विश्लेषणः चीन से बढ़े तनाव के बीच भारत के करीब आने की ताइवान की कोशिश

ताइवान

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    • Author, पद्मजा वेंकटरमन
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के दौरे के बाद ताइवान के चीन से संबंध बहुत ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं. ऐसे में ताइवान ने सतर्कता के साथ भारत सहित कई देशों में अपनी राजनयिक गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं.

ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने भारत के कई मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दिए. वहीं दोनों देशों के बीच हाइटेक सहयोग करने की संभावनाएं तलााशने के लिए ताइवान के सेमीकंडक्टर निर्माताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया है.

इस तरह ताइवान ने भारत के साथ संबंधों को गहरा बनाने के लिए कई अहम रणनीतिक क़दम उठाए हैं.

भारत हालांकि आधिकारिक तौर पर 'एक चीन' की नीति का पालन करता है. लेकिन ताइवान और चीन के बीच हाल में घटी घटनाओं के बीच चीन की बढ़ी सक्रियता को भारत ने इलाक़े का 'सैन्यीकरण' करना बताया है.

विश्लेषकों का मानना है कि भारत अपने आधिकारिक अप्रोच से बहुत दूर नहीं जाएगा. लेकिन चीन के साथ सीमा पर तनाव अभी भी बरक़रार है, ऐसे में भारत, ताइवान के साथ ख़ासकर तकनीकी और आर्थिक मोर्चों पर सहयोग बढ़ाने पर विचार कर सकता है.

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भारतीय मीडिया के साथ संवाद में तेज़ी

नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा और फिर उसके आसपास के इलाक़े में कई सैन्य अभ्यास करने के चीन के एलान के बाद, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने लोकतांत्रिक देशों को 'एकजुट' करने की आवश्यकता बताने के लिए भारतीय मीडिया के साथ संवाद में अचानक वृद्धि कर दी.

25 अगस्त को भारत में ताइवान के प्रतिनिधि कार्यालय 'ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र' ने बताया कि विदेश मंत्री जोसेफ वू ने भारत के कम से कम आठ मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दिए .

इस दौरान वू ने बताया कि चीन की सेना ने भारत और ताइवान को 'धमकी दी है'.

ताइवान की आज़ादी का समर्थन करने वाले सानलिह न्यूज़ नेटवर्क के अनुसार, वू ने भारत और दूसरे लोकतांत्रिक देशों से ताइवान के साथ मिलकर 'तानाशाही के विस्तार के खि़लाफ़ संयुक्त लड़ाई लड़ने' की अपील की.

पेलोसी की यात्रा के बाद चीन और ताइवान के तनाव को कवर करने के लिए भारत के कई टीवी चैनलों ने अपने पत्रकारों को ताइवान भेजा है.

भारतीय मीडिया के ताइवानी अधिकारियों के इंटरव्यू और रिपोर्टों पर चीन से कड़ी प्रतिक्रिया मिली है. चीन ने भारत के मीडिया पर 'ताइवान की आज़ादी की समर्थक शक्तियों' को मंच प्रदान करने का आरोप लगाया है.

सेमीकंडक्टर

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सेमीकंडक्टर कंपनियों का भारत दौरा

ताइवान के सेमीकंडक्टर निर्माताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने 21 अगस्त से शुरू हुई पांच दिनों की यात्रा के दौरान भारत के प्रमुख शहरों की सेमीकंडक्टर निर्माता संयंत्रों का दौरा किया. इस दौरान आगे सहयोग बढ़ाने के लिए कंपनियों और राज्य सरकारों के साथ बातचीत की गई.

ताइवान की सरकारी 'सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी' के अनुसार, ताइवान ने भारत की अर्थव्यवस्था के तेज़ विकास और ताइवान की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मैन्यूफैक्चरिंग क्षमताओं को देखते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने से होने वाले लाभों पर ज़ोर दिया.

इस बयान में चीन के साथ ताइवान के बढ़ रहे तनाव की ओर भी इशारा किया गया है. बयान में कहा गया है, "दोनों देश तानाशाही सरकारों से ख़तरों का सामना कर रहे हैं, इसलिए आर्थिक, कारोबार और तकनीकी लेन-देन को मज़बूत करना दोनों देशों के लिए लाभदायक है, जिससे हिंद-प्रशांत की स्थिरता और समृद्धि बढ़ाने में मदद मिल सकती है."

सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी ने पिछले साल के अक्तूबर में बताया था कि भारत अपने देश में एक माइक्रोचिप प्लांट लगाने के सौदे पर ताइवान के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि इस क्षेत्र में दोनों देशों की चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सके.

दिल्ली में ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र के उप प्रतिनिधि मुमिन चेन ने 22 अगस्त को भारतीय पत्रिका 'द वीक' को बताया कि ताइवान की कई कंपनियां चीन से बाहर निकल रही हैं. उन्होंने बताया कि ताइवान भारत को "सबसे बड़े बाज़ारों में से एक के रूप में देखता है, जिसके पास पूरी क्षमता और युवा आबादी है."

ताइवान स्ट्रेट

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भारतीय नेताओं के ताइवान दौरे के विचार का स्वागत

भारत के मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के एक सांसद के उस सुझाव का ताइवान के विश्लेषकों ने स्वागत किया है कि संसद के निचले सदन लोकसभा के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल को भी नैंसी पेलोसी की तरह ताइवान का दौरा करना चाहिए.

ताइवान-एशिया एक्सचेंज फाउंडेशन की सना हाशमी ने 20 अगस्त को ताइवान की आज़ादी के समर्थक ताइपे टाइम्स में लिखा कि संसदीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे से 'भारत-ताइवान के संबंधों को और ऊंचाई पर ले जाने' में मदद मिलेगी.

हाशमी ने याद किया कि 2018 में विदेश मामलों की भारतीय संसदीय समिति ने विदेश मंत्रालय को 'याद दिलाया' था कि "भारत ताइवान को लेकर अत्यधिक सतर्क है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश या पाकिस्तान के क़ब्जे़ वाले कश्मीर को लेकर चीन उसी तरह की संवेदनशीलता नहीं दिखाता."

पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग

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सतर्क सहयोग की संभावना

ताइवान ने 15 अगस्त को एक बयान जारी किया. इसमें उसने ताइवान स्ट्रेट में यथास्थिति बदलने के लिए संयम बरतने और एकतरफ़ा कार्रवाई से बचने के लिए उससे की गई भारत सहित 50 से अधिक देशों की अपील के लिए 'ईमानदारी से आभार' जताया है.

ताइवान ने कहा है कि उसकी सरकार अमेरिका, जापान और भारत सहित दूसरे सभी समान विचारधारा वाले देशों से गहरा संवाद और समन्वय बनाए रखते हुए अपनी 'आत्मरक्षा क्षमताओं को बढ़ाना' जारी रखेगी.

विश्लेषकों का कहना है कि भारत भी जून 2020 में विवादित गलवान घाटी में चीन के साथ हुई हिंसक मुठभेड़ के बाद ताइवान के साथ सहयोग बढ़ाने पर विचार करेगा.

ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने 21 अगस्त को हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि 'एक चीन' के सिद्धांत और नैंसी पेलोसी की यात्रा पर भारत की देर से और धीमे से दी गई प्रतिक्रिया असल में चीन सीमा पर बढ़े तनाव के चलते उसकी सोची समझी रणनीति है.

वीडियो कैप्शन, ताइवान से चीन की तनातनी भारत के लिए मौका?

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