सऊदी अरब की शान अरामको जिसकी अमीरी में समा जाएँगे कई देश

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    • Author, दिलनवाज पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको 2.463 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप (बाज़ार पूंजी) के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई.

बुधवार को कारोबार के दौरान अरामको के शेयर का मूल्य 46.2 रियाल तक पहुंच गया जो सऊदी मुद्रा है. और इसके साथ ही उसका मार्केट कैप अमेरिका की टेक कंपनी एप्पल से भी अधिक हो गया.

एप्पल 2.461 ट्रिलियन मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है लेकिन बुधवार को अरामको ने उसे पीछे छोड़ दिया.

हालांकि बाद में अरामको के शेयर में कुछ गिरावट आई और वो फिर से एप्पल के बाद दूसरे नंबर पर आ गई.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ रहे तेल की कीमतों की वजह से अरामको लगातार मज़बूत हो रही है.

मई 2021 में कंपनी का मार्केट कैप 1.9 ट्रिलियन डॉलर था जो अब बढ़कर 2.46 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है.

कितनी बड़ी कंपनी है अरामको

अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है. इस समय पूर्ण रूप से सऊदी अरब के नियंत्रण वाली ये कंपनी 1933 में स्थापित हुई थी. तब इसमें अमेरिका की भी साझेदारी थी.

अरामको का पूरा नाम है- अरब अमेरिकन ऑयल कंपनी. 1980 में सऊदी सरकार ने अरामको की पूरी हिस्सेदारी ख़रीद ली थी और कंपनी का नाम सऊदी अरामको हो गया था.

अरामको तेल और गैस के क्षेत्र में काम करती है. इस समय कंपनी में 66 हजार 800 कर्मचारी हैं. मई 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी सालाना 229.7 अरब डॉलर की बिक्री करती है.

कैसे निर्धारित हुआ मार्केट कैप?

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वैश्विक तेल बाज़ार में बढ़ रहे दाम भी कंपनी की वैल्यू को निर्धारित कर रहे हैं. हाल के महीनों में तेल के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई है जिसका फ़ायदा भी तेल कंपनी अरामको को मिला है.

कंपनी के मार्केट कैप का आधार समझाते हुए जाने-माने ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "सऊदी अरामको का मार्केट कैप इस बात पर आधारित है कि कंपनी के पास कितना तेल और गैस है और उसके पास कितने बड़े भंडार हैं और भविष्य में और कितने भंडार हो सकते हैं. इसके अलावा अरामको जो तेल उत्पादित कर रही है और जो स्टोर करके रख रही है, इन सबसे उसका मार्केट कैप निर्धारित हो रहा है. इस सबकी क़ीमत ही कंपनी की बाज़ार पूंजी को निर्धारित कर रही है. ये बिलकुल सीधा गणित है. इसमें भविष्य में तेल के क्या दाम हो सकते हैं वो शामिल हैं. सऊदी अरामको का मार्केट कैप बिलकुल सॉलिड है क्योंकि ये उन उत्पादों पर आधारित है जो ठोस हैं, जिन्हें छूकर देखा जा सकता है. ये कहा जा सकता है कि आज जहां कंपनी खड़ी है अब उससे आगे ही बढ़ेगी."

अरामको के मार्केट कैप का गणित एप्पल जैसी टेक कंपनी से अलग है. एप्पल तकनीकी कंपनी है और उसका मार्केट कैप ब्रांड वैल्यू और कई तरह के कैलकुलेशन पर आधारित होता है. लेकिन अरामको का मार्केट कैप उसके पास मौजूद ठोस संसाधनों पर निर्भर है.

नरेंद्र तनेजा

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नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "अरामको की तुलना एप्पल जैसी तकनीकी कंपनी से करना सटीक नहीं है. एप्पल का वैल्यूएशन जिन चीज़ों पर आधारित है आप उन्हें जाकर छू नहीं सकते हैं. एप्पल जैसी कंपनी का मूल्यांकन बहुत हद तक काल्पनिक होता है क्योंकि ये अनुमान लगाया जाता है कि वो क्या उत्पाद बनाएगी और उनकी बिक्री कितनी हो सकती है. ऐसे में ये मूल्यांकन ऊपर-नीचे होता रहता है. लेकिन जहां तक तेल कंपनी, कोयला कंपनी या मेटल कंपनी के मूल्यांकन का सवाल है, वो बहुत बदलता नहीं है क्योंकि उसके संसाधनों का भौतिक आकलन किया जा सकता है."

सऊदी अरामको साल 2019 में जब आईपीओ लेकर आई थी तब उसने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. इसकी वजह समझाते हुए नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "तेल को काला सोना कहा जाता है और ये माना जा रहा है कि अगले 20-30 साल तक तेल की क़ीमत और ज़रूरत कम होने वाली नहीं हैं, ऐसे में जब सऊदी अरामको जैसी बड़ी कंपनी शेयर बेचती है तो ख़रीदने वालों की भीड़ लग जाती है."

अरामको के दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनने के क्या हैं मायने?

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सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है और अब बाज़ार पूंजी के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है. इससे तेल की क़ीमत को लेकर क्या संकेत मिलते हैं?

नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "ये मूल्यांकन इस बात को दर्शा रहा है कि अभी आने वाले समय में भी तेल की अहमियत लंबे समय तक रहने वाली है. दूसरा संकेत ये भी है कि भले ही पर्यावरण और अक्षय ऊर्ज़ा की बात हो रही हो लेकिन दुनिया की ऊर्जा ज़रूरतें तेल से ही पूरी होने वाली हैं और यही वजह है कि तेल में भरोसा बढ़ रहा है."

अरामको का मार्केट कैप बढ़ने का एक संकेत ये भी है कि निवेशक भी उस मूल्यांकन को अधिक अहमियत दे रहे हैं जिसे वो छू सकते हैं ना कि उस मूल्यांकन को जो कल्पना पर आधारित हो.

सऊदी अरामको का मूल्यांकन उसकी ब्रांड वैल्यू पर भी आधारित नहीं है बल्कि वो सीधे-सीधे इस बात पर आधारित है कि उसके पास कितना ब्लैक गोल्ड है. यही वजह है कि पारंपरिक निवेशक ऐसी कंपनी में पैसा लगाना पसंद करता है जहां वो अपने निवेश को देख पाए. इस तरह के निवेश में ख़तरा भी कम होता है.

कई देशों की अर्थव्यवस्था से बड़ी है अरामको

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सऊदी तेल कंपनी अरामको की बाज़ार पूंजी दुनिया के सबसे ताक़तवर देशों में शामिल रूस की अर्थव्यवस्था से भी बड़ी है. रूस की अर्थव्यवस्था 1.7 ट्रिलियन डॉलर की है जबकि अरामको का मार्केट कैप इस समय 2.463 ट्रिलियन डॉलर है.

नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "रूस एक सैन्य महाशक्ति है. तेल का भी बड़ा उत्पादक देश है लेकिन अकेले सऊदी अरामको का मार्केट कैप रूस की अर्थव्यवस्था से बड़ा है. यदि अरामको की तुलना पाकिस्तान की इकोनॉमी से की जाए तो पाकिस्तान की कुल जीडीपी 340 अरब डॉलर है यानि अरामको इससे लगभग आठ गुणा बड़ी है. पाकिस्तान एक इतना बड़ा देश है, परमाणु शक्ति है लेकिन दौलत की बात है तो अरामको उससे कहीं अधिक अमीर है."

यही नहीं समूचे अफ़्रीकी महाद्वीप में कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसकी अर्थव्यवस्था अरामको के मार्केट कैप से अधिक हो. इसके अलावा अगर अरामको एक अलग इकोनॉमी हो तो वह दुनिया की शीर्ष दस इकोनॉमी में शामिल हो जाएगी.

दुनिया के कई देश जो आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं जैसे ब्राज़ील और भारत या विकसित अर्थव्यवस्था फ्रांस से अरामको के मार्केट कैप से बस कुछ ही बड़े हैं. नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "भारत, ब्राज़ील, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों की अर्थव्यवस्था तीन ट्रिलियन डॉलर के आसपास है. ऐसे में देखा जाए तो अरामको इनके क़रीब पहुंच रही है. इससे ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अरामको कितनी बड़ी कंपनी बन गई है."

तनेजा अरामको के सबसे बड़ी कंपनी बनने को एक ऐतिहासिक घटना बताते हुए कहते हैं, "दुनिया की सबसे पुरानी कंपनी 1100 साल पुरानी है. कई ऐसी कंपनियां हैं जो पांच-छह सौ साल पुरानी हैं. अगर हम कंपनियों का इतिहास उठाकर देखें तो समझ में आता है कि ये कितनी बड़ी घटना है. एक कंपनी का मार्केट कैप दुनिया के अस्सी फ़ीसदी से अधिक देशों की अर्थव्यवस्था से अधिक हो गया है."

क्या है आरामको की कामयाबी की वजह

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आरामको के आगे बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण तेल और गैस की बढ़ती क़ीमते हैं. इसके अलावा विश्लेषक कंपनी की संस्कृति को भी इसकी एक वजह मानते हैं.

नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "अरामको अमेरिकी साझेदारी से बनीं थी, भले ही आज ये कंपनी पूरी तरह सऊदी स्वामित्व की हो लेकिन इसमें अमेरिकी डीएनए बरकरार है. यहां आज भी अमेरिका का कॉरपोरेट वर्क कल्चर है."

सऊदी अरब आबादी के लिहाज़ से बहुत बड़ा देश नहीं है, हालांकि क्षेत्रफल के हिसाब से सऊदी एक बड़ा देश है. सऊदी अरब की जनसंख्या क़रीब साढ़े तीन करोड़ है जो दुनिया के बड़े देशों के मुक़ाबले बहुत अधिक नहीं है. सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक तेल पर आधारित है.

सऊदी अरब को अरामको से बहुत ताक़त मिलती है. अकेले अरामको ने सऊदी को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करा दिया है. नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "जी-20 आज दुनिया का बड़ा आर्थिक ताक़तवर समूह है. सऊदी इसका सदस्य है, भारत भी इसमें हैं. सिर्फ़ तेल की वजह से सऊदी अरब इस समूह में है."

सऊदी अरब के पास सिर्फ़ तेल ही नहीं बल्कि धर्म की भी शक्ति हासिल है. मक्का-मदीना मुसलमानों के दो सबसे पवित्र स्थान हैं और दोनों ही सऊदी में हैं. तेल और धर्म की शक्ति सऊदी को मध्यपूर्व और दुनिया का अहम देश बनाती है.

नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "आज सऊदी अरब की जो दुनिया में ताक़त और साख़ है उसके पीछे बहुत बड़ी भूमिका सऊदी अरामको की है. ये कंपनी सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है."

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