वीगर मुसलमानः चीन का आग्रह ठुकरा यूएन ने जारी की रिपोर्ट, कहा- यातना के दावों में दम

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- Author, मैट मर्फी, फ्लोरा ड्रुरी और टेसा वॉन्ग
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में चीन पर शिनजियांग प्रांत में 'मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन' के आरोप लगाए गए हैं. हालांकि चीन ने इस बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट को जारी न करने की अपील की थी. उसका कहना था कि ये पश्चिमी ताकतों का 'फर्जीवाड़ा' है.
रिपोर्ट में चीन के शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों और दूसरे समुदायों पर दमन के आरोपों की पड़ताल का जिक्र है.
चीन ने दमन की इन कार्रवाइयों से इनकार किया है. लेकिन इन आरोपों की पड़ताल करने वालों का कहना है कि उन्हें इन समुदायों के लोगों को प्रताड़ित किए जाने के पुख्ता सुबूत मिले हैं.
मानवाधिकार समूह पिछले कुछ समय से चीन के उत्तर पूर्वी प्रांत शिनजियांग में मानवाधिकारों को कुचले जाने की घटनाओं के बारे में चिंता जताते रहे हैं.
उनका कहना है कि यहां वीगर समुदाय के दस लाख लोगों को री-एजुकेशन कैंप में ट्रेनिंग देने के नाम पर हिरासत में रखा गया है.
हाल के वर्षों में बीबीसी ने खुद इन कैंपों पर रिपोर्टिंग कर तथ्यों का पता लगाया है. उसने हिरासत में रखे गए लोगों से जुड़ी फाइलें खंगाली हैं और लोगों के प्रताड़ित किए जाने के दावों के समर्थन में सुबूत जुटाए हैं.
कैंप में महिला कैदियों से रेप करने, उन्हें प्रताड़ित करने और नसबंदी के आरोपों की पड़ताल के लिए बीबीसी ने दस्तावेज जुटाए थे.
हालांकि चीन हमेशा ही बड़े जोरशोर से इसका खंडन करता रहा है. उसका कहना है कि शिनजियांग प्रांत में वह दमन की कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.
रिपोर्ट में क्या है?

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि वीगर और दूसरे प्रमुख मुस्लिम समुदाय के लोगों को जिस तरह से मनमाने तरीके और एकतरफा कार्रवाई के जरिये हिरासत में रखा गया है वह अंतरराष्ट्रीय अपराध हो सकता है. इसे मानवता के खिलाफ अपराध माना जा सकता है. ''
यूएन की रिपोर्ट में कई अहम पड़तालों का जिक्र किया गया है. इसमें कहा गया है-
- हिरासत में रखे गए लोगों को यातना देने, जबरदस्ती उनका मेडिकल इलाज करने और डिटेंशन सेंटर की खराब हालात से जुड़े आरोप सही हैं. महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के आरोप भी लगाए गए हैं.
- 2017 से परिवार नियोजन के लिए दमनकारी तरीके थोपे गए. लोगों के प्रजनन अधिकारियों के हनन के पुख्ता संकेत मिले हैं.
- गरीबी हटाने के लिए जो कथित श्रम और रोजगार स्कीमें लाई गई थीं उनमें धार्मिक और जातीय आधार पर जोर-जबरदस्ती और भेदभाव करने के भी संकेत हैं.
रिपोर्ट में मनमाने ढंग से गिरफ्तार सभी लोगों को रिहा करने के लिए तुरंत कदम उठाने की सिफारिश की गई है.

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चीन ने कहा दुष्प्रचार के आधार पर तैयार रिपोर्ट

चीन में इस रिपोर्ट को पहले ही खारिज कर दिया गया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने के वांग वेनबिन ने पत्रकारों से कहा,'' चीन को दिए गए ये सुझाव राजनीतिक मकसद से फैलाए गए दुष्प्रचार के आधार पर तैयार किए गए हैं. ''
वर्ल्ड वीगर कांग्रेस ने इस रिपोर्ट का स्वागत किया है और इस पर तुरंत अंतरराष्ट्रीय पहल की मांग की है
वीगर ह्यूमन राइट्स के प्रोजेक्ट डायरेक्टर उमर कनात ने कहा,'' वीगर लोगों पर किए गए अत्याचार की बात से चीन लगातार इनकार करता रहा है. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने अब आधिकारिक तौर पर मान लिया है कि उन पर भयानक अत्याचार हो रहे हैं.
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चीन में एक करोड़ 20 लाख वीगर रहते हैं. इनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं और शिनजियांग में रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि रिपोर्ट में जिन मुद्दों की चर्चा की गई है, उनसे दूसरे समुदायों के लोग भी प्रभावित हुए होंगे.
अमेरिका और उसके सांसदों के अलावा कई दूसरे देशों ने शिनजियांग में चीन की कार्रवाई को नरसंहार करार दिया है. हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने इस तरह के आरोप लगाने से इनकार किया है.
रिपोर्ट तैयार होने से पहले ही इसे देख चुके चीन का आरोप है कि इन आरोपों को ठुकराते हुए कहा है कि उसकी ओर से शिनजियांग में चलाए जा रहे कैंप आतंक से लड़ने के औजार हैं.
चीन का कहना है कि वीगर मुस्लिम अलग देश बनाने के लिए हिंसक तरीका अपना रहे हैं. लेकिन उस पर ये आरोप लगता रहा है कि वीगरों पर अत्याचार को सही ठहराने के लिए वो ये दलील दे रहा है.
संयुक्त राष्ट्र परिषद की इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा कि चीन ने कहा कि ये उसे बदनाम करने की साजिश है. इसे वह अपने आतंरिक मामले में दखल मानता है.

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इस तरह जुटाए गए सुबूत

शिनजियांग में वीगरों के साथ हो रहे अत्याचार के मामलों की पड़ताल के लिए अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के एक कंसोर्टियम ने जो अभियान चलाया था वो शिनजियांग पुलिस फाइल्स की बुनियाद पर रखा गया था.
इस गुप्त अभियान को इसके आधार पर चला गया था. बीबीसी इस कंसोर्टियम का एक हिस्सा था. हाल के दिनों में वीगरों पर की गई बीबीसी की कई रिपोर्टों का यही आधार रही हैं.बीबीसी के पूर्व चीन संवाददाता जॉन सुडवर्थ ने इन दस्तावेजों के बारे में बताया.
इस दौरान जो सबसे अहम दस्तावेज हाथ लगा उसमें अफसरों (चीन के) को कहा गया था कि अगर कैदी भागते हैं तो उन्हें हथियार का इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहना चाहिए. जब अलार्म बजे तो कैदियों को रखे जाने की जगह के चारों ओर का रास्ता सील कर दिया जाए. वहां मौजूद बिल्डिंग्स बंद कर दिए जाएं तो कैंप में तैनात हथियारबंद पुलिस के हमलावर दस्तावेज को बुला लिया जाए.
दस्तावेज के मुताबिक जब अलार्म बजे तो चेतावनी देने के लिए गोली चलाया जाए. लेकिन फिर भी ''स्टूडेंट्स'' भागने की कोशिश करें तो आदेश साफ है- उन्हें गोली मार दो. चीन का कहना है कि इन कैंपों में लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है. इसलिए स्टूडेंट शब्द का इस्तेमाल किया गया है.
चीन इस बात को जोर देकर कहता है कि ये कैंप उसके प्रति आभारी वीगर और दूसरे तुर्की अल्पसंख्यकों को ऐसी चीजों की शिक्षा देते है,जिनसे वह चरमपंथ और अतिवाद के खतरों से बच सकते हैं.
चीन के बारे में इस रिपोर्ट पर पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नजर थी. खुद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कमिश्नर मिशेल बेशलेट ने पिछले सप्ताह स्वीकार किया था इस रिपोर्ट को छापा जाए या नहीं इसे लेकर उन पर भारी दबाव था.
पश्चिमी देशों के कुछ मानवाधिकार समूहों का कहना था कि चीन अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली इस रिपोर्ट को न छापने का दबाव बना रहा था. शायद इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने में देरी की एक वजह ये हो सकती है. ये बेशलेट के चार साल के कार्यकाल खत्म होने के 13 मिनट पहले सार्वजनिक की गई.

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रिपोर्ट को लेकर विवाद

रिपोर्ट का बड़े पैमाने पर स्वागत हुआ है लेकिन कुछ ने निराशा भी जताई है. वर्ल्ड वीगर कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता जुमरते अरकिन ने कहा है कि उन्हें बेशलेट के चीन पर ज्यादा सख्त होने उम्मीद थी.
इस बीच बेशलेट ने कहा कि कुछ देश इस मामले का राजनीतिकरण करने में लगे हैं. उन्होंने कहा इसने इस काम को ज्यादा मुश्किल बना दिया.
बहरहाल अब नजरें इस बात पर लगी होंगी कि इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद क्या होगा. वीगरों का कहना है कि उन पर अत्याचार की जांच के लिए एक आयोग बनाया जाए.
इसके साथ ही दुनिया भर की कंपनियों को उन लोगों से नाता तोड़ने को कहा गया है कि जो शिनजियांग में चीन के अत्याचार को बढ़ावा दे रहे हैं.
जर्मनी ने कहा है कि शिनजियांग में मनमाने ढंग से गिरफ्तार किए गए वीगरों को रिहा किया जाए.
हालांकि चीन के अंदर इस पर कोई हलचल संभव नहीं लगती है और न कोई दबाव की संभावना है. क्योंकि वहां वीगरों के मानवाधिकार हनन के मामलों को निषिद्ध विषय माना जाता है.
इस पर काफी ज़बरदस्त सेंसर रहता है. मंगलवार को दोपहर तक चीन की अहम मीडिया या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर इसकी कोई चर्चा नहीं थी.
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