श्रीलंका की बदहाली के बाद इन 13 देशों पर भी ख़तरे का बादल

श्रीलंका में आर्थिक संकट

इमेज स्रोत, Getty Images

कभी एशिया के ख़ुशहाल, समृद्ध देशों में शामिल श्रीलंका अपनी आज़ादी के बाद पहली बार इतने बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रहा है.

श्रीलंका को कई बार विदेशी क़र्ज़ चुकाने के लिए डेडलाइन दी गई लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार के ख़ाली होने से वह क़र्ज़ नहीं चुका पाया और आख़िर में उसने ख़ुद को डिफॉल्टर घोषित कर दिया.

श्रीलंका की जनता सड़कों पर उग्र प्रदर्शन कर रही है. राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग चुके हैं. पेट्रोल पंप पर तेल के लिए लंबी लाइनें लगी हुई हैं. दवा, खाने-पीने के सामान के दाम कई गुणा बढ़ गए हैं.

जब कोई देश विदेशी क़र्ज़ समय से नहीं चुका पाता यानी उसके पास इतनी विदेशी मुद्रा नहीं बचती कि वो क़र्ज़ अदा कर पाए तो वह डिफॉल्टर हो जाता है. ऐसा ही श्रीलंका के मामले में हुआ. ढहते हुए श्रीलंका को पूरी दुनिया देख रही है. लेकिन अर्थव्यवस्था तबाह होने की कहानी केवल श्रीलंका की नहीं है.

लातिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना साल 2000 से 2020 के बीच दो बार डिफ़ॉल्टर हो चुका है. 2012 में ग्रीस डिफ़ॉल्टर बना. 1998 में रूस, 2003 में उरुग्वे, 2005 में डोमिनिकन रिपब्लिक और 2001 में इक्वेडोर.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस साल श्रीलंका के अलावा लेबनान, रूस, सूरीनाम और जाम्बिया समय से क़र्ज़ नहीं चुका पाए हैं और डिफॉल्टर की श्रेणी आ गए.

वहीं बेलारूस भी इसी कगार पर है और कम से कम एक दर्जन देशों पर ख़तरा मंडरा रहा है. ऐसे में बात सबसे पहले भारत के पड़ोसी देश म्यांमार की.

म्यांमार

इमेज स्रोत, Getty Images

मुश्किल में म्यांमार

म्यांमार के स्थानीय मीडिया के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार को नियंत्रण में लाने के लिए म्यांमार के केंद्रीय बैंक ने स्थानीय कंपनियों और बैंकों के लिए आदेश जारी किया है. इस आदेश में विदेशी क़र्ज़ के भुगतान को स्थगित करने और देर से भुगतान करने के लिए कहा गया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, न्यूज़ एजेंसी म्यांमार नाउ के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 13 जुलाई को ये आदेश जारी किया है, जो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है. इस दस्तावेज़ को रॉयटर्स स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं कर पाया है.

केंद्रीय बैंक के बयान में कहा गया है, "विदेशी मुद्रा क़ानून और विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों के अनुसार, मूल रक़म और ब्याज की रक़म सहित विदेशी क़र्ज़ के भुगतान को निलंबित कर दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही लाइसेंस प्राप्त बैंकों को अपने ग्राहकों के साथ भुगतान को लेकर फिर से व्यवस्था करनी चाहिए."

इस संबंध में जब केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को फ़ोन किया गया तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया.

डॉलर के मुक़ाबले म्यांमार की मुद्रा क्यात की गिरावट ने देश में पहले से गहराए संकट को और बढ़ा दिया है. तेल और खाने पीने की क़ीमतों में भारी उछाल आया है. पिछले साल सेना ने म्यांमार में तख्तापलट कर सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया था, जिसने एक दशक के राजनीतिक और आर्थिक सुधारों पर ब्रेक लगाने का काम किया है.

म्यांमार की मुद्रा क्यात

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, म्यांमार की मुद्रा क्यात

विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर नए नियम

केंद्रीय बैंक ने एक दिन में स्थानीय बैंकों में विदेशी मुद्रा जमा करने और उसे बदलने को लेकर कई आदेश जारी किए हैं. इसके साथ ही मंत्रालयों और स्थानीय सरकार को घरेलू लेन-देन के लिए विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश दिया है.

म्यांमार की मुद्रा क्यात के लिए आधिकारिक एक्सचेंज रेट, 1850 क्यात प्रति डॉलर पर निर्धारित किया गया है, लेकिन ये अनौपचारिक ब्लैक मार्केट से काफ़ी नीचे हैं.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के पूर्व डेप्युटी गवर्नर डब्ल्यू ए विजेवर्देना ने ट्वीट कर म्यांमार में गहराते आर्थिक संकट पर चिंता ज़ाहिर की है. उन्होंने कहा कि विदेशी क़र्ज के भुगतान को निलंबित करना चिंताजनक है. अब ऐसा लगता है कि म्यांमार भी श्रीलंका के रास्ते पर जा रहा है.

म्यांमार के बाद भारत के एक और पड़ोसी देश पर डिफॉल्टर होने का ख़तरा मंडरा रहा है. इस देश का नाम है पाकिस्तान.

पाकिस्तान का शेयर बाजार

इमेज स्रोत, Getty Images

पाकिस्तान

इसी हफ़्ते आईएमएफ यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण सौदा किया है. आईएमएफ़ फिर से पाकिस्तान को क़र्ज़ देने के लिए तैयार हो गया है लेकिन वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती क़ीमतों के चलते पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव है जो उसे संकट की कगार पर धकेल रहा है.

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 9.8 अरब डॉलर तक गिर गया है, जो पाँच हफ़्ते के आयात के लिए भी नाकाफ़ी है. पाकिस्तानी रुपया कमज़ोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है. एक डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तान रुपया क़रीब 210 पर पहुँच गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की नई सरकार को अब तेज़ी से खर्चों में कटौती करने की ज़रूरत है क्योंकि वह अपने राजस्व का 40 प्रतिशत सिर्फ ब्याज़ भरने के लिए ख़र्च कर रही है.

अर्जेंटीना

यहाँ की मुद्रा पेसो अब काला बाजार में लगभग 50 प्रतिशत की छूट पर ट्रेड करती है. देश का विदेशी भंडार गंभीर रूप से कम है.

सरकार के पास 2024 तक काम करने के लिए पर्याप्त क़र्ज़ नहीं है. अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति क्रिस्टीना फर्नांडीज डी किर्चनर क़र्ज़ के लिए फिर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का रुख कर सकती हैं.

अर्जेंटीना ने 2001 में अपने क़र्ज़दाताओं के क़र्ज़ चुकाने से इनकार दिया था. तब अर्जेंटीना पर भारी क़र्ज़ था. भारी बेरोज़गारी के कारण लोग सड़कों पर हिंसक विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे. अर्जेंटीना में जो कुछ भी हुआ, वो दुनिया भर के क़र्ज़दाओं के लिए दुःस्वप्न की तरह था.

यूक्रेन में महंगाई

इमेज स्रोत, Getty Images

यूक्रेन

कई महीनों से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है. मॉर्गन स्टेनली और अमुंडी जैसे बड़े निवेशकों ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में यूक्रेन को अपने 20 अरब डॉलर से ज़्यादा के क़र्ज़ का पुनर्गठन करना होगा.

सितंबर महीना यूक्रेन के लिए संकट भरा है. उसे 1.2 अरब डॉलर के बॉन्ड भुगतान करने हैं. सहायता राशि और उसके रिज़र्व का मतलब कि यूक्रेन संभावित रूप से भुगतान कर सकता है.

यूक्रेन की बड़ी नेशनल ऑइल एंड गैस कंपनी 'नाफ्तोगाज़ी', जिसे सरकार संचालित करती है, उसने इस हफ़्ते दो साल के लिए क़र्ज़ को फ्रीज करने की मांग की है. निवेशकों को संदेह है कि सरकार भी इसी का पालन करेगी.

ट्यूनीशिया

अफ़्रीका कई देशों का समूह है, जो आईएमएफ़ के पास क़र्ज़ के लिए जाता है लेकिन ट्यूनीशिया सबसे अधिक जोखिम में है. ट्यूनीशिया में बजट घाटा क़रीब 10 प्रतिशत है

पब्लिक सेक्टर के वेतन बिलों के मामले में ये दुनिया के अगली कतार वाले देशों में है. राष्ट्रपति कैस सैयद सत्ता के देश के शक्तिशाली मज़दूर संघ पर पकड़ मज़बूत रखने की वजह से ये चिंताएं हैं कि उन्हें आईएमएफ़ से क़र्ज़ लेने या कम से कम उसके साथ बने रहने में मुश्किल हो सकती है.

ट्यूनीशिया, मॉर्गन स्टेनली की संभावित डिफॉल्टर की लिस्ट में शीर्ष तीन में शामिल है.

घाना की मु्द्रा

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, घाना की मुद्रा घानियन सेडी

घाना

तेज़ी से उधार लेने के चलते घाना पर जीडीपी के अनुपात में क़र्ज़ 85 प्रतिशत तक बढ़ गया है. घाना की मुद्रा घानियन सेडी ने इस साल अपने मूल्य का लगभग एक चौथाई हिस्सा खो दिया है.

यह देश पहले से ही राजस्व का आधा से अधिक क़र्ज़ के ब्याज भुगतान पर खर्च कर रहा है. यहाँ महंगाई भी 30 फ़ीसदी के क़रीब पहुँच गई है.

मिस्र

जीडीपी के अनुपात में क़र्ज़ लगभग 95 प्रतिशत है. फंड फर्म एफआईएम पार्टनर्स का अनुमान है कि मिस्र के पास अगले पाँच सालों में भुगतान करने के लिए 100 अरब डॉलर का क़र्ज़ है, जिसमें 2024 में 1.3 अरब डॉलर का बॉन्ड भी शामिल है.

मिस्र ने अपनी मुद्रा पाउंड में 15 प्रतिशत का अवमूल्यन किया है और मार्च में आईएमएफ़ से मदद मांगी है लेकिन बॉन्ड स्प्रेड अब 1200 आधार अंक से अधिक है

कीनिया

कीनिया अपने राजस्व का लगभग 30 प्रतिशत ब्याज भुगतान पर खर्च करता है. इसके बॉन्ड्स ने लगभग आधी क़ीमत खो दी है और वर्तमान में कैपिटल मार्केट तक कोई पहुँच नहीं है.

कीनिया, मिस्र, ट्यूनीशिया और घाना को लेकर मूडीज के डेविड रोगोविक ने रॉयटर्स से कहा कि ये देश सबसे मुश्किल स्थिति में हैं क्योंकि रिज़र्व की तुलना में क़र्ज़ ज़्यादा है और क़र्ज़ संतुलन के मामले में देश को चलना चुनौती भरा है.

इथियोपिया की मुद्रा बिर्र

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, इथियोपिया की मुद्रा बिर्र

इथियोपिया

G20 कॉमन फ्रेमवर्क प्रोग्राम के तहत इथियोपिया को क़र्ज़ से राहत मिल सकती है. इस योजना के तहत राहत पाने वाला इथियोपिया पहला देश होगा. देश में चल रहे गृह युद्ध ने विकास को रोक दिया है. हालांकि इस बीच यह अपने एकमात्र एक अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड की सेवा जारी रखे हुए है.

अल साल्वाडोर

इस देश ने बिटकॉइन को क़ानूनी रूप से करेंसी की मान्यता दी थी. क्रिप्टोकरेंसी में पिछले कुछ महीनों से काफ़ी गिरावट देखी गई है जिसके चलते अल सल्वाडोर को नुक़सान हुआ है.

पिछले 9 महीने में यहाँ की सरकार ने लाखों डॉलर बिटकॉइन में निवेश किए हैं. इस देश के लिए आईएमएफ़ के दरवाज़े बंद हो चुके हैं. छह महीने में मैच्योर होने वाला 80 करोड़ डॉलर का बॉन्ड 30 प्रतिशत छूट पर ट्रेड कर रहा है.

बेलारूस

पश्चिमी प्रतिबंधों ने पिछले महीने रूस को आर्थिक मोर्चे पर काफ़ी चोट मारी है. 27 मई को 10 करोड़ डॉलर का भुगतान करना था लेकिन रूस नहीं कर पाया था.

इसके बाद 30 दिनों का समय और दिया गया था लेकिन रूस इस डेट पर भी भुगतान नहीं कर सका. इसके बाद रूस को डिफाल्टर घोषित कर दिया गया. यूक्रेन के साथ युद्ध में बेलारूस, रूस के साथ खड़ा है. आर्थिक मोर्चे पर तंगी का सामना बेलारूस को भी करना पड़ रहा है.

रूस ने डिफॉल्टर होने की बात को ख़ारिज किया था. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दमित्री एस पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा था कि डिफॉल्ट होने का बयान पूरी तरह से अवैध है. पोस्कोव ने कहा था, ''सच यह है कि यूरोक्लियर ने पैसे को रोक लिया है और जिसे मिलना था, उन तक पहुँच नहीं पाया. दूसरे शब्दों में कहूँ तो हमें डिफॉल्टर कहने का कोई मतलब नहीं है.''

बेलारूसी रूबल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बेलारूसी रूबल

इक्वाडोर

यह देश दो साल पहले क़र्ज ना चुकाने की वजह से डिफॉल्टर हो गया था. देश में लाखों की संख्या में लोग राष्ट्रपति गुयलेरमो लासो का विरोध कर रहे हैं. जिसने इस देश को और अधिक आर्थिक संकट में डाल दिया है.

इक्वाडोर की सरकार पर भारी क़र्ज़ है. जेपी मॉर्गन ने पब्लिक सेक्टर के राजकोषीय घाटे के अनुमान को इस साल जीडीपी के 2.4 प्रतिशत और अगले साल 2.1 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है.

नाइजीरिया

यह क़र्ज़ पर बने ब्याज के भुगतान के लिए राजस्व का क़रीब 30 प्रतिशत खर्च करता है. संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कर्मियों ने पूर्वोत्तर इलाक़े में रह रहे लाखों लोगों के लिए बिगड़ती स्थिति के बारे में चेतावनी भी जारी की है.

ये इलाक़ा लगातार सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित है. नाइजीरिया एक तेल उत्पादक देश है लेकिन वहाँ पर तेल को प्रोसेस करने वाली फैक्ट्रियों की कमी है, जिसके चलते नाइजीरिया को भी तेल आयात पर निर्भर रहना पड़ता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)