द कश्मीर फ़ाइल्स : विवेक अग्निहोत्री बोले- 'भोपाली' का मतलब वही होता है जो मैंने कहा था

इमेज स्रोत, ANI
कश्मीरी पंडितों की पीड़ा पर बनी फ़िल्म 'द कश्मीर फ़ाइल्स' से चर्चा में आए फ़िल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने कहा है कि 'भोपाली' का मतलब वही होता है जो उन्होंने कहा था.
एक साक्षात्कार में विवेक अग्निहोत्री ने कहा था कि वो भोपाल से हैं लेकिन ख़ुद को 'भोपाली' नहीं कहते हैं, 'क्योंकि भोपाली का मतलब होता है होमोसेक्सुअल.'
अग्निहोत्री ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था, "यूं समझो कि मैं भोपाल में बड़ा हुआ हूं लेकिन ख़ुद को भोपाली नहीं कहता क्योंकि इसका एक अलग कोनोटेशन (अर्थ) है, जो मैं कभी आपको अकेले में समझाऊंगा या किसी भोपाली से पूछ लेना, जो भोपाली हैं उसका मतलब जेनरली (सामान्य तौर) होता है कि ये होमोसेक्सुअल हैं. हां, नवाबी शौक वाला व्यक्ति."
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
अब क्या बोले अग्निहोत्री
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे विवेक अग्निहोत्री से जब इस बयान पर सवाल पूछा गया तो पहले तो उन्होंने कहा कि उनके बयान को ग़लत संदर्भ में लिया गया है. इसके बाद समझाते हुए उन्होंने कहा कि 'भोपाली' का मतलब वही होता है जो उन्होंने कहा था, हालांकि अब भोपाली का मतलब बदल गया है और वो ख़ुद भी भोपाली हैं.
पत्रकारों के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "ये इतना ज्यादा परेशान होने वाली बात नहीं है, एक किसी यार दोस्त के साथ बातचीत होती है, अलग-अलग तरह की बातचीत होती है, मैं दोस्तों के बीच बात कर रहा था जिसे हेडलाइन बनाकर पेश कर दिया गया."
सवाल पूछने वाले पत्रकार पर ही सवाल उठाते हुए अग्निहोत्री ने कहा, "मैंने स्वयं आईआईएमसी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और अभी माखन लाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय की पावन धरती पर बैठा हूं. मैंने ये पढ़ा था कि पत्रकार का सबसे पहला कर्तव्य होता है रिसर्च करके फैक्ट सामने लाना और फिर नैरेटिव की बात करना. आपके सवाल में नैरेटिव पहले है और रिसर्च और फैक्ट नहीं हैं. आपको ये समझना चाहिए कि पूरा इंटरव्यू किस संदर्भ में था."
अपने बयान पर सफ़ाई देते हुए अग्निहोत्री ने कहा, "जहां तक मेरे उस बयान की बात है तो इसमें कुछ शर्म की बात नहीं है, मैं पूरी बात आपको बता देता हूं. जब मैं यहां बड़ा हो रहा था, इस शहर में, आप शायद तब पैदा भी नहीं हुए होंगे. तब यहां अरेरा कॉलोनी नहीं थी, मूलतः ये एक ग़रीब शहर था, तब यहां ग़रीबी थी, यहां तांगे चला करते थे. जब मैं सात आठ साल का यहां आया था, तब भोपाली शब्द का वही अर्थ था. जो लोग यहां के हैं और सच बोलते हैं, वो आपको ये बता देंगे. मेरे कहने का मतलब ये है कि शब्दों का धीरे-धीरे अर्थ बदलता जाता है, एक शब्द के आज जो मायने हैं.. हो सकता है पचास साल बाद ना हों, उस संदर्भ में ये बात मैंने कही है. आज मैं दिन रात भोपाल की बात करता हूं, भोपाल का बच्चा-बच्चा मुझ पर गर्व करता है. मैं ये कहता हूं कि भोपाल का पोहा इंदौर से अच्छा है. मैं कई बार बोल चुका हूं कि भोपाल सबसे ख़ूबसूरत शहर है."
उन्होंने कहा, "आज भोपाल बदल चुका है, भोपाली का अर्थ बदल चुका है. आज भोपाली का मतलब है शांत शहर, सुंदर सड़कें, महिलाओं का सम्मान, ऐसा शहर जहां फ़िल्मों की शूटिंग होती है. आज भोपाली का मतलब है विवेक अग्निहोत्री."
कांग्रेस ने भोपाल में विवेक अग्निहोत्री के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है, जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें करने दीजिए, हमें कौन सा उनसे वोट चाहिए.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अग्निहोत्री पर तंज़ करते हुए कहा, "विवेक अग्निहोत्री जी यह आपका अपना निजी अनुभव हो सकता है. यह आम भोपाल निवासी का नहीं है. मैं भी भोपाल और भोपालियों के संपर्क में 77 से हूँ लेकिन मेरा तो यह अनुभव कभी नहीं रहा. आप कहीं भी रहें संगत का असर तो होता ही है."
गुरुवार को दिल्ली की विधानसभा में बोलते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था, "'कह रहे हैं कश्मीर फाइल्स टैक्स फ्री करो, अरे यूट्यूब पर डाल दो फ्री फ्री हो जाएगी. टैक्स फ्री क्यों करा रहे हो, इतना ही तुमको शौक है तो विवेक अग्निहोत्री को कह दो यूट्यूब पर डाल देगा, सभी लोग एक ही दिन के अंदर फ़िल्म को देख लेंगे."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
दिल्ली की विधानसभा में बोलते हुए केजरीवाल ने कहा, "कश्मीरी पंडितों के नाम पर कुछ लोग करोड़ों-करोड़ों रुपए कमा रहे हैं और तुम लोगों को पोस्टर लगाने का काम दे दिया. आंखें खोलो कि तुम लोग कर क्या रहे हो. वो कश्मीरी पंडितों के नाम पर करोड़ों कमा गया और तुम पोस्टर लगाते रह गए."
जब अग्निहोत्री से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "कई लोग तो ये भी चाहते हैं कि ईश्वर को धरती पर आ जाना चाहिए. एक होते हैं मूर्ख, एक महामूर्ख और एक होते हैं घाघ."
'कभी राजनीति में नहीं आऊंगा'

इमेज स्रोत, @ANUPAMPKHER
विवेक अग्निहोत्री से जब पूछा गया कि क्या वो राजनीति में आएंगे तो उन्होंने कहा, "मैं ये कहना चाहता हूं कि मेरी स्वतंत्रता का कोई मोल नहीं है, मैं जीवन में कभी भी वोट बैंक पॉलिटिक्स का हिस्सा नहीं हूं. मैं राजनीति के बाहर रहकर जो बोल पा रहा हूं उसमें अधिक ताक़त है. पार्टी के साथ रहकर वो बोलना पड़ता है जो पार्टी चाहती है. मैं जीवन के इस पड़ाव पर, इस उम्र में आकर आपसे समझौता नहीं करूंगा, कभी भी राजनीति में नहीं आऊंगा."
अग्निहोत्री ने ये भी कहा कि वो बॉलीवुड का हिस्सा नहीं हैं और बॉलीवुड से लंबी लकीर खींचने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "बॉलीवुड के बारे में मैं अधिक जानता नहीं हूं, ना ही मेरा वहां कोई दोस्त है. मैं एक स्वतंत्र फ़िल्मकार हूं. मैंने बॉलीवुड के बगल में एक बड़ी इमारत खड़ी कर दी है जो बॉलीवुड से बड़ी है."
उन्होंने ये भी कहा कि बॉलीवुड एक एस्टेबलिशमेंट है और सरकारें बदलती हैं एस्टेबलिशमेंट नहीं बदलते हैं. अग्निहोत्री ने कहा, "सिस्टम क्या होता है, सिस्टम एक व्यवस्था होती है. बॉलीवुड नाम की कोई संस्था नहीं है, जहां जाकर आप अर्ज़ीं दें और आपको जगह मिल जाए. कोई दफ़्तर नहीं है जहां आप अर्ज़ी दें और नौकरी मिल जाए. लेकिन बॉलीवुड कैसे चलेगा इसके नियम तीन चार बड़े लोग हैं जो तय करते हैं. इनके पास सबसे अधिक ताक़त है. अगर आप इनके नियम नहीं मानेंगे तो आपको बॉलीवुड में जगह नहीं मिलेगी."
"हर जगह जहां एस्टेबलिशमेंट होता है वहां ऐसे ही होता है. मीडिया एस्टेबलिशमेंट है, शिक्षा में भी है. सरकारे आने जाने से इन एस्टेबलिशमेंट पर फ़र्क़ नहीं पड़ता है, इनके नियम नहीं बदलते हैं."
चर्चित हो रही है 'द कश्मीर फ़ाइल्स'

इमेज स्रोत, THE KASHMIR FILES
कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर बनी 'द कश्मीर फ़ाइल्स' बॉक्स ऑफ़िस पर ऐतिहासिक कमाई कर रही है. फ़िल्म ने अब तक दो सौ करोड़ रुपए से अधिक कमा लिए हैं. फ़िल्म को देश विदेश में देखा जा रहा है. यही नहीं फ़िल्म की रिलीज के बाद कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर एक नई बहस शुरू हुई है.
फ़िल्म में 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा और फिर वहां से हुए पलायन को दिखाया गया है. फ़िल्म के समर्थकों का कहना है कि ये फ़िल्म कश्मीरी पंडितों के पलायन की सच्चाई को पेश करती है जबकि इसके आलोचकों का तर्क है कि फ़िल्म बेहद हिंसक है और ये घटनाओं का एक ही पक्ष दिखाती है.
आरोप ये भी है कि ये फ़िल्म इकतरफ़ा नैरेटिव पेश करती है और मुसलमानों की गलत छवि पेश करती है. तेलंगाना हाई कोर्ट में फ़िल्म के कुछ दृश्यों को हटाने की मांग करते हुए याचिका भी दायर की गई थी जिसे ख़ारिज कर दिया गया है.
अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों के मुद्दे को दुनिया के सामने रखा है. उन्होंने कहा, "आज अगर पूरे विश्व में मैं कश्मीर को सामने लेकर आया हूं तो कुछ तो मेरी भी समझ होगी. हैदर के खिलाफ किसी ने आवाज़ क्यों नहीं उठाई, मिशन कश्मीर पर किसी ने क्यों आवाज़ नहीं उठाई, रोज़ा पर किसी ने आवाज़ नहीं उठाई."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















