चीन से निपटने की योजना में भारत से क्या चाहता है ऑस्ट्रेलिया?

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- Author, टॉम ह्यूस्डन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, सिडनी
ऑस्ट्रेलिया ने अपनी प्रमुख रक्षा समीक्षा में कहा है कि चीन से बढ़ते ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए वो लंबी दूरी की मिसाइलों को ख़रीदने में तेज़ी लाएगा.
इसमें आगे चेतावनी दी गई है कि इस 'मिसाइल एज' में उसके भौगोलिक रूप से अलग-थलग होने के कारण उसे लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है.
रिपोर्ट में जो तुरंत सुझाव दिए गए हैं उसकी पूर्ति के लिए सरकार 12 अरब अमेरिकी डॉलर ख़र्ज करेगी.
110 पेजों के इस अध्ययन में दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रेलिया की डिफ़ेंस रणनीति में सबसे बड़े बदलाव के बारे में बताया गया है.
ऑस्ट्रेलिया के डिफ़ेंस स्ट्रैटेजिक रिव्यू 2023 में भारत और जापान जैसी क्षेत्र की प्रमुख शक्तियों के साथ रिश्तों में विस्तार देने की भी बात कही गई है.
चीन को लेकर बढ़ता डर

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ताइवान को लेकर चीन के नज़रिए के कारण क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान ऑस्ट्रेलिया का यह डिफ़ेंस स्ट्रैटेजिक रिव्यू (डीएसआर) जारी हुआ है. चीन लगातार कहता रहा है कि वो ज़रूरत पड़ने पर ताइवान को जबरन छीन सकता है.
चीनी नौसेना दक्षिण चीन सागर में अपनी बढ़ी हुई मौजूदगी स्थापित कर चुकी है और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के विपरीत वो इस क्षेत्र पर अपना दावा करती रही है.
रिपोर्ट में कहा गया है, "दूसरे विश्व युद्ध के ख़त्म होने के बाद चीन का सैन्य बंदोबस्त सबसे बड़ा है और यह किसी भी देश से सबसे अधिक महत्वाकांक्षी है. चीन के रणनीतिक इरादे भारत-प्रशांत क्षेत्र में बिना किसी पारदर्शिता या आश्वासन के बढ़ रहे हैं."
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा है कि यह समीक्षा 'इंतज़ार किए बिना हमारे भविष्य को आकार देगी' और इसकी सिफ़ारिशें ऑस्ट्रेलिया को 'अधिक आत्म निर्भर, अधिक तैयार और अधिक सुरक्षित' बनाएगा.
ऑस्ट्रेलिया का अब किस पर होगा ज़ोर
रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स कहते हैं कि इसमें सिफ़ारिश की गई है कि ऑस्ट्रेलिया को अब ज़मीनी हथियारों से हटकर 'लंबी दूरी तक निशाना साधने वाले और ऑस्ट्रेलिया में बने गोला-बारूद पर' अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
मार्ल्स ने पत्रकारों से कहा, "हमें ऐसे रक्षा बल की ज़रूरत है जिसकी लंबी दूरी तक लड़ने की असरदार क्षमता हो."
मंत्री ने कहा कि 500 किलोमीटर की दूरी तक 'सटीक हमला करने वाली मिसाइलों' की ख़रीद सेना को 'मज़बूती और भविष्य में जिस तेज़ी की ज़रूरत होगी' वो देगा.

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भारत की क्या होगी भूमिका
समीक्षा रिपोर्ट में भारत-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा सहयोग कार्यक्रम को बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है जो कि ऑस्ट्रेलिया के हित में होगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया को जापान और भारत जैसी प्रमुख शक्तियों के साथ व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की है.
इसमें आगे कहा गया है कि हिंदू महासागर में ऑस्ट्रेलिया की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि इस महासागर में उसकी सबसे लंबी समुद्री रेखा है और ऑस्ट्रेलिया को भारत और जापान के साथ संबंधों में विस्तार देने की ज़रूरत है.
साल 2022 में एक थिंक टैंक की रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलियाई सेना को 'एक सबसे ख़राब आशंका' को लेकर चेताया गया था. इसमें बताया गया था कि ताइवान को लेकर एक संभावित युद्ध के दौरान उसके क़रीब का क्षेत्र चीन नियंत्रण में ले लेगा.
ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) के विश्लेषक मैल्कम डेविस कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया की नई रक्षा रणनीति का मक़सद है कि 'जहां तक संभव हो चीन जैसे एक शक्तिशाली दुश्मन को' दूर रखा जाए.
वो कहते हैं, "हम कोशिश कर रहे हैं कि चीन अपने बल का इस्तेमाल कर अपने उद्देश्यों को पूरा करने से रोके जो वो ताइवान या दक्षिण चीन सागर में चाह रहा है. तो एक तरह से यह बचाव है. लेकिन बचाव नाकाम हो सकता है जैसे कि हम यूक्रेन में देख चुके हैं, इसलिए आपको भी जवाब के लिए तैयार रहना चाहिए. हम जिसमें निवेश कर रहे हैं वो नाटकीय रूप से लंबी दूरी तक हमारी लड़ने की क्षमता को बढ़ाएगी."
हालांकि उन्होंने कहा कि यह समीक्षा 'सही दिशा में क़दम है' लेकिन यह पूरा समाधान नहीं है.
वो कहते हैं, "हम ऐसे रास्ते पर चलने जा रहे हैं जो एक ऐसा रक्षा बल देगा जो सटीक निशाने के लिए बनेगा और यह उस तरह के ख़तरे के लिए सटीक है जिसका हम इस दशक और उसके आगे भी सामना करेंगे. लेकिन मुझे लगता है कि बहुत कुछ करने की ज़रूरत है. हमें सेना पर और ख़र्च करने की ज़रूरत है और मैदान में तेज़ी से सेना उतारने के लिए हमें निवेश की ज़रूरत है."

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कई योजना जाएंगी ठंडे बस्ते में
रणनीतिक समीक्षा में ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न डिफ़ेंस को मज़बूत करने और एडीएफ़ को नॉर्दर्न बेस से ज़्यादा ऑपरेट करने की क्षमता देने के लिए कहा गया है.
ऑस्ट्रेलिया ज़मीन से मार करने वाली हाई मॉबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट (HIMARS) सिस्टम ख़रीदने की फ़ास्ट ट्रैक योजना बना रहा है. इस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल यूक्रेनी सेना बड़े असरदार तरीक़े से रूस के ख़िलाफ़ कर चुकी है.
ऑस्ट्रेलिया की नई प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए कई पुरानी परियोजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा जिनमें नई स्व-चालित बंदूक़ें और हथियारों की सप्लाई करने वाली गाड़ियों की ख़रीद शामिल है.
रक्षा मंत्री मार्ल्स कहते हैं कि समीक्षा रिपोर्ट में 'देश में लगातार जहाज़ निर्माण की क्षमता बढ़ाने' के महत्व पर ज़ोर दिया गया है.
इसमें यह भी सलाह है कि लड़ाकू जहाज़ के लिए लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल ख़रीदी जाए लेकिन इसमें नए यूएस बी-21 रैडर को बेहतर विकल्प नहीं बताया गया है.
बीते महीने अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया को 220 क्रूज़ मिसाइलें बेचने के 895 मिलियन डॉलर के सौदे को मंज़ूरी दी थी.
वहीं वर्जीनिया-क्लास पनडुब्बियों में इस्तेमाल होने वाली ग़ैर-परमाणु मिसाइलों को भी ऑस्ट्रेलिया इस्तेमाल करेगा जिसे वो ऑकस रक्षा समझौते के तहत अमेरिका से हासिल करेगा.
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