोर कमांडर का जो मोर चोर उठा कर ले गया वो शान्त स्वभाव का था. अगर घर में कभी आग लगी होती, लोग घर में तोड़फोड़ करते, लोगों का हूजूम वहां नारे लगाता तो शायद मोर चिल्लाना सीख जाता लेकिन मोर ने कोर कमांडर के घर के बाग़ीचे में कभी ये सब सुना ही नहीं.

हो सकता है कि चोर अपने बारे में ये सोच रहा हो कि वो एक मसीहा है जो मोर को कैद से निकाल कर उसकी जान बचा रहा है. ये चोर अपने मुंह पर मास्क लगाए मासूम और ज़िम्मेदार नज़र आता है. वो ज़रूर नरम दिल का व्यक्ति होगा जो महल जैसे घर से महंगी चीज़ें ले जाने की बजाय गोद में केवल एक मोर लेकर निकल गया.

इस समय पाकिस्तान की आदालतों में भ्रष्टाचार के हज़ारों मामले चल रहे हैं. कोर कमांडर के घर में घुसकर दंगा करने वालों को आतंकवादी बताया जा रहा है. लेकिन वो साफ़ तौर पर क्रांति लाने निकला था.

खाना

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जहां कुछ लोग लाहौरियों की तारीफ़ कर रहे हैं कि उन्होंने वो कर दिखाया जो बलूच और सिंधी कभी नहीं कर सके, वहीं कुछ लोग लाहौरियों को ताना दे रहे हैं कि अगर यही काम किसी ग़ैर-पंजाबी ने किया होता, तो अभी सड़कों पर लाशें पड़ी होतीं.

लेकिन इन सभी चर्चाओं के बीच मेरा सरोकार है केवल मोर और मोर चोर से. मैं सोच रहा हूं कि क्या मोर को अपने नए घर में सही खाना मिलेगा, क्या वो वहां आराम से रह पाएगा क्योंकि मुझे भरोसा है कि उसका नया घर कोर कमांडर के घर से बहुत छोटा होगा. मुझे मोर की ज़्यादा चिंता है.

एक जलते हुए घर से किसी जानवर को बचाने के लिए उस चोर की तारीफ तो की ही जानी चाहिए. लेकिन मुझे शक़ है कि उस चोर ने पहले कभी पुलिस स्टेशन नहीं देखा होगा और पुलिस फिलहाल उसकी तलाश में जुटी होगी. रही पुलिस की बात तो उन्हें भी सिर्फ फ़िल्मों में ही पुलिस की वर्दी देखी होगी. लेकिन चोर का अब क्या भविष्य होगा?

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पाकिस्तान में किसी को इमरान ख़ान की जान की चिंता है, किसी को सरकार के भविष्य की चिंता है तो किसी को उन कोर कमांडर की चिंता है जिनका घर जल चुका है.

लेकिन मुझे अगर चिंता है तो, वो है मोर और मोर चोर की. आज के हमारे जलते हुए घर में यही दोनों उम्मीद की किरण हैं.

देश में क्रांति लानी हो तो लाओ, चुनाव करवाने हों तो करो, लेकिन मोर और मोर चोर को अकेला मत छोड़ना.

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