भारत ने ऐसे ख़ुशी मनाई जैसे शहबाज़ शरीफ़ नहीं शहबाज़ सिंह पीएम बने हों: इमरान ख़ान – पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू

इमरान ख़ान

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    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शहबाज़ शरीफ़ सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार उन पर ग़द्दारी का मुक़दमा बनाकर उन्हें रास्ते से हटाना चाहती है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, शनिवार को ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में एक जलसे को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान पर ग़द्दारी का मुक़दमा चलाया जाए. क्या ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ मेरे ऊपर ग़द्दारी का मुक़दमा चलाएंगे. जब तक ख़ून है वक़्त के यज़ीदों का मुक़ाबला करता रहूँगा."

लॉन्ग मार्च के बारे में इमरान ख़ान ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के मुकम्मल फ़ैसले का इंतज़ार है.

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इमरान के अनुसार, उनके वकीलों ने उनसे थोड़ा इंतज़ार करने को कहा है क्योंकि कुछ मामलों में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. इस मौक़े पर उन्होंने भारत का भी नाम लिया.

इमरान ख़ान ने शरीफ़ ख़ानदान और भारत के रिश्तों पर बात करते हुए कहा, "हमारी सरकार गिराई गई तो भारत ने ऐसी ख़ुशी मनाई जैसे शहबाज़ शरीफ़ नहीं शहबाज़ सिंह पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बन गया हो. मोदी ने कश्मीरियों पर ज़ुल्म किया और नवाज़ शरीफ़ ने उन्हें अपने ख़ानदान की शादी पर बुलाया. नवाज़ शरीफ़ के मुंह से कुलभूषण जाधव के ख़िलाफ़ कभी एक शब्द नहीं निकला. नवाज़ शरीफ़ भारत गए तो हुर्रियत के नेताओं से नहीं मिले क्योंकि नरेंद्र मोदी नाराज़ हो जाते."

बिलावल भुट्टो

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यासीन मलिक को भारतीय जेल में मारने की आशंका: बिलावल भुट्टो

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कहा है कि उन्हें इस बात की आशंका है कि भारतीय जेल में क़ैद कश्मीरी नेता यासीन मलिक को जेल में ही मार दिया जाए.

यासीन मलिक इस समय दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में बंद हैं और हाल ही में भारत की एक अदालत ने उन्हें टेरर फ़ंडिंग के मामले में दोषी क़रार देते हुए और उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को एक ख़त लिखा है जिसमें उन्होंने यासीन मलिक को बेगुनाह क़रार दिया है.

बिलावल भुट्टो ने अपने ख़त में लिखा है कि भारतीय अदालत ने मनगढ़ंत और झूठे आरोपों पर यासीन मलिक को सज़ा सुनाई है.

उन्होंने आरोप लगाया कि यासीन मलिक बीमार हैं बावजूद इसके जेल में उनके साथ बेरहमी से सलूक किया गया.

उन्होंने यासीन मलिक के ख़िलाफ़ मुक़दमे को सियासी क़रार दिया है.

बिलावल ने ख़त में लिखा है कि यासीन मलिक के साथ जेल में जिस तरह का व्यवहार किया गया उसने अंतरराष्ट्रीय क़ानून की धज्जियां उड़ा दी हैं.

बिलावल ने यासीन मलिक का बचाव करते हुए ख़त में लिखा है, "आज़ादी के संघर्ष को दहशतगर्दी क़रार देने की कोशिश हो रही है. भारतीय रवैये को मद्देनज़र रखा जाए तो इस बात की आशंका है कि यासीन मलिक को जेल में ही मार दिया जाएगा."

अख़बार के अनुसार बिलावल भुट्टो ने अपने ख़त में संयुक्त राष्ट्र महासचिव से अपील की है कि वो कश्मीर समस्या के शांतिपूर्ण हल के लिए अपना किरदार अदा करें.

बिलावल भुट्टो ने अपने ख़त में अपील की है कि संयुक्त राष्ट्र, भारत पर दबाव डाले कि वो बेबुनियाद आरोपों पर क़ैद तमाम दूसरे कश्मीरी नेताओं को रिहा कर दे.

शहबाज़ शरीफ़

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आईएसआई को सिविलियन अधिकारियों की जांच का भी मिला अधिकार

डॉन अख़बार के अनुसार, पाकिस्तान ने ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को सिविलियन अधिकारियों की जाँच का अधिकार दे दिया है.

अख़बार के अनुसार, प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने शनिवार को एक नोटिफ़िकेशन जारी कर आईएसआई को बतौर वेटिंग एजेंसी काम करने का निर्देश जारी कर दिया.

इस नोटिफ़िकेशन में कहा गया है कि नौकरशाहों की भर्ती, संवेदनशील पदों पर तैनाती, तबादले या प्रमोशन के समय आईएसआई उनकी छानबीन करेगी और आईएसआई की हरी झंडी के बाद ही अफ़सर की तैनाती होगी.

इससे पहले सैन्य अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले सभी अधिकारियों की छानबीन करने का अधिकार तो आईएसआई के पास था लेकिन सिविलियन अधिकारियों के मामले में यह अधिकार पाकिस्तान की एजेंसी आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के पास था.

सरकार ने यह फ़ैसला क्यों किया अभी तक इस बारे में सरकार की तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन सत्ताधारी मुस्लिम लीग (नून) के ही एक वरिष्ठ नेता ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता परवेज़ रशीद ने ट्वीट किया, "अगर सिविलियन अधिकारियों की छानबीन का अधिकार आईएसआई को दिया जाता है तो आईएसआई को भी सिविलियन कंट्रोल के अंदर होना चाहिए और उसे संसद के प्रति जवाबदेह होना चाहिए."

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विपक्षी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने परवेज़ रशीद का समर्थन करते हुए कहा, "अगर संस्थाओं को अपना किरदार और बढ़ाना है तो फिर उसकी क़ीमत आपको जनता के प्रति जवाबदेह बनकर चुकानी पड़ेगी. संस्थान को सोचना होगा कि वो पाकिस्तान की राजनीति में अपना क्या रोल रखना चाहते हैं. पाकिस्तान में राजनीतिक संस्थानों और संस्थानों के नए रोल पर बहस की ज़रूरत है."

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पीटीआई की एक और वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शीरीन मज़ारी ने भी फ़व्वाद चौधरी की बात से सहमति जताई.

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शीरीन मज़ारी का कहना था, "पाकिस्तान में लोकतंत्र के भविष्य के लिए यह बहस बहुत ज़रूरी है."

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