पाकिस्तान: वो ‘डर्टी हैरी’ कौन है जिसकी हो रही है ख़ूब चर्चा

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- Author, शुमाइला जाफ़री
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, इस्लामाबाद
पाकिस्तान के सियासी हलकों में इन दिनों 'डर्टी हैरी' की बड़ी चर्चा हो रही है. पाकिस्तान की राजनीति में इस जुमले की एंट्री पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने उस वक़्त कराई थी, जब उनके कुछ क़रीबी नेताओं को गिरफ़्तार किया गया था.
अपनी एक रैली में इमरान ख़ान ने कहा था कि, इस्लामाबाद में एक 'डर्टी हैरी' को तैनात किया गया है, ताकि पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ को सबक़ सिखाया जा सके.
पिछले साल अप्रैल में इमरान ख़ान को हुकूमत से बेदख़ल किए जाने के बाद से ही तहरीक़-ए-इंसाफ़ इसके ख़िलाफ़ अभियान छेड़े हुए है.
इमरान ख़ान की पार्टी का आरोप है कि उनको प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए पाकिस्तान की मौजूदा गठबंधन सरकार, फ़ौज और अमेरिका ने मिलकर साज़िश रची और अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए इमरान को सत्ता से बेदख़ल किया गया.
'डर्टी हैरी' कौन है?

मूल रूप से तो डर्टी हैरी, हॉलीवुड फिल्मों की सिरीज़ का एक किरदार था, जिसे पर्दे पर अभिनेता क्लिंट ईस्टवुड ने निभाया था. फिल्मों में इस किरदार का नाम इंस्पेक्टर हैरोल्ड फ्रांसिस शालन होता है, जिसे डर्टी हैरी का खिताब दिया गया था.
डर्टी हैरी की इमेज एक एंटी हीरो क़िस्म के पुलिस अफ़सर की थी, जो अपराधियों के साथ अपने तरीक़े का इंसाफ़ करने के लिए अपने पेशेवराना और क़ानूनी हदें पार करने से नहीं हिचकता था.
डर्टी हैरी का ये कैरेक्टर काफ़ी लोकप्रिय हुआ था और अमेरिका में एक मशहूर सांस्कृतिक प्रतीक बन गया था. बाद के दिनों में डर्टी हैरी का जुमला उन पुलिसवालों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा था, जो निर्मम और बेलगाम होते थे.

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हालांकि, इमरान ख़ान डर्टी हैरी शब्द का इस्तेमाल, आईएसआई के एक मौजूदा जनरल के लिए करते हैं. इमरान ख़ान, आईएसआई के मेजर जनरल फ़ैसल नसीर पर बार-बार अपनी हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाते रहे हैं.
इमरान ने अपने समर्थकों से भी ये कह रखा है कि अगर उनको कुछ होता है, तो इसके लिए मेजर जनरल फ़ैसल नसीर ही ज़िम्मेदार होंगे.
इमरान ख़ान ने, मेजर जनरल फ़ैसल नसीर पर अपनी पार्टी के समर्थक पत्रकार अरशद शरीफ़ की हत्या का इल्ज़ाम भी लगाया है. इमरान ख़ान, जनरल फ़ैसल पर अपने सहयोगियों को हिरासत में लिए जाने और पूछताछ के नाम पर उनको अगवा करने, उन्हें गिरफ़्तार करने और नंगा करके टॉर्चर करने का आरोप लगाते रहे हैं.
मंगलवार को जब इमरान ख़ान अदालत में पेशी और कई मामलों में अग्रिम ज़मानत लेने के लिए इस्लामाबाद रवाना हुए थे, तब भी उन्होंने एक वीडियो जारी करके एक बार फिर डर्टी हैरी के जुमले का इस्तेमाल किया था.
अपनी कार में बैठकर वीडियो रिकॉर्ड करते हुए इमरान ख़ान ने कहा था, 'मैं जान देने के लिए तैयार हूं. ये डर्टी हैरी और उसके साथियों ने एक प्लान बनाया है. अब अगर अल्लाह की यही ख़्वाहिश है कि वो मेरी ज़िंदगी उनके हवाले करने जा रहा है, तो मैं इसके लिए तैयार हूं. लेकिन सवाल ये है कि क्या आप सब इसके लिए तैयार हैं?"
"क्या वो लोग जो हुकूमत में बैठे हैं, वो हक़ीक़त का सामना करने को तैयार हैं? हो सकता है कि मेरी गिरफ़्तारी के बाद लोग बड़ी तादाद में सड़कों पर न उतरें. लेकिन, इस बात की आशंका बहुत ज़्यादा है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को श्रीलंका से भी बुरे हालात का सामना करना पड़ सकता है.'



पाकिस्तानी फ़ौज का बयान

एक दिन पहले यानी सोमवार को, पाकिस्तानी फ़ौज के जनसंपर्क विभाग, आईएसपीआर ने सीधे पूर्व प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए एक बयान जारी किया.
ऐसा बहुत कम होता है, जब पाकिस्तानी फ़ौज या आईएसपीआर किसी राजनेता इंसान को सीधे संबोधित करते हुए बयान दे, लेकिन आईएसपीआर ने अपने बयान में मेजर जनरल फ़ैसल नसीर के ख़िलाफ़ इमरान ख़ान के आरोपों को 'बेबुनियाद और ग़ैरज़िम्मेदाराना'क़रार दिया.
फ़ौज ने इस बयान में कहा कि आईएसआई जनरल के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप मनगढ़ंत, बदनीयती से भरपूर, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अस्वीकार्य हैं.
आईएसपीआर ने ये भी कहा कि पिछले एक साल से सियासी मक़सद से झूठे, उकसाने वाले और सनसनीख़ेज़ आरोपों के ज़रिए सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियो को निशाना बनाने का चलन सा बन गया है.

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फ़ौज ने इमरान ख़ान का नाम लिए बग़ैर बयान में कहा कि अगर उनके पास ठोस सुबूत हैं, तो वो फ़र्ज़ी आरोप लगाने के बजाय क़ानूनी रास्ता अपनाएं, वरना फ़ौज भी क़ानूनी कार्रवाई का पूरा अख़्तियार रखती है.
आईएसपीआर के बयान का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी समर्थन किया.
अपने एक ट्वीट में शहबाज़ ने कहा कि इमरान ख़ान 'बिना किसी सुबूत के' मेजर जनरल फ़ैसल नसीर पर आरोप लगा रहे हैं शहबाज़ ने आरोप लगाया कि इमरान ख़ान लगातार फ़ौज को 'बदनाम कर रहे हैं और धमका रहे हैं.'
शहबाज़ शरीफ़ ने चेतावनी दी कि इन बातों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पाकिस्तान के सियासी जानकार मुसर्रत अमीन कहते हैं कि पाकिस्तान की तारीख़ का ये अभूतपूर्व लम्हा है. इससे पहले फ़ौज पर कभी भी इस तरह सीधे और तीखे आरोप नहीं लगाए गए थे.
पाकिस्तान में पिछले एक साल से फ़ौज पर आरोपों, हमलों, नाम लेकर इल्ज़ाम लगाने और फ़ौज के ख़िलाफ़ ट्विटर ट्रेंड चलाने की मुहिम चल रही है. ये मुहिम थमने का नाम नहीं ले रही.

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इमरान ने लक्ष्मण रेखा पार कर दी?

मुसर्रत अमीन मानते हैं कि सोमवार को आईएसपीआर का जो बयान आया, वो इस बात की तस्दीक़ करता है कि लगातार इल्ज़ामों से फ़ौज बेहद ख़फ़ा और खीझ चुकी है.
उसके सब्र का बांध टूट रहा है. मुसर्रत कहते हैं, 'ये बयान इस बात का सुबूत था कि पिछले साल इमरान ख़ान को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही जो टकराव शुरू हुआ था, वो अपने आख़िरी मोड़ पर पहुंच गया है.'
वो कहते हैं, "ये बदक़िस्मती की बात है कि हालात इस मोड़ तक आ पहुंचे हैं. मेरा तो मानना है कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, सभी भागीदारों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो एक साथ बैठकर इस मुश्किल का हल निकालें."
पिछले साल नवंबर में अपने ऊपर हुए हमले के बाद, इमरान ख़ान ने पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, गृह मंत्री राना सनाउल्लाह और मेजर जनरल फ़ैसल नसीर को इस हमले का ज़िम्मेदार बताया था. लेकिन, पुलिस ने उनकी एफ़आईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था.

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इमरान ख़ान के समर्थकों का ये मानना है कि पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ के नेताओं पर जो बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं, वो दरअसल नाइंसाफ़ी हैं. इमरान ख़ान कहते हैं कि अगर उनकी तहरीर पर एफ़आईआर दर्ज की गई होती, तो वो अपने आरोपों के सुबूत भी देते. लेकिन, उन्हें तो कभी इसका मौक़ा भी नहीं दिया गया था.
राजनीतिक विश्लेषक इम्तियाज़ गुल का कहना है कि इमरान ख़ान, पाकिस्तान के पहले सियासतदां नहीं हैं, जिन्होंने फ़ौज से पंगा लिया है.
इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ शरीफ़, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता और बहुत से दूसरे राजनेताओं ने भी फ़ौज के ख़िलाफ़ खुलकर इल्ज़ाम लगाए हैं.
इन पार्टियों के नेता, सियासत में फ़ौज की दख़लंदाज़ी और पर्दे के पीछे से दांव-पेंच खेलने को लेकर उसको नीचा दिखाते रहे हैं.
इम्तियाज़ गुल मानते हैं कि फ़ौज के भीतर भी, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को काफ़ी समर्थन हासिल है और इससे भी फ़ौज के लिए ख़तरे की घंटी बज गई है.
फिर भी, मंगलवार की सुबह इमरान ख़ान के वीडियो जारी करने के बावजूद किसी को ये आशंका नहीं थी कि डर्टी हैरी का मामला इतना नाटकीय मोड़ ले लेगा.

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नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (नैब) ने मंगलवार को दोपहर बाद पाकिस्तान रेंजर्स के सैकड़ों जवानों की मदद से इमरान ख़ान को इस्लामाबाद हाई कोर्ट परिसर से गिरफ़्तार कर लिया. हैरानी की बात ये है कि इमरान ख़ान को भ्रष्टाचार के ऐसे मामले में गिरफ़्तार किया गया, जिसकी बहुत ज़्यादा चर्चा नहीं हुई थी.
पाकिस्तान के गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने इस्लामाबाद में मीडिया से खचाखच भरी प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "ये भ्रष्टाचार का मामला है, जिसके दस्तावेज़ी सुबूत मौजूद हैं. अगर वो (तहरीक़-ए-इंसाफ़ के लोग) इसके दस्तावेज़ देखना चाहते हैं, तो वो कल सुबह उनको मुहैया करा दिए जाएंगे."
हालांकि, इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद सड़कों पर उतरे उनके समर्थकों के निशाने पर न तो शहबाज़ हुकूमत थी और न ही नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो. इमरान ख़ान के समर्थकों ने अपना ग़ुस्सा फ़ौजी ठिकानों पर निकाला. तहरीक़-ए-इंसाफ़ के कार्यकर्ताओं के निशाने पर रावलपिंडी में फ़ौज का मुख्यालय और लाहौर में कोर कमांडर का आवास भी आया.
इसके अलावा, पाकिस्तान के कुछ और शहरों के कैंट पर भी इमरान समर्थकों ने हमला किया. उन्होंने दीवारों और फाटकों को निशाना बनाया और फ़ौज के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की. इमरान ख़ान के ज़्यादातर समर्थक, इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी का इल्ज़ाम फ़ौज पर लगा रहे हैं. इससे पता चलता है कि इमरान ख़ान ने डर्टी हैरी को लेकर जिस तरह अपने बयानों से माहौल बनाया था, उस पर उनके समर्थकों को पूरा यक़ीन है.
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