चीनी कंपनियां जमा कर रही थीं भारतीयों का निजी डेटा: प्रेस रिव्यू

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भारत में शाओमी समेत चीनी कंपनियों पर कर चोरी और फ़र्ज़ी वित्तीय मामलों को लेकर जांच जारी है. ऐसे में एक चौंकाने वाली ख़बर सामने आई है.
इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें चीन की कंपनियां भारतीयों के निजी डेटा जमा कर रही थीं.
अख़बार की ख़बर के अनुसार, इन कंपनियों के वास्तविक लाभार्थियों में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ वरिष्ठ सदस्य भी हैं.
चीन की कंपनियों के पास कुछ भारतीयों के निजी डेटा का होना इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि चीन के अपने घरेलू नियमों के मुताबिक, कंपनियां 'डेटा डिस्क्लोज़र' के मानदंडों से बंधी हुई हैं. ऐसे में यह चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से भी बढ़ जाती है. इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि बीजिंग इस डेटा का अधिकतम इस्तेमाल कर सकता है.
इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, ऑनलाइन बेटिंग, डेटिंग को बढ़ावा देने वाले ऐप्स और उनके अधिकार वाली शेल-कंपनियों के चीनी नागरिकों से संबंधित होने की रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ ने डेटा चोरी के मामलों की जांच के लिए पूरे भारत में सेल स्थापित करने का फ़ैसला किया है.
भारत में डिजिटल क्षेत्र के विकास से चीन की कंपनियों को लोगों के निजी डेटा तक पहुंचने में काफी आसानी हो गई है. जानकार मानते हैं कि मोबाइल गेम्स और ऐप्स को बाज़ार में आसान शर्तों पर लोन चाहने वालों को अपनी ओर आकर्षित करने के मकसद से लॉन्च किया गया था लेकिन अब यह चिंता का कारण बनते जा रहे हैं.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि चीन से जुड़ी 40 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लाइसेंस रद्द हो सकते हैं.

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सिद्धू मूसेवाला के पिता ने की केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाक़ात
पंजाबी सिंगर-रैपर सिद्धू मूसेवाला के माता-पिता ने शनिवार को चंडीगढ़ में देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इसके साथ ही उन्होंने उन अटकलों पर भी विराम लगा दिया जिसमें कहा जा रहा था कि वो अब चुनाव लड़ेंगे.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, यह अटकलें तब तेज़ हो गई थीं जब गृह मंत्री के साथ मुलाकात की उनकी तस्वीर सामने आई. इससे पहले मूसेवाला के पिता ने 29 मई को मूसेवाला की हत्या की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की थी. जिसके बाद से ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं वो चुनाव लड़ सकते हैं.
सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने एक वीडियो इंटरव्यू में कहा, "अभी तक मेरे बेटे की चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई है और आप चुनाव की बात कर रहे हैं. मेरा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है."
उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया पर ये सब देखकर दुख होता है. आप लोग सोशल मीडिया पर चल रही बातों पर ध्यान मत दीजिए."
बलकौर सिंह ने कहा कि वह दुख की इस घड़ी में उनके साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों के प्रति आभारी हैं.

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ऑपरेशन गंगा: एयरलाइंस को अभी तक सरकार ने नहीं किया भुगतान
ऑपरेशन गंगा को ख़त्म हुए लगभग तीन महीने का समय हो चुका है लेकिन यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए चलाए गए इस ऑपरेशन के तहत जिन एयरलाइन्स ने अपनी सेवाएं दी थीं, उन्हें अभी तक उनके भेजे गए बिलों का भुगतान नहीं किया गया है.
द हिंदू की ख़बर के अनुसार, सरकार को देश की छह प्रमुख एयरलाइन्स को भेजे गए बिल का भुगतान करना है, जिन्होंने फरवरी और मार्च के बीच ऑपरेशन गंगा के तहत 76 उड़ानें भरीं.
हालांकि अधिकारियों को इस बात की जानकारी है कि एयरलाइन्स के बिल का भुगतान किया जाना है.
द हिंदू अख़बार ने अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि बिलों को क्लियर करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें अभी समय लग सकता है.

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ज्ञानवापी में नहीं मिली पूजा की इजाज़त, अनशन पर संत
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्ञानवापी परिसर में मिले कथित शिवलिंग की पूजा की अनुमति नहीं मिली. पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करते हुए उन्हें उनके मठ से बाहर नहीं निकलने दिया.
दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के अनुसार, इसके विरोध में उन्होंने अनशन शुरू कर दिया है. इससे पहले उन्होंने घोषणा की थी कि वे 71 लोगों के साथ कथित शिवलिंग की पूजा करेंगे लेकिन पुलिस ने उन्हें उनके मठ से बाहर नहीं निकलने दिया.
स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि वह सिर्फ़ पूजा करने का अधिकार मांग रहे हैं, चाहे कोई भी वहां पूजा करे.
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