पुतिन के 'परमाणु हथियार' के इस्तेमाल के बयान के बाद ज़ेलेंस्की, बाइडन ने दिया जवाब

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात को दोहराया है. उनके ताज़ा बयान पर कई तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि रूस यूक्रेन के साथ युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा.
उनका यह बयान रूस के उस बयान के बाद आया है जिसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी सीमा की रक्षा के लिए सभी संभव उपाय के इस्तेमाल की बात कही है.
ज़ेलेंस्की ने जर्मनी के बिल्ड न्यूज़पेपर के टीवी स्टेशन से कहा, "मुझे नहीं लगता कि वो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल करेंगे. मुझे नहीं लगता कि दुनिया उन्हें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत देगी."
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पुतिन की धमकियों के सामने झुकने के प्रति आगाह किया.
उन्होंने कहा, "कल पुतिन कह सकते हैं कि यूक्रेन के साथ वो पोलैंड को अपना हिस्सा बनाना चाहते हैं, ऐसा न होने पर वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेंगे. तो क्या हम इसे मान जाएंगे."
पुतिन के आंशिक रूप से रिज़र्व सैनिकों की लामबंदी पर ज़ेलेंस्की ने कहा उनका ये आदेश सेना के मनोबल में गिरावट के कारण है.
वे कहते हैं, "लाखों की संख्या में उन्हें सैनिकों की ज़रूरत है... वे देख रहे हैं कि जिन सैनिकों को हमारे पास (यूक्रन में युद्ध के लिए) भेजा था उनका एक बड़ा हिस्सा भाग गया है."
ज़ेलेंस्की ने कहा, "पुतिन यूक्रेन को ख़ून में डूबा देखना चाहते हैं, उसमें उनके ख़ुद के सैनिकों का ख़ून भी होगा."

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अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन क्या बोले?
पुतिन के इस बयान पर जहां दुनिया भर के नेताओं ने टिप्पणी की है वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने संबोधन के दौरान इस पर कहा कि रूस यूक्रेन के एक देश के रूप में बने रहने के उसके अधिकारों को ख़त्म करने का लक्ष्य बना रहा है.
इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका रूसी हमले के विरोध में यूक्रेन के साथ खड़ा है. साथ ही बाइडन ने सुरक्षा परिषद में वीटो के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात भी कही और साथ ही ये भी कहा कि अमेरिका सुरक्षा परिषद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का समर्थन करता है.
क्या रूस वाकई परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है?
बीबीसी न्यूज़ के सुरक्षा संवाददाता गॉर्डन कोरेरा के मुताबिक़, यूक्रेन की सरकार को उखाड़ फेंकने में शुरुआती विफलता के बाद व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार परमाणु हथियार के इस्तेमाल की बात कही थी अब एक बार फिर रूस बैकफुट पर हैं तो उन्होंने परमाणु हथियारों की बात फिर उठाई है.
उन्हें उम्मीद है कि विनाशकारी क्षमता वाले हथियार की धमकी उनके विरोधियों को डराएगा.
रूस की जनता पुतिन के इस दावे से भी भयभीत होगी कि नेटो रूस को धमकी दे रहा है. तो उनका यह कहना वहां की जनता को आश्वस्त करने का एक तरीक़ा भी हो सकता है कि देश ख़ुद की रक्षा करने में सक्षम है.
रूस के सैन्य सिद्धांत के मुताबिक परमाणु हथियार तभी इस्तेमाल किए जाएंगे जब रूस बतौर एक देश ख़तरे में होगा और पुतिन ने अपनी चेतावनी में कहा कि वो पश्चिम की धमकियों का जवाब दे रहे हैं. उन्होंने जब ये कहा कि वे धौंस नहीं दे रहे हैं, तो वे उस स्थिति की बात कर रहे थे जब रूस की सीमा को ख़तरा पैदा होगा. एक अहम सवाल ये है कि आगामी जनमत संग्रह के बाद वे यूक्रेन के कितने भूभाग तक अपनी सीमा का विस्तार देखते हैं.
इन बातों से ये पता चलता है कि परमाणु हथियारों का उपयोग फिलहाल संभव नहीं है. हालांकि इसकी संभावना को पूरी तरह ख़ारिज नहीं किया जा सकता, ख़ास कर तब जब पुतिन को लगता है कि उनके देश की सुरक्षा ख़तरे में है. निश्चित तौर पर पश्चिम की ख़ुफ़िया एजेंसियां पुतिन की बातों से अधिक रूस के वास्तविक व्यवहार पर नज़र रखेंगी.

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पुतिन ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात क्यों कही?
इससे पहले बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि पश्चिम रूस को ब्लैकमेल कर रहा है, लेकिन रूस के पास जवाब देने के लिए कई हथियार हैं. पुतिन ने कहा कि वह अपने नागरिकों की रक्षा के लिए सभी संसाधनों का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने कहा कि रूस की जनता के समर्थन में उनका पूरा भरोसा है.
पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में रूसी नियंत्रण में रह रहे लोगों को वह न्यू-नाज़ी व्यवस्था के दमन का शिकार नहीं होने देंगे. रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम परमाणु युद्ध की आड़ में ब्लैकमेल कर रहा है.
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके पास जवाब देने के लिए बहुत हथियार हैं और यह कोई धौंस नहीं है. उन्होंने कहा कि वह डोनबास के लोगों की रक्षा कर रहे हैं.
पुतिन ने देश के नाम अपने इस संबोधन में यूक्रेन में 'विशेष सैन्य अभियान' के लिए आंशिक रूप से रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि 'आज़ाद भूभाग' के लोगों की रक्षा के लिए तत्काल फ़ैसला लेना ज़रूरी हो गया है.
पुतिन ने कहा कि उन्होंने रूस के रक्षा मंत्रालय से सेना को लामबंद करने का आदेश दिया है.
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इस मामले में जारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिया गया है और यह बुधवार से लागू हो गया है.
आर्म्स फ़ोर्सेज का दर्जा हासिल किए सभी नागरिकों को एकजुट किया जाएगा. पुतिन ने 'आज़ाद भूभाग' यूक्रेन के कुछ इलाक़ों को कहा है.
इस बीच रूस के रक्षा मंत्री सेर्गेई शोइगु ने कहा है कि सैन्य अनुभव वाले तीन लाख लोगों को बुलाया गया है.

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रूस ने बताया- अब तक कितने सैनिक मारे गए हैं?
पूर्वी यूरोप में बीबीसी संवाददाता सारा रेन्सफोर्ड के मुताबिक़, पुतिन के भाषण के बाद उनके रक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि तीन लाख रिज़र्व सैनिक बुलाए जाएंगे. हालांकि उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि सभी को एक साथ नहीं बल्कि ज़रूरत के मुताबिक़ बुलाया जाएगा.
उन्होंने ये भी कहा, "स्टूडेंट्स का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. वे शांत रहें और अपनी पढ़ाई जारी रखें. न ही अनिवार्य सैन्य सेवा करने वालों को सीमा पर भेजा जाएगा."
रूस ने ये स्पष्ट किया कि उन लोगों का ही इस्तेमाल किया जाएगा जिन्हें युद्ध का अनुभव है.
अपने बयान में सर्गेई शुइगु ने दावा किया कि अब तक यूक्रेन के साथ युद्ध में क़रीब छह हज़ार (5,937) सैनिकों की मौत हुई है. ये संख्या पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों के अनुमान से कहीं कम है, यहां तक कि ये स्वतंत्र स्रोत की रिपोर्ट से भी कहीं कम है.
लेकिन ये बीते महीनों में पहली बार है जब रूस ने युद्ध में मारे गए सैनिकों की संख्या बताई है.
रक्षा मंत्री के सौम्य स्वर और शांत लहजे के बावजूद रूस के ताज़ा रुख को इस युद्ध को लेकर बड़ा बदलाव माना जा रहा है. जिस युद्ध की रूस के कई लोग अनदेखी करने की कोशिश कर रहे थे उसकी आंच अब हज़ारों की तादाद में लोगों के घरों तक पहुंच रही है.
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पुतिन ने देश के नाम संदेश में क्या कहा?

राष्ट्रपति पुतिन ने घोषणा की कि यूक्रेन में 'विशेष सैन्य अभियान' के लिए आंशिक रूप से रिज़र्व सैनिकों को लामबंद किया जाएगा.
रूस के क़ब्ज़े वाले इलाकों के लोगों की सुरक्षा और इलाकाई अखंडता लिए यह क़दम आवश्यक.
पुतिन का पश्चिम पर परमाणु हथियारों को लेकर ब्लैकमेल करने का आरोप.
पुतिन ने कहा, "रूस के पास 'बहुत से जवाबी हथियार' हैं और ये कोई धौंस नहीं है."
सैन्य अनुभव वाले 3,00,000 लोगों को बुलावा- रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु.
एक अनुमान के मुताबिक़, रूस में 20 लाख सैन्य रिज़र्व है. ये वो लोग हैं जिन्होंने अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत मिलिट्री ट्रेनिंग ले रखी है. रूस में सैन्य प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है.

पुतिन का प्रण और पश्चिम पर आरोप
बीबीसी रूस के संपादक स्टीव रोज़नबर्ग का कहना है कि अब तक रूस ये कहता रहा है कि यूक्रेन में स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन योजनाबद्ध तरीक़े से चल रहा है.
रूस के राष्ट्रपति के मन में यूक्रेन पर हमले का कोई अफ़सोस नहीं है. पुतिन का कहना है कि पश्चिम रूस को तोड़ना चाहता है.
रूस ने यूक्रेन के इलाक़ों पर कथित जनमत संग्रह के ज़रिए क़ब्ज़ा किया है और उसे लगता है कि पश्चिम उन इलाकों को वापस लेने की कोशिश कर रहा है.
पुतिन ने कहा कि जो परमाणु हथियार को लेकर ब्लैकमेल कर रहे हैं, उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि हवा का रुख़ मुड़ सकता है.
हालांकि, रिज़र्व सेना को आंशिक रूप से लामबंद करने की घोषणा करके पुतिन ने परोक्ष रूप से यह भी स्वीकार कर लिया कि रूस को युद्ध के मैदान के लिए और अधिक सैनिक चाहिए.
सैनिकों की लामबंदी का तुरंत कितना असर?
बीबीसी के राजनयिक संवाददाता पॉल एडम्स के मुताबिक़, भले ही उन लोगों को बुलाया जा रहा है जिन्हें पहले से सैन्य अनुभव है, लेकिन उन्हें संगठित करने और नई युद्ध शक्ति से लैस करने में महीनों लगते हैं.
अगर रूस ने उन्हें योजना बना कर सैन्य टुकड़ियों में नहीं डाला, तो वो अगले वसंत तक युद्ध में शामिल नहीं हो सकेंगे.
यूक्रेन में अहम नुकसान को देखते हुए रूस के लिए इन नए सैनिकों को ज़रूरी हथियार मुहैया कराने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
पश्चिम से मिले अत्याधुनिक हथियारों और रूस से क़ब्ज़े में लिए मशीनों से यूक्रेनी सैनिकों ने कहर बरपा दिया है और गोला-बारूदों के ढेरों, कमांड पोस्ट, फ्रंट लाइन के लिए बनाए गए बेस को उड़ा दिया है.
रूस के लिए युद्ध में पहले से मौजूद सैनिकों को ही संगठित करना मुश्किल हो गया है, किसी नए की तो बात ही छोड़ दें.
ये भी माना जा रहा है कि यूक्रेन में तैनात सैनिकों के मनोबल पहले से ही कमज़ोर हैं. साथ ही अब कुछ लोगों की वहां तैनाती की अवधि बढ़ाई भी जा रही है क्योंकि आने वाले ठंड में भी युद्ध के चलते रहने की संभावना जताई जा रही है.

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पुतिन के फ़ैसले पर तीखी प्रतिक्रिया
यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने ट्वीट किया, "पुतिन ने चीन, भारत, मैक्सिको, तुर्की और अन्य एशियाई, अफ़्रीकी, मध्य पूर्व, लातिन अमेरिकी देशों का घोर अनादर किया है जिन्होंने रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध ख़त्म करने की कूटनीतिक सलाह दी थी. वे और अधिक लोगों को इस युद्ध की आग में झोंकना चाहते हैं, उनके जीतने की कोई संभावना नहीं है."
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ब्रितानी रक्षा मंत्री बेन वॉलेस ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के लिए रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करना ये बताता है कि रूस के हमले नाकाम हो रहे हैं.
उन्होंने कहा, "वो और उनके रक्षा मंत्री ने कमज़ोर नेतृत्व के साथ अपने हज़ारों नागरिकों को उनकी मौत के लिए वहां भेजा है जिनके पास लड़ाई के उचित संसाधन भी मौजूद नहीं हैं."
यूक्रेन में अमेरिकी राजदूत ने पुतिन के आंशिक रूप से रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करने के आदेश को कमज़ोरी का संकेत बताया.
ब्रिगेट ब्रिंक ने ट्विटर पर लिखा, "जनमत संग्रह और लामबंद करना रूस की नाकामी और कमज़ोरी का संकेत है."
"यूक्रेन की सीमा पर रूसी क़ब्ज़े को अमेरिका कभी मान्यता नहीं देगा और यूक्रेन के साथ हमेशा खड़ा रहेगा, चाहे जितना भी वक़्त क्यों न लगे."
यूक्रेन में युद्ध के लिए रिज़र्व सैनिकों को भेजने की रूस की तैयारी पर यूरोप के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.
चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री पेट्र फियाला ने कहा कि आंशिक रूप से रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करने की रूस की कोशिश "यूक्रेन में युद्ध को और बढ़ाने का प्रयास है" और "ये सबूत है कि रूस ही अकेला आक्रमणकारी है."
प्रधानमंत्री फियाला ने कहा कि यूक्रेन को सहायता देना ज़रूरी है और ऐसा करना चेक रिपब्लिक के हित में है.
चेक रिपब्लिक वो पहला देश है जिसने यूक्रेन के भारी हथियार मुहैया कराए थे. उसने अब तक यूक्रेन को टैंक, हेलीकॉप्टर और तोपख़ाने भेजे हैं.
जर्मनी के वाइस चांसलर रॉबर्ट हाबेक ने रिज़र्व सैनिकों की लामबंदी को "रूस का एक और ग़लत क़दम" करार दिया.
नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रूट ने जनमत संग्रह और रिज़र्व सैनिकों की लामबंदी को रूस की "घबराहट का संकेत" बताया.

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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बड़े आलोचक एलेक्सी नवेलनी ने कहा कि आंशिक रूप से सैन्य लामबंदी "बहुत बड़ी त्रासदी" का कारण बनेगी.
जेल से अपने वकील के ज़रिए भेजे एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, 'ये विशाल त्रासदी का कारण बनेगी जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जाएंगे... अपनी निजी ताक़त को बरकरार रखने के लिए पुतिन पड़ोसी देश में गए, वहां लोगों को मारा और अब बहुत बड़ी संख्या में रूस के नागरिकों को इस युद्ध में भेज रहे हैं.'
नवेलनी रूस में मौजूद पुतिन के सबसे मुखर आलोचक हैं, इस वक़्त वे परोल के उल्लंघन, धोखाधड़ी और अदालत की अवमानना के आरोपों में साढ़े ग्यारह साल की जेल की सज़ा काट रहे हैं. उनका कहना है कि ये आरोप उन पर इसलिए मढ़ा गया है ताकि पुतिन के विरोध और उनकी (नवेलनी की) राजनीतिक महत्वकांक्षा को रोका जा सके.
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