पीएम मोदी के यूरोप दौरे पर वहाँ के मीडिया में क्या कहा जा रहा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय यूरोप दौरे के आख़िरी पड़ाव में बुधवार को फ्रांस पहुँचे थे. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गले लगाकर पीएम मोदी का स्वागत किया.
इससे पहले पीएम मोदी जर्मनी और डेनमार्क गए थे. तीनों देशों के मीडिया ने मोदी के दौरे को अलग-अलग तरह से कवर किया है.
जर्मन मीडिया में जहाँ मोदी के पत्रकारों से सवाल न लेने की चर्चा है तो वहीं फ्रांस के मीडिया ने यूक्रेन के मुद्दे पर खुलकर रूस की निंदा न करने के भारत के फैसले पर ज़ोर दिया है.
फ़्रांस 24 नाम की वेबसाइट ने लिखा है कि मोदी-मैक्रों ने भारत-फ्रांस संबंधों को अगले स्तर तक ले जाने के लिए यूक्रेन युद्ध के मुद्दे को किनारे किया.
"मैक्रों के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद मोदी उनसे मिलने वाले पहले विदेशी नेता"
फ्रांस 24 ने लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ऐसे विदेशी नेता हैं, जिन्होंने इमैनुएल मैक्रों के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद उनसे आमने-सामने मुलाक़ात की हो.
वेबसाइट ने ख़बर की शुरुआत में ही कहा है कि फ्रांस के विपरीत, अब भी भारत यूक्रेन युद्ध पर रूस की सार्वजनिक रूप से निंदा करने से इनकार करता है लेकिन इसके बावजूद दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति है.
'मोदी ने भारत में नहीं की एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस'
फ्रांस 24 ने मोदी के उस ट्वीट का भी ज़िक्र किया है, जो उन्होंने मैक्रों के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद किया था. इस ट्वीट में मोदी ने मैक्रों को अपना 'दोस्त' बताया था.
हालांकि, वेबसाइट ने मोदी के जर्मनी दौरे का भी ज़िक्र किया है, जहाँ उन्होंने सोमवार को चांसलर ओलाफ़ शॉल्त्स से मुलाक़ात की लेकिन द्विपक्षीय समझौतों के बाद जर्मनी के चांसलर नियमों के अनुरूप प्रेस को सवाल करने का मौक़ा नहीं दिया.
रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि साल 2014 में पीएम बनने के बाद मोदी ने भारत में एक भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं की है और जर्मनी में भी पत्रकारों के सवाल न लेने का फ़ैसला भारतीय प्रतिनिधिमंडल के आग्रह पर ही लिया गया. अख़बार ने जर्मन अधिकारियों के हवाले से ये दावा किया है.

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दावे की पुष्टि के लिए वेबसाइट ने जर्मन ब्रॉडकास्टर डायचे वेले से चीफ़ इंटरनेशनल एडिटर के उस ट्वीट का भी ज़िक्र किया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि भारत और जर्मनी के नेता प्रेस को सिर्फ़ 14 समझौतों के बारे में बताएंगे और भारत के आग्रह पर पत्रकारों को सवाल नहीं करने दिया जाएगा.
वेबसाइट ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में रूस के ख़िलाफ़ लाए प्रस्ताव पर सात बार वोटिंग से दूरी बनाने के बाद भारत की निष्पक्षता संदिग्ध है. वेबसाइट ने एक अप्रैल को रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोफ़ के भारत दौरे का भी ज़िक्र किया है.
सिप्री (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) के आंकड़ों के हवाले से वेबसाइट ने ये भी लिखा है कि रूस हथियारों की आपूर्ति के लिए भारत का सबसे बड़ा साझीदार है और भारत के पास मौजूदा हथियार प्रणाली में से 80 फ़ीसदी रूस से ही आयातित हैं.
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एक अन्य लेख में फ़्रांस 24 वेबसाइट ने यूक्रेन को लेकर भारत और फ्रांस के बयान का ज़िक्र किया है. दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में यूक्रेन में मानवीय संकट पर चिंता ज़ाहिर करते हुए तत्काल युद्ध रोकने की मांग की है.
वेबसाइट ने ये भी कहा कि सिर्फ़ फ्रांस ने ही 'रूसी सेना' के यूक्रेन में अवैध और अनुचित हमले की निंदा की है.
वेबसाइट ने ये भी उल्लेख किया है कि साल 2017 से लेकर अब तक मोदी ने तीन बार फ्रांस का दौरा किया है. वहीं, मैक्रों साल 2018 में भारत आए थे.
भारत ने फ्रांस से रफ़ाल लड़ाकू विमान और छह पनडुब्बियां ख़रीदी हैं.

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इमैनुएल मैक्रों ने ट्वीट करके बताया है कि उन्होंने पीएम मोदी के साथ अंतरराष्ट्रीय संकट और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की है. इसके अलावा दोनों देशों के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई है.
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जर्मन मीडिया मोदी से नहीं है ख़ुश?
यूरोप के तीन दिवसीय दौरे में पीएम मोदी सबसे पहले जर्मनी पहुंचे थे. हालांकि, यहां के मीडिया में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के साथ ही पीएम मोदी को लेकर आलोचना भी हो रही है.
दरअसल, द्विपक्षीय वार्ता के बाद जर्मन चांसलर के कार्यालय के नियमों के मुताबिक़ दोनों देशों के नेताओं को प्रेस के सवाल लेने थे. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.
जर्मन ब्रॉडकास्टर डॉयचे वेले ने बताया है कि जर्मनी भारत के साथ सहयोग में आने वाले वर्षों में 10 अरब यूरो देने का वादा किया है.
डॉयचे वेले ने लिखा है कि जर्मन चांसलर ने यूक्रेन संकट पर टिप्पणी करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से युद्ध पर विराम लगाने की मांग की है.
डीडब्ल्यू के अनुसार, शॉल्त्स ने कहा, "ये युद्ध बंद कीजिए, ये हत्याएं रोकिए, अपने सैनिक वापस बुलाइए."
डीडब्ल्यू ने के अनुसार, मोदी के आग्रह पर दोनों देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी करने के बाद पत्रकारों के सवाल नहीं लिए.
डीडब्ल्यू के चीफ़ इंटरनेशनल एडिटर रिचर्ड वॉकर ने भी इस संबंध में एक ट्वीट किया है, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर ख़ूब हो रही है.
डीडब्ल्यू ने भी भारत की सैन्य आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भरता का ज़िक्र किया है. वहीं, मार्च के बाद भारत के रूस से तेल आयात बढ़ाने को भी लेख में शामिल किया गया है.
डेनमार्क दौरे से मज़बूत हुए भारत संग रिश्ते

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पीएम मोदी के दौरे को डेनमार्क के मीडिया ने दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत बनाने की दिशा में अहम क़दम बताया है.
इस दौरान डेनमार्क की पीएम मैट फ़्रेडरिक्सन के साथ मोदी ने यूक्रेन संकट पर भी चर्चा की. डेनमार्क ने पीएम मोदी से ये भी अपील की कि भारत अपने प्रभाव का इस्तेमाल रूस पर युद्ध को रोकने के लिए दबाव बनाने के लिए करे. ये मोदी का पहला डेनमार्क दौरा था.
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