भूटान के पीएम ने चीन के गांवों को लेकर दिए बयान पर अब कही नई बात

इमेज स्रोत, Getty Images
भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक 3 से 5 अप्रैल तक भारत की आधिकारिक दौरे पर होंगे. उनके साथ विदेश और विदेश व्यापार मंत्री डॉ. टांडी दोरजी और भूटान की शाही सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी आएंगे. अपनी यात्रा के दौरान वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, इस बात की जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई है.
भूटान के प्रधानमंत्री लोटे छृंग ने अपने हालिया इंटरव्यू पर स्पष्टीकरण दिया है कि डोकलाम को लेकर भूटान के रुख़ में कोई परिवर्तन नहीं आया है.

इमेज स्रोत, ANI
पीएम ने वहाँ के अख़बार 'द भूटनीज़' को इंटरव्यू दिया है. इससे पहले उन्होंने बेल्जियम के अख़बार 'ला लेब्रे' को दिए इंटरव्यू में जो कुछ कहा था, उसको लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं कि भारत की उससे टेंशन बढ़ सकती है.
2020 में ऐसी कई रिपोर्ट्स आई थीं, जिनमें बताया गया था कि भूटान के बॉर्डर के भीतर चीन गाँव बना रहा है. लेकिन 'ला लेब्रे' को दिए इंटरव्यू में लोटे छृंग ने कहा है कि 'चीन ने जो गाँव बनाए हैं, वे भूटान के भीतर नहीं हैं.'
भूटान के प्रधानमंत्री ने हाल ही में बेल्जियम का दौरा किया था और उन्होंने वहीं यह इंटरव्यू दिया था.
फ्रेंच भाषा के अख़बार 'ला लेब्रे' को दिए इंटरव्यू में भूटानी प्रधानमंत्री ने कहा था, "हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि कोई अतिक्रमण नहीं हुआ है."
"यह एक अंतरराष्ट्रीय सीमा है और मुझे पता है कि हमारा हिस्सा कहाँ तक है. भूटान में चीनी निर्माण को लेकर मीडिया में कई तरह की बातें कही जा रही हैं. हमें इससे कोई मतलब नहीं है क्योंकि यह भूटान में नहीं है.''

इमेज स्रोत, TWITTER
इंटरव्यू पर विवाद
'ला लेब्रे' में भूटानी पीएम के इंटरव्यू को लेकर रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने ट्वीट कर चिंता ज़ाहिर की थी.
इसका जवाब देते हुए पूर्व भारतीय विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने ट्वीट किया कि भूटानी पीएम की बहुत अस्पष्ट भाषा ने बेवजह का कन्फ़्यूज़न पैदा कर दिया है. भारत और भूटान के बीच बहुत अच्छा तालमेल है. ऐसे संवेदनशील मसले पर चीन को क्लीन चिट देने से बचाना चाहिए.
इस बीच शनिवार को द भूटानीज़ अख़बार के एडिटर तेनजिंग लैमसैंग ने ट्वीट किया कि भूटानी पीएम ने कोई नई बात नहीं कही और भारतीय मीडिया ने उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया.
तेंजिंग के ट्वीट को पोस्ट करते हुए एनडीटीवी के पत्रकार विश्नू सोम ने लिखा कि 'छह साल पहले भूटान के बयान में डोकलाम को भूटानी क्षेत्र में बताया गया था. अब नई लाईन ये है कि डोकलाम के स्टेटस को निर्धारित करने में चीन हमेशा से ही एक पक्ष रहा है.'
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
सोम के अनुसार, "डोकलाम के संदर्भ में चीन इस त्रिपक्षीय सीमा को दक्षिण के पक्ष में ले जाना चाहता है. भारत को ये कभी भी स्वीकार्य नहीं होगा. भूटान अभी तक इस इलाके के लिए भारतीय पक्ष का हामी रहा है. कोई भी बयान जो चीन को बराबर का साझीदार मानता है ये भारतीय सुरक्षा नीति निर्धारकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है."
उन्होंने लिखा है, "चीन डोकलाम में और पड़ोस के अमू चू नदी घाटी में निर्माण कर रहा है. इसका भारतीय सुरक्षा के लिए सीधा असर पड़ेगा. "
ये भी पढ़ेंः-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















