फ्रांस को चीन से उम्मीद, शी जिनपिंग करेंगे पुतिन से बात, रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने में करेंगे मदद

शी जिनपिंग और इमैनुएल मैक्रों

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    • Author, टेसा वॉन्ग और हू शोफ़ील्ड
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, सिंगापुर और पेरिस

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा है कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के सैन्य अभियान को रोकने में वो मदद करें.

अपने आधिकारिक चीन दौरे के दौरान उन्होंने शी जिनपिंग से कहा, "मैं जानता हूं कि आप रूस को होश में ला सकेंगे और इससे जुड़े सभी पक्षों को भी बातचीत की मेज़ तक ला सकेंगे."

वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और फ्रांस दोनों की ही ज़िम्मेदारी है कि वो विश्व शांति की रक्षा करें.

लेकिन रूस ने कहा है कि अब तक "इस समस्या के शांतिपूर्ण हल" का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है. रूस ने कहा है कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ उसका 'विशेष सैन्य अभियान' अभी जारी रहेगा.

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपियन कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन देर लियेन फिलहाल चीन के दौरे पर हैं. गुरुवार को मैक्रों के सम्मान में चीनी राष्ट्रपति ने रात्रिभोज का आयोजन किया था. इसके बाद शुक्रवार को दोनों नेता चीन के दक्षिणी शहर गुंआंगज़ू जाने वाले हैं.

शी जिनपिंग और इमैनुएल मैक्रों

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यूरोप के दो बड़े नेता क्यों कर रहे चीन का दौरा?

बीते कुछ वक्त से अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में तल्ख़ी आई है.

दोनों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर से जारी ट्रेड वॉर तो था ही अमेरिका के आसमान में दिखे कथित स्पाई बलून और फिर ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन के अमेरिका दौरे से दोनों के बीच रिश्ते अपने सबसे मुश्किल दौर में हैं.

इसी साल मार्च में शी जिनपिंग ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की थी. इससे ठीक पहले चीन ने एक 12 सूत्री कार्यक्रम पेश किया था जिसे 'बीजिंग पीस प्लान' कहा जा गया.

पश्चिमी मुल्क इस बात से नाराज़ हैं कि चीन ने अब तक सार्वजनिक तौर पर यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के इस कदम की आलोचना नहीं की है. अपने पीस प्लान में भी चीन ने रूसी सैन्यबलों के बाहर निकलने की बात नहीं की है.

लेकिन मैक्रों केवल रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में बात करने के लिए चीन के दौरे पर नहीं गए हैं, इस दौरान उन्होंने चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते मज़बूत करने को लेकर भी चर्चा की है.

गुरुवार दोपहर जब इमैनुएल मैक्रों बीजिंग पहुंचे, उनका स्वागत एक भव्य सैन्य परेड से किया गया. इसके बाद उन्होंने शी जिपनिंग के साथ चर्चा की. बंद दरवाज़े के पीछे हुई इस चर्चा को चीन और फ्रांस के अधिकारियों ने "दोस्ताना माहौल में हुई खुली बातचीत" कहा है.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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बैठक के बाद शी जिनपिंग ने संवाददाताओं से कहा कि, "चीन शांति वार्ता के पक्ष में है और चाहता है कि इसका राजनीतिक हल निकले". उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में "संयम" बतने की अपील की.

शी जिनपिंग ने कहा कि संघर्ष में किसी सूरत में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

इसी सप्ताह रूस ने कहा था वो अपने पड़ोसी बेलारूस में सामरिक तौर पर अहम परमाणु हथियार रखना चाहता है. बेलारूस की सीमा पश्चिम में नेटो के सहयोगी देश से मिलती है.

मैक्रों ने कहा कि जब तक यूक्रेन पर किसी और का कब्ज़ा रहेगा "हमें स्थिर और सुरक्षित यूरोप नहीं मिल सकेगा." उन्होंने ये भी कहा कि ये "कतई स्वीकार्य" नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक सदस्य ने ही उसके चार्टर का उल्लंघन किया है.

संवाददाता सम्मेलन में मैक्रों बेहद संभलकर और दोस्ताना लहज़े में बात कर रहे थे और बार-बार मुड़कर शी जिनपिंग की तरफ देख रहे थे. ये शी जिंनपिंग की स्पीच से बेहद अलग था क्योंकि स्पीच देते वक्त वो भावना शून्य लग रहे थे.

शी जिनपिंग, इमैनुएल मैक्रों और उर्सुला वॉन देर लियेन

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यूरोपियन कमिशन की अध्यक्ष के तीखे बोल

यूरोपियन कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन देर लियेन भी इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर चीन के दौरे पर हैं.

मैक्रों और शी जिनपिंग के संवाददाता सम्मेलन के बाद हुए एक अलग संवाददाता सम्मेलन में उर्सुला वॉन देर लियेन ने कहा कि अगर चीन रूस को हथियारों की सप्लाई करता है तो ये अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन होगा और इससे यूरोपीय संघ और चीन के बीच रिश्तों को "गंभीर नुक़सान" होगा.

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन "केवल शांति को बढ़ावा" देने की भूमिका में रहेगा.

उन्होंने कहा कि वो यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की शांति योजना की समर्थक हैं जिनका कहना है कि रूस को अपनी पूरी सेना यूक्रेन से हटानी चाहिए.

24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध को एक साल पूरा हो गया. इसके एक दिन बाद चीन ने 'चाइनाज़ पोज़िशन ऑन पॉलिटिकल सेटलमेन्ट ऑफ़ द यूक्रेन क्राइसिस' नाम का एक पेपर पेश किया है, जिसमें उसने यूक्रेन में शांति को लेकर बात की और कहा कि बातचीत के ज़रिए इसका हल निकाला जा सकता है.

पश्चिमी मुल्कों ने इस योजना को ये कहते हुए इसे ख़ारिज कर दिया कि चीन रूस का पक्ष ले रहा है. लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेन्स्की ने इसमें दिलचस्पी दिखाई और कहा कि वो इस मसले पर चीनी राष्ट्रपति से मुलाक़ात करना चाहते हैं. हालांकि शी जिनपिंग ने अब तक सार्वजनिक तौर पर इसका कोई जवाब नहीं दिया है.

उर्सुला वॉन देर लियेन ने कहा कि शी जिनपिंग के साथ हुई उनकी बातचीत में उन्होंने ज़ेलेन्स्की से बातचीत करने में "दिलचस्पी" दिखाई है और कहा है कि "जब इसके लिए वक़्त सही होगा" वो ऐसा करेंगे.

वहीं गुरुवार को रूस ने कहा था कि चीन में "कारगर तरीके से मध्यस्थता करने की पूरी संभावना है."

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "अभी यूक्रेन को लेकर स्थिति जटिल है, अब तक इसके शांतिपूर्ण हल की संभावना नहीं दिख रही है. ऐसे में रूस के पास युद्ध जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है."

वीडियो कैप्शन, चीन से ख़तरे को देखते हुए ताइवान ने अपने अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण को बढ़ाकर किया एक साल.

मैक्रों का चीन दौरा क्यों अहम?

बीते साल नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाक़ात के बाद चीन के राष्ट्रपति के साथ किसी पश्चिमी मुल्क के नेता की ये पहली मुलाक़ात है. बाइडन से शी जिनपिंग की मुलाक़ात बाली में जी20 सम्मेलन के दौरान हुई थी.

इमैनुएल मैक्रों अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए प्रयास करने वाले नेता के तौर पर अपनी छवि चमकाना चाहते रहे हैं. अब चीन की इस यात्रा के बाद राष्ट्रपति मैक्रों का यूक्रेन युद्ध में भूमिका निभा रहे लगभग सभी बड़े देशों के साथ निजी संपर्क स्थापित हो गया है.

जनकार मानते हैं कि उन्हें पता है कि वो चीन के इस दौरे से खाली हाथ नहीं लौटेंगे बल्कि कुछ बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के साथ ही वापस आएंगे. हालांकि रूस और यूक्रेन को लेकर शी जिनपिंग अपनी राय बदलेंगे, इसके आसार कम ही दिखते हैं.

ऐसे में माना जा रहा है मैक्रों छोटी-छोटी उद्देश्यों की तरफ कदम बढ़ाएंगे, दोनों के बीच आम हितों के मुद्दे तलाशेंगे और व्यापार और बातचीत की राह अपनाएंगे.

फ्रांस पश्चिमी मुल्कों के गठबंधन में अहम सदस्य है. कहा जाता है कि वो मानते हैं कि फ्रांस अमेरिका से क़रीब है इसका मतलब ये नहीं है कि वो रूस के मित्र देश चीन के साथ अपने रिश्ते गहरे नहीं कर सकता.

संवाददाता सम्मेलन में बात करते हुए मैक्रों ने चीन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर लगे आरोपों का न के बराबर ज़िक्र किया, हालांकि कहा कि फ्रांस के लिए ये मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं लेकिन "लेक्चर देने से अच्छा है कि हम एकदूसरे का सम्मान कर सकें."

चीन पर शिनजियांग प्रांत में रह रहे अल्पसंख्यक मुसलमान वीगर समुदाय के लोगों को जबरन री-एजुकेशन कैंपों में रखने और उनके दमन का आरोप है. पश्चिमी मुल्कों और चीन के बीच ये तनाव का बड़ा मुद्दा रहा है. हालांकि चीन खुद पर लगे इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

मैक्रों की इस यात्रा के दौरान फ्रांस और चीन की कंपनियों और सांस्कृतिक संस्थाओं बीच कई अहम समझौते हुए हैं.

मैक्रों के चीन दौरे में उनके साथ व्यापारियों, कलाकारों और म्यूज़ियम अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है. इसमें विमान उत्पादन के काम में लगे एयरबस, लग़्ज़री सामान बनाने वाली कंपनी एलवीएचएम और परमाणु उर्जा उत्पादक ईडीएफ़ के प्रतिनिधि शामिल हैं.

इससे पहले मैक्रों ने चार साल पहले नवंबर 2019 में जापान के ओसाका में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की थी. उस वक्त फ्रांस खुद परेशानी से जूझ रहा था. पेंशन योजना में सुधारों को लेकर वहां कई सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन हुए थे.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: बख़मूत में रूस को ऐसे रोक रहा यूक्रेन

यूरोप के देशों के बीच चीन को लेकर मतभेद

इसी साल अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन चीन पहुंचने वाले थे, लेकिन कथित स्पाई बैलून के मामले पर तनाव गहराया और ये दौरा रद्द हो गया.

ऐसे में फ्रांसीसी राष्ट्रपति का चीन दौरा शी जिनपिंग से बात करने का अमेरिका का मौक़ा हो सकता है. चीन दौरे पर निकलने से पहले मैक्रों ने जो बाइडन से बात भी की थी और दोनों के बीच चीन से बातचीत के मुद्दे पर ही चर्चा हुई थी.

मैक्रों और उर्सुला का ये दौरा इस लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है कि दोनों साथ आकर यूरोपीय एकता का संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं. हाल के दिनों में ये चर्चा गर्म थी कि चीन यूरोपीय मुल्कों के बीच के मतभेद का फायदा उठाकर उन्हें अमेरिका से दूर कर सकता है.

लेकिन यूरोप के अलग-अलग देश चीन के साथ अलग-अलग स्तर पर रिश्ते रखना चाह रहे हैं और यूरोपीय संघ में इसे लेकर आम सहमति बनना अभी बाक़ी है. फ्रांस और जर्मनी चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते रखना चाहते हैं, वहीं पूर्व में सोवियत संघ का हिस्सा रहे मुल्कों को लग रहा है कि यूक्रेन के हिस्सों पर कब्ज़ा करने के बाद रूस उनकी तरफ रुख़ कर सकता है.

जानकार मानते हैं कि चीन यूरोप के साथ रिश्ते बढ़ाने के लिए रूस के साथ अपने रिश्तों का इस्तेमाल कर सकता है. विदेशी मामलों पर यूरोपीय काउंसिल में एशिया कार्यक्रम के निदेशक जान्का ओरटेल कहते हैं, "अमेरिका और नेटो के साथ जाने के अलावा यूरोप को ये भी चाहिए कि वो अपनी रेखा खुद बनाए और चीन के साथ रिश्तों में तनाव का नतीजा झेलने के लिए तैयार करे."

वो कहते हैं, "चीन को ये समझने की ज़रूरत है कि उसके लिए क्या-क्या जोख़िम हैं. यूरोपीय देश उसे कह सकते हैं कि क्राइमिया के मसले पर उसे कोई पक्ष नहीं लेना चाहिए था."

वीडियो कैप्शन, यूक्रेन के सैनिक ने कुबूला कि पुराने टैंक रूस के ख़िलाफ़ जंग में मुश्किल पैदा कर रहे हैं.

चीन से क्या है उम्मीद?

शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन ने हाल में एकदूसरे के साथ दोस्ती को ये कहकर और गहरा कर दिया था कि ये "ये किसी सीमा से बंधा नहीं है."

बीजिंग में रहने वाले स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक वू चियांग कहते हैं कि "इसका मतलब ये हो सकता है जिस तरह मैक़ों का रूस जाकर पुतिन से मुलाक़ात का कोई नतीजा नहीं निकला, हो सकता है कि इसका भी कोई नतीजा न निकले."

वो कहते हैं, "हाल के महीनों में हमने देखा है कि चीन अपनी विदेशी कूटनीति का इस्तेमाल कर खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ला रहा है, ऐसे में हो सकता है इस मुलाक़ात से रूस के लिए उनका नज़रिया न बदले."

लेकिन कई ये भी मानते हैं कि हो सकता है कि शी जिनपिंग रूस-यूक्रेन जंग ख़त्म करने की कोशिश में जुड़ जाए. ये उसके लिए ये दिखाने का मौक़ा होगा कि अमेरिका जो करने में नाकाम रहा उसने वो कर दिखाया."

रुबेन वांग सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान में असोसिएट प्रोफ़ेसर हैं. वो कहते हैं कि, "चीन चाहेगा कि जब युद्ध ख़त्म हो वो शांति स्थापित करने वाले की भूमिका में हो. कूटनीति के क्षेत्र में इससे उसकी छवि को काफी मज़बूती मिलेगी."

वो कहते हैं कि युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तो पड़ ही रहा है चीन की अर्थव्यवस्था भी इसके असर से बची नहीं है, "ऐसे में रूस को संकेत देने की कोशिश में चीन को अपने हितों को सामने रखना चाहिए."

चीन के दौरे पर नेताओं से मुलाक़ात के वक़्त इमैनुएल मैक्रों और उर्सुला वॉन देर लियेन भी इसी दिशा में सोच रहे होंगे.

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