ईरान-सऊदी के बीच समझौते करवाने के बाद शी जिनपिंग ने क्राउन प्रिंस को क्यों किया फ़ोन

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इमेज कैप्शन, सउदी अरब के दौरे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि मध्यपूर्व में एक दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे ईरान और सऊदी अरब आपसी संबंधों को और मजबूत करेंगे.

चीन के सरकारी मीडिया में आई ख़बर के अनुसार, मंगलवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से फ़ोन पर बात की.

राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देश अच्छे पड़ोसी की तरह बर्ताव करेंगे और बीजिंग में हुई बातचीत के आधार पर अपने संबंधों को सुधारना जारी रखेंगे.

शी जिनपिंग ने कहा कि सऊदी अरब और ईरान के बीच वार्ता की फॉलोअप प्रक्रिया को जारी रखने में मदद देने के लिए चीन तैयार है.

सात साल पहले दोनों देश ने भारी विवाद के बाद अपने राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए थे.

मार्च दूसरे पहले सप्ताह में चीन में सऊदी अरब और ईरान के अधिकारियों के बीच चली चार दिन की बातचीत के बाद 11 मार्च को दोनों ने कूटनीतिक रिश्ते बहाल करने की अप्रत्याशित घोषणा हुई.

चीनी विदेश मंत्रालय की एक अधिकारी जो रोंग ने ट्विटर पर ताज़ा फ़ोन कॉल के बारे में जानकारी भी दी है.

जो रोंग ने लिखा है, "चीन, सऊदी अरब और ईरान के बीच हुए समझौते का समर्थन करता रहेगा ताकि क्षेत्र में शांति, विकास और स्थिरता बनी रहे. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ये टिप्पणी सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के साथ फ़ोन कॉल के दौरान की."

ट्विटर

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चीन की कूटनीतिक जीत

सऊदी अरब और ईरान के बीच समझौते को बीजिंग की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है क्योंकि मध्यपूर्व में अमेरिका के रणनीतिक प्रभाव को कम करने में चीन खुद एक बड़ी ताक़त के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है.

यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस की एक रिपोर्ट में कहा गया है, "ईरान और सऊदी समझौते को इस इलाक़े में सबसे बड़ा डेवलपमेंट माना जा रहा है. लेकिन मध्यपूर्व में इसका अंततः कितना असर पड़ेगा, ये अभी खुला सवाल है, क्योंकि दोनों देश यमन में प्रॉक्सी युद्ध लड़ रहे हैं और पूरे इलाक़े में विरोधी ताक़तों का समर्थन करते हैं."

रिपोर्ट के अनुसार, "मध्यपूर्व से अमेरिका के पीछे हटने की संभावना को देखते हुए, चीन के लिए ये समझौता एक कूटनीतिक जीत है क्योंकि वो अमेरिकी अगुवाई वाले वैश्विक संतुलन के मुकाबले एक वैकल्पिक विचार आगे बढ़ाना चाहता है."

ईरान-सऊदी समझौते के बाद, जब शी जिनपिंग ने 20 मार्च को रूस की अपनी यात्रा में रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की जोरदार वकालत की.

शी ने सऊदी क्राउन प्रिंस से फ़ोन पर कहा कि चीन की मदद से सऊदी अरब और ईरान ने सफ़लतापूर्वक बातचीत की और अहम नतीजे पर पहुंचे.

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ाने और क्षेत्रीय तनाव करने में ये अहम साबित होगा, इसीलिए अंतरराष्ट्रीय जगत में व्यापक रूप से इस कोशिश को सराहना मिली.

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इमेज कैप्शन, सऊदी अरब कच्चे तेल के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक

चीन और सऊदी में बढ़ती साझेदारी

इस समझौते के बाद अब ऐसा लगता है कि चीन और सऊदी अरब दोनों 'और अर्थपूर्ण' संबंध बनाने की ओर जा रहे हैं और 10 अरब डॉलर की लागत से उत्तरी पूर्वी लियोनिंग प्रांत में एक शानदार रिफ़ाइंग काम्प्लेक्स बनाने का समझौता हुआ है.

बीते रविवार को घोषित इस समझौते के तहत रियाद रूसी आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच इंडीग्रेटेड रिफ़ाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स बनाने में निवेश करेगा.

ये खबर हांगकांग स्थित चाइना मार्निंग पोस्ट ने मंगलवार को दी है.

विश्लेषकों का मानना है कि चीन अभी भी रू से भारी रियायती दरों पर कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर आयात कर रहा है.

शांघाई के एक पेट्रोकेमिकल एनालिस्ट ने अख़बार से कहा कि चीन को ये डर है कि यूक्रेन में युद्ध के चलते अमेरिका और पश्चिमी देशों के रूस पर कड़े प्रतिबंधों से वैश्विक आपूर्ति चेन पर बहुत अधिक अस पड़ सकता है और इसकी वजह से क़ीमतों पर काफ़ी उतार चढ़ाव आ सकता है.

उनके मुताबिक, "हमें लगता है कि मध्य पूर्व की कंपनियां चीन की कंपनियों के साथ अधिक से अधिक ज्वाइंट वेंचर में हिस्सा लेंगी ताकि वे अपने तेल के लिए एक सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित कर सकें."

कॉपी - संदीप राय

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