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पुतिन के बीमार होने की ख़बरों पर रूस के विदेश मंत्री ने ये कहा
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीमारी से जुड़ी अफ़वाहों को ख़ारिज़ किया है.
एक फ़्रेंच टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति हर रोज़ सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं और किसी समझदार आदमी को उनमें किसी बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखाई देगा.
मीडिया में ऐसी अपुष्ट रिपोर्टें चल रही रही हैं कि 70 वर्षीय पुतिन शायद बीमार हैं और संभवत: उन्हें कैंसर है.
यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में रूस को बढ़त मिलने से जुड़ी रिपोर्टों के बीच सर्गेई लावरोव ने ये इंटरव्यू दिया है.
सर्गेई लावरोव ने बताया कि पूर्वी क्षेत्र की आज़ादी रूस के लिए ऐसी प्राथमिकता है जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता है.
पुतिन प्रशासन की पुरानी दलील
लावरोव ने पुतिन प्रशासन की उसी पुरानी दलील को फिर से दोहराया कि यूक्रेन में रूस नव नाज़ीवादी हुकूमत के ख़िलाफ़ लड़ रहा है.
राष्ट्रपति पुतिन नियमित रूप से सार्वजनिक तौर पर दिखाई देते हैं, ये कहते हुए लावरोव ने फ़्रेंच टीवी को बताया, "मुझे नहीं लगता है कि किसी समझदार आदमी को उनमें किसी तरह की बीमारी या कमज़ोरी का कोई लक्षण दिखाई देगा."
रूस के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक़ उन्होंने कहा, "आप उन्हें स्क्रीन पर देख सकते हैं, उनके भाषणों को पढ़ और सुन सकते हैं."
"कोई व्यक्ति कैसा दिख रहा है, ये देखने-समझने के लिए रोज़ अवसर मिलते हैं, इसके बावजूद जो लोग ये अफ़वाह फैला रहे हैं, ये मैं उन लोगों के विवेक पर छोड़ता हूं."
मीडिया में पिछले हफ़्ते ब्रितानी खुफिया सूत्रों के हवाले से ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित हुई थीं जिनमें ये दावा किया गया था कि पुतिन गंभीर रूप से बीमार हैं.
यूक्रेन युद्ध
हालांकि इस ख़बर का एक पहलू ये भी है कि अपनी स्वस्थ जीवनशैली और खेल गतिविधियों के लिए लगाव रखने के लिए लंबे समय से जाने जाते रहे व्लादिमीर पुतिन की सेहत से जुड़ी ये अफ़वाहें बीते कुछ सालों से समय-समय पर सुर्खियां बटोरती रही हैं.
यूक्रेन युद्ध से हुए हमले में जानोमाल का कितना नुक़सान हुआ है, इस सवाल पर रूसी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि रूसी सैनिकों को ये सख़्त आदेश है कि नागरिक ठिकानों पर जहां तक संभव हो सके, हमला करने से बचा जाए.
रूस की बमबारी और हमले में बरबाद हो गए यूक्रेन के शहरी इलाकों की तस्वीरें आती रही हैं. 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमले की शुरुआत की थी.
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन पर रूसी हमले में अब तक 4,031 नागरिकों की मौत हो चुकी है और 4735 लोग घायल हो चुके हैं.
युद्ध में लड़ रहे सैनिकों में कितने हताहत हुए हैं, इसकी पक्की जानकारी उपलब्ध नहीं है. एक करोड़ 40 लाख लोग बेघर हुए हैं. बहुत से घर और शहर अब मलबे के ढेर में बदल गए हैं.
लड़ाई अभी डोनबास के इलाके में जोरों पर है. डोनेट्स्क और लुहांस्क के इलाके का ये शहर माइनिंग के लिए जाना जाता है. इन दोनों इलाकों में सक्रिय अलगाववादियों का रूस से पुराना और मजबूत रिश्ता रहा है. 2014 में ये लोग यूक्रेन से अलग हो गए थे और अब अपने वर्चस्व के लिए रूसी सैनिकों के साथ मिलकर लड़ रहे हैं.
सर्गेई लावरोव का दावा
सर्गेई लावरोव ने फ्रेंच टीवी से कहा कि डोनेट्स्क और लुहांस्क के इलाकों को जीतना रूस के लिए अभी पहली प्राथमिकता है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है. इन दोनों इलाकों को रूस स्वतंत्र राज्य के तौर पर मान्यता देता है.
हालांकि सर्गेई लावरोव ने कहा कि ये बाक़ी यूक्रेन के लोगों पर निर्भर करता है कि अगर वो ऐसी नव नाज़ीवादी सत्ता के तहत खुश हैं तो वो लौट सकते हैं. ऐसी नव नाज़ीवादी सरकार जिसने साबित किया है कि उसकी बुनियाद रूस का डर दिखाकर टिकी हुई है.
कीएव के मोर्चे से रूस के सैनिक पहले ही कदम वापस खींच चुके हैं. खारकीएव से भी रूसी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेस्की ने रविवार को खारकीएव का दौरा किया था जिसके बाद यूक्रेनी सैनिकों का मनोबल वहां मजबूत हुआ है.
खारकीएव में उन्होंने कहा कि उनके सैनिक आख़िरी सांस तक लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि रूसी सैनिकों के पास कोई मौका नहीं है. हम लड़ेंगे और हम ज़रूर जीतेंगे.
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