यासीन मलिकः कश्मीर के अलगाववादी आंदोलन से उम्र कै़द की सज़ा तक

यासीन मलिक

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इमेज कैप्शन, यासीन मलिक बीते 32 साल से भारत के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे हैं
    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

एनआईए की एक अदालत ने कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को टेरर फ़ंडिंग के मामलों में दोषी क़रार दिया है.

अदालत ने उन्हें उम्र कैद की सज़ा सुनाई है.

साल 1991 में मैं श्रीनगर रिपोर्टिंग के लिए गया हुआ था. दोपहर के समय एक भीड़-भाड़ वाली सड़क से गुज़र रहा था कि अचानक भगदड़ मच गई. लोग अपनी साइकिलें, चप्पल और जूते छोड़ कर भागने लगे. गोलियां चारों तरफ़ से चल रही थीं. जान बचाना मुश्किल हो रहा था. लेकिन हिंसा जितनी अचानक शुरू हुई थी उसी तरह बंद भी हो गई. जनजीवन मिनटों में सामान्य हो गया.

मैं सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) के एक बंकर में घुस गया था. बीएसएफ़ वालों ने मुझे बाद में बताया कि ये जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (JKLF) और हिज़्बुल मुजाहिदीन के बीच 'टर्फ़ वॉर' की एक झलक है जो लगभग रोज़ देखने को मिलती है.

वो समय कश्मीर घाटी में अलगाववादी आंदोलन का टर्निंग पॉइंट था जब स्वतंत्रता समर्थक और उदारवादी जेकेएलएफ़ के लोग हिज़्बुल मुजाहिदीन के हाथों या तो मारे जा रहे थे या उसमें शामिल हो रहे थे या मैदान छोड़ कर भाग रहे थे.

हिज़्बुल मुजाहिदीन को पाकिस्तान का समर्थन हासिल था. इसके चरमपंथी न केवल इस्लाम के नाम पर लड़ रहे थे बल्कि कश्मीर को पाकिस्तान में शामिल करने के लिए भी मैदान में कूदे थे. हिज़्बुल मुजाहिदीन कश्मीर में सबसे शक्तिशाली चरमपंथी संगठन बन गया था.

जेकेएलएफ के नेतृत्व को काफ़ी नुक़सान हुआ, अंततः 1994 में बंदूक छोड़ दी और "कश्मीर की स्वतंत्रता" के लिए एक शांतिपूर्ण संघर्ष की घोषणा की.

उस समय कश्मीर की आज़ादी की मांग करने वाले जेकेएलएफ़ का नेतृत्व यासीन मलिक कर रहे थे जबकि पाकिस्तान समर्थक हिज़्बुल मुजाहिदीन की कमान सैयद सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान वाले कश्मीर से संभाल रखी थी.

दोनों कभी एक साथ थे. 1987 के विधानसभा चुनाव में सैयद सलाहुद्दीन (असली नाम सैयद यूसुफ़ शाह) एक चुनावी क्षेत्र से उम्मीदवार थे और यासीन मलिक उनके चुनावी एजेंट.

वीडियो कैप्शन, द कश्मीर फ़ाइल्स फ़िल्म पर जम्मू के कश्मीरी पंडित क्या बोले?

जेकेएलएफ़ के श्रीनगर क्षेत्र के पूर्व कमांडर सैफ़ुल्लाह भी सलाहुद्दीन के चुनावी एजेंट थे. श्रीनगर से फ़ोन पर बातें करते हुए सैफ़ुल्लाह कहते हैं, "यासीन मलिक मेरे बचपन के दोस्त हैं. मैं और वो (यासीन) सलाहुद्दीन के पोलिंग एजेंट थे 1987 के चुनाव में. वो चुनाव हमने 35,000 वोटों से जीत लिया था लेकिन हमें हरा दिया गया. हम सब गिरफ़्तार कर लिए गए."

सैफ़ुल्लाह इस बात से ख़ुश थे कि यासीन मालिक को अदालत ने दोषी ठहराया. वो उनपर हत्याओं का आरोप लगाते हुए कहते हैं, "इसने (यासीन मलिक ) अपनी सियासत चमकाने के लिए हमारे कई साथियों को ये कहते हुए रास्ते से हटवाया वो सभी भारत के एजेंट थे. आज अल्लाह ने अगर इसको सज़ा दी है तो ये इसके अपने गुनाहों की सज़ा है. आज मेरा भाई उम्र ख़ान, शब्बीर हुसैन, रियाज़ और सभी क़त्ल किये गए दोस्त शायद जन्नत में बैठ कर देख रहे होंगे कि एक क़ातिल को सज़ा सुनाई गई है."

वो आगे कहते कहते हैं, "ये हत्याएं 1996 में हुई थीं. तब से मेरे और यासीन के बीच मतभेद शुरू हो गए. हम आज भी दोस्त हैं लेकिन नज़रिए के मतभेद बढ़ गए हैं.".

सैफ़ुल्लाह कहते हैं, "1994 में मलिक ने भारत सरकार के साथ शांति प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर संघर्ष विराम की घोषणा की."

यासीन मलिक

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कश्मीरी पंडितों का घाटी से पलायन

कश्मीरी पंडितों का घाटी से पलायन 1990 में शुरू हुआ. उस समय ये धारणा आम थी कि यासीन मालिक की अगुवाई में इसमें जेकेएलएफ़ आगे-आगे है. लेकिन सैफ़ुल्लाह के अनुसार कश्मीरी पंडितों के पलायन के ज़िम्मेदार "हम सब थे."

हाल ही में रिलीज़ हुई विवादित फ़िल्म 'कश्मीर फ़ाइल' में दो मुख्य खलनायकों को कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन का ज़िम्मेदार ठहराया गया है- बिट्टा कराटे और यासीन मलिक. उन पर यही इल्ज़ाम 1990 के दशक में भी लगाया जाता था.

गुरुवार को एनआईए की एक अदालत ने 2017 के एक टेरर फ़ंडिंग मामले में यासीन मलिक को दोषी ठहराया है. सज़ा 25 मई को सुनाई जाएगी. मलिक ने अपने ख़िलाफ़ लगे आरोपों को अदालत में चुनौती नहीं दी.

मलिक के विरुद्ध आरोप ये भी था कि उन्होंने "स्वतंत्रता संग्राम" के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अन्य गैरक़ानूनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के मक़सद से दुनिया भर में एक विस्तृत संरचना और तंत्र स्थापित किया था.

जेकेएलएफ़

यासीन मलिक जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (JKLF) के अध्यक्ष तो थे ही साथ ही इसके संस्थापकों में से भी एक थे.

इस संगठन ने 1989 और उसके कुछ सालों बाद तक मूल रूप से कश्मीर घाटी में सशस्त्र उग्रवाद का नेतृत्व किया था. यासीन मलिक जम्मू और कश्मीर को भारत और पाकिस्तान दोनों से आज़ादी दिलाने की वकालत करते हैं.

बाद में उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया और बातचीत का रास्ता अपनाया, लेकिन वो कश्मीर की भारत और पाकिस्तान दोनों से आज़ादी की वकालत करते रहे.

1966 में श्रीनगर में जन्मे मलिक अभी तिहाड़ जेल में क़ैद हैं. वो कई बार जेल जा चुके हैं. पहली बार उन्हें जब जेल भेजा गया था तो उनकी उम्र केवल 17 साल थी.

उनका दावा है कि उन्होंने 1980 में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा हिंसा को देखने के बाद हथियार उठाए थे.

वो 1983 में घाटी में उस समय लोगों की नज़रों में आए जब उन्होंने श्रीनगर में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ श्रीनगर में पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच को बाधित करने की कोशिश की. वो गिरफ़्तार कर लिए गए जिसके बाद वो चार महीने के लिए जेल में डाल दिए गए.

युवावस्था में यासीन मलिक

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यासीन मलिक की पत्नी क्या बोलीं

एक वक़्त था जब उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी और 2005 में एक डेलीगेशन के साथ पाकिस्तानी कश्मीर का दौरा किया था. उनकी पत्नी मशाल हुसैन मलिक पाकिस्तान की हैं और वहीं रहती हैं. वो ट्विटर पर अपने पति की बेगुनाही के बयान देती रहती हैं.

गुरुवार के अदालत के फ़ेसले के बाद उन्होंने एक ट्वीट में कहा, "मोदी आप यासीन मलिक को शिकस्त नहीं दे सकते. उनका दूसरा नाम आज़ादी है. अनुचित न्यायिक आतंकवाद के हर क़दम पर भारत पछताएगा."

यासीन मलिक की कश्मीर में कितनी पकड़ है? वरिष्ठ कश्मीरी पत्रकार संजय काव ने यासीन मलिक की गतिविधियों को क़रीब से देखा है. उन्होंने दिल्ली के तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में युवा यासीन मलिक की तस्वीर भी ली थी.

वो कहते हैं, "शब्बीर शाह और दिवंगत सैयद अली शाह गिलानी जैसे अलगाववादी नेताओं के विपरीत, मलिक के समर्थन आधार कश्मीर में कुछ सीमित जगहों पर है. इसका मुख्य कारण यह है कि घाटी में लोग सोचते हैं कि वह एक डबल एजेंट है जो भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए काम करता है."

यासीन मलिक आज़ादी चाहते हैं लेकिन बातचीत के ज़रिये, जैसा कि संजय काव कहते हैं, "1990 के दशक में जब एक बार दिल्ली पुलिस के स्टेशन में पूछताछ के बाद बाहर निकले तो उन्होंने मुझसे कहा कि कश्मीर की समस्या को सुलझाने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स को एक साथ बैठ कर बातचीत शुरू करनी चाहिए."

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