सऊदी अरब के साथ समझौते पर क्या लिख रहा है ईरान का मीडिया?

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- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण

- रूढ़िवादी अख़बार केहेन ने ईरान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते की तारीफ की है.
- लेकिन लोगों ने अख़बार के तारीफ भरे शब्दों सवाल भी उठाए हैं.
- लोग इस समाचार पत्र द्वारा पहले सऊदी अरब के ख़िलाफ कथित दुष्प्रचार की भी चर्चा कर रहे हैं.
- अख़बार का दावा, हालिया समझौता पहले की तुलना में बेहतर शर्तों पर हुआ है.
- इसमें अमेरिका और इसराइल को नजरअंदाज करने के प्रतीकात्मक रुख की भी ओर भी ध्यान दिलाया गया है.
- कुछ पत्रकारों ने कहा है कि अब सऊदी अरब को 'पेशेवर हत्यारा'' कहना छोड़, मक्का और मदीना का संरक्षक कहना होगा.

ईरानी अख़बार केहेन ने हाल मे ईरान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है. दोनों देश सात साल बाद एक बार फिर अपने राजयनिक रिश्ते बहाल करने को तैयार हो गए हैं.
अख़बार ने इसे पश्चिम एशिया में कूटनीति के नए दौर' का संकेत करार दिया है.
ईरान और सऊदी अरब के बीच राजनयिक रिश्ते कायम करने का समझौता 10 मार्च को हुआ था. इसी दिन अख़बार में छपे एक लेख में इस समझौते को लेकर इराक, तुर्की, कतर, यूएई औैर ओमान की सकारात्मक प्रतिक्रियाओं की ओर ध्यान दिलाया गया है.
इस लेख में कहा गया है कि चीन की ओर से कराया गया ये समझौता अमेरिका और इसराइल के लिए 'झटका' है. लेकिन कुछ सुधारवादी हलकों ने तुरंत इस धुर कट्टरपंथी अख़बार के बदलते रुख की ओर ध्यान दिलाया.
उनका इशारा 2016 में ईरान और सऊदी अरब के रिश्ते बिगड़ने पर अखब़ार के रुख की ओर था. उस वक्त अख़बार का रुख इससे बिल्कुल उलट था.
क्यों टूटे थे ईरान और सऊदी अरब के रिश्ते?
2016 में सऊदी अरब में एक शिया धर्मगुरु को फांसी दिए जाने के बाद ईरानी प्रदर्शनकारी सऊदी अरब के दूतावास में घुस आए थे.
इसके बाद दोनों देशों के राजनयिक रिश्ते टूट गए थे.
केहेन ने तब इसका स्वागत किया था. दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते टूटने को उसने 'सकारात्मक' बदलाव कहा था.
उसका कहना था कि इससे ईरान इस क्षेत्र में ''अमेरिका के नौकर'' से रिश्ते रखने की ''शर्मिंदिगी'' से बच गया.
लेकिन रुदेद24 और तबनाक जैसे उदार मीडिया संगठनों ने केहन के दोनों लेखों (पुराने और अब के) को बगैर किसी टिप्पणी के एक दूसरे के अगल-बगल छाप दिया है. केहन के रुख में इस यू टर्न पर अब सोशल मीडिया यूजर्स टिप्पणी कर रहे हैं.
इस बीच, सुधारवादी पत्रकार अब्बास आब्दी ने 11 मार्च को ट्वीट कर कहा कि राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौजूदा कट्टरपंथी सरकार कुछ नया हासिल करने के बजाय सिर्फ उस पुराने द्विपक्षीय समझौते की ओर लौट आई है, जो 1990 के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत में सुधारवादी राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी के दौर में हुई थी.
उन्होंने लिखा, ''अब कट्टरपंथी चीनी सरपरस्ती में हुए समझौते पर सीख देने में लगे हैं. उन्होंने लोगों को 25 साल तक अपनी सत्ता की भूख का बंधक बना कर रखा है. ''
लेकिन 11 मार्च को केहन के प्रमुख संपादक हुसैन शरीयतमदारी ने अख़बार के आलोचकों पर पलटवार करते संपादकीय लिखा . शीर्षक था - आपको किस बात की शिकायत है.?
उन्होंने कहा,''सुधारवादियों ने ये मान लिया है कि ईरान और सऊदी अरब के बीच इस तरह के संबंधों को अमेरिका को स्वीकार कर लेना चाहिए.

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उन्होंने इस समझौते को लेकर अपने अख़बार के रुख का समर्थन किया है. अख़बार के मुताबिक अमेरिका को इस प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है.सऊदी अरब ने इसराइल के उस विचार को छोड़ दिया है, जिसमें ईरान के ख़िलाफ़ साझा मोर्चा बनाने खड़ा करने की बात थी. इसमें बताया गया है कि सऊदी अरब ने इस शर्त के लिए 'ईरान की शर्तों को स्वीकार' कर लिया था.
केहेन के प्रमुख संपादक की नियुक्ति ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई करते हैं. आम तौर पर ये माना जाता है कि ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर फैसला लेने वाले समूहों में ये एक काफी प्रभावी है.
हुसैन शरीयतमदारी ने माना कि हाल में हुए इस समझौते का टेक्स्ट प्रकाशित नहीं किया गया है.
लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा,'' मौजूदा संकेत बताते हैं इस्लामी ईरान अपने सिद्धांतों के प्रति ईमानदार रहा है.'' इसके लिए उन्होंने ख़ास तौर पर हिजबुल्लाह के हसन नसरुल्ला और हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल सलाम का समर्थन जताती प्रतिक्रियाओं का हवाला दिया. इसका मतलब ये है कि सऊदी अरब के ख़िलाफ़ रहा ईरान ऐसे संगठनों को समर्थन जारी रखेगा.

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सुधार समर्थक टिप्पणीकार अहम ज़िदाबादी ने 12 मार्च को ट्वीट कर कहा कि इस तरह की दलीलों के बावजूद केहेन को सऊदी अरब पर अपने रुख बदलने का सामना करना होगा.
उन्होंने लिखा, ''केहेन को अब से सऊदी अरब को 'नाशुक्रा और अमेरीकियों का मुफ्त नौकर' ' यहूदियों का सिखाया हुआ कुत्ता' ' 'दाएश का बाप' और 'पेशेवर हत्यारा'' कहना छोड़ कर मक्का और मदीना का संरक्षक कहना होगा. ''
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