पुतिन के यूक्रेन युद्ध को इन चार बिंदुओं से समझिए

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को यूक्रेन में 'विशेष सैन्य कार्रवाई' का एलान किया. पुतिन के इस एलान ने किसी को ज्यादा हैरान तो नहीं किया, लेकिन यूरोप में युद्ध की आशंका ने पूरी दुनिया के माथे पर चिंता की लकीरें जरूर खींच दीं.
इससे पहले सोमवार को ही रूसी राष्ट्रपति ने यू्क्रेन के अलगाववादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहान्स्क को स्वतंत्र रूप से मान्यता देने की घोषणा भी की थी.
गुरुवार को पुतिन के ऐलान के बाद ही यूक्रेन के कई शहरों में धमाके सुने गए. रूस के राष्ट्रपति लगातार यह कह रहे हैं कि उनकी कोई भी योजना पड़ोसी मुल्क पर कब्जे की नहीं है. लेकिन उनके इस कदम से यूरोप में एक जंग का खतरा पैदा हो गया है. अधर,अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस को अंजाम भुगतने की धमकी दी है.
ऐसा नहीं है कि यूक्रेन में रूस की तरफ से सैन्य कार्रवाई कार्रवाई का ऐलान अचानक ही हो गया हो. इसकी वजह समझने के लिए हमें 2014 में चलना होगा.
इस पूरे विवाद में पिछले अब तक क्या-क्या हुआ और यह कैसे इतना बढ़ गया, आइए यह समझने की कोशिश करते हैं.
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1. पुतिन ने 'विशेष सैन्य कार्रवाई' करते वक्त क्या कहा?

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में 'विशेष सैन्य कार्रवाई' की बात कही.
टेलिविजन पर पुतिन ने उस वक्त कार्रवाई का ऐलान किया जब रूस को यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई से रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक चल रही थी.
पुतिन ने अपने भाषण में कहा कि इस ऑपरेशन को यूक्रेन में 'सैन्यीकरण और नाज़ीकरण' खत्म करने के लिए शुरू किया जा रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि 'विशेष सैन्य कार्रवाई' का यह फैसला रूस समर्थित अलगाववादी इलाकों की ओर से मदद की गुहार के बाद लिया गया है. हालांकि पश्चिमी देश इस तरह के संभावित हमले की आशंका पिछले कई हफ्तों से जता रहे थे.
रूसी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा, ''मैंने विशेष सैन्य कार्रवाई को लेकर फैसला ले लिया है. इसका उद्देश्य पिछले आठ सालों से कीएफ़ के द्वारा उत्पीड़न और जनसंहार का सामना कर रहे लोगों की रक्षा करना है.''
हालांकि अपने इस बयान के समर्थन में उन्होंने कोई भी सबूत पेश नहीं किए.
पुतिन ने यूक्रेनी सैनिकों से हथियार डालने की अपील भी की. उन्होंने कहा, ''यूक्रेनी सेना के सभी सदस्यों को इन मांगों को मानने के बाद युद्ध क्षेत्र छोड़कर जाने दिया जाएगा.''
उन्होंने यूक्रेन का समर्थन कर रहे अमेरिका जैसे देशों को चेतावनी भी दी.
पुतिन ने कहा, ''किसी ने भी इसमें अगर हस्तक्षेप या कुछ और करने की कोशिश की, जिससे हमारे देश के लिए खतरा पैदा हो तो रूस इसपर तुरंत प्रतिक्रिया देगा. इसका अंजाम ऐसा होगा, जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ, हम किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार हैं.''
2. यूक्रेन की क्या रही प्रतिक्रिया?

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यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबाने पुतिन के ऐलान के कुछ देर बाद ही जानकारी दी कि यूक्रेन के कई शहरों पर हमले हुए हैं.
उन्होने कहा, ''पुतिन ने हमला शुरू कर दिया है. यह आक्रामता वाला युद्ध है. यूक्रेन अपनी रक्षा करेगा और जीतेगा. दुनिया को पुतिन को रोकना होगा.''
गुरुवार की सुबह ही यूक्रेन ने रूस के साथ राजनियक रिश्ते खत्म करने का ऐलान किया.
पुतिन की घोषणा के थोड़ी देर बाद ही यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने टीवी पर इमोशनल भाषण दिया.
उन्होंने पहले यूक्रेनी में बात करते हुए आगाह किया, ''रूसी हमले का मतलब है यूरोप महाद्वीप में एक बड़े युद्ध की शुरुआत.''
अपने भाषण के अगले हिस्से में यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूसी भाषा में पड़ोसी मुल्क की जनता से इस हमले को स्वीकार नहीं करने की अपील की और कहा कि उनसे यूक्रेन को लेकर झूठ कहा जा रहा है.
बीबीसी की पूर्वी यूरोप में रिपोर्टर सारा रेन्सफोर्ड के अनुसार ज़ेलेंस्की ने कहा , ''वो कहते हैं कि यह आग (युद्ध की) यूक्रेन के लोगों को आजाद कर देगी, लेकिन यूक्रेन के लोग तो आजाद हैं.''
जेलेंस्की ने आगे जोर देकर दावा किया कि उनका देश रूस के हमले के लिए तैयार है. उन्होंने चेतवानी भरे लहजे में कहा, ''हमें किस युद्ध की जरूरत नहीं है. ना शीत युद्ध, ना ग्रीष्म, ना ही हाइब्रिड, लेकिन अगर सैनिक हमला करते हैं और वे हमारा देश, हमारी आजादी, हमारा या हमारे बच्चों की जिंदगी छिनना चाहेंगे तो हम अपनी रक्षा करेंगे. अगर वे हमपर हमला करते है तो हम उनका सीधा सामना करेंगे, पीठ नहीं दिखाएंगे.''
3. रूस ने यूक्रेन पर हमले की क्या वजह बताई?

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सोमवार को ही पुतिन ने यूक्रेन के 2 अलगाववादी इलाकों को मान्यता देने का ऐलान किया था. इन इलाकों को रूस का पहले से समर्थन प्राप्त है.
तब जानकारों ने इसे सैन्य कार्रवाई से पहले का कदम माना था. इसके बाद बुधवार को ही रूस सर्मथित इन अलगाववादी इलाकों ने पुतिन से सैनिक भेजने की मांग की थी.
पुतिन यूक्रेन को लेकर जो तर्क देते हैं उसमें ऐतिहासिक कारणों और सुरक्षा का हवाला दिया जाता है.
सोमवार को उन्होंने यहां तक कह दिया कि यूक्रेन कभी एक वास्तविक देश था ही नहीं, उन्होंने यूक्रेनी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए.
अपने ऐलान के तुरंत बाद उसी दिन पुतिन ने दोनों अलगाववादी क्षेत्रों में 'शांति स्थापित' करने के लिए सेना भेजने के आदेश पर भी हस्ताक्षर किए.
उन्होंने अपने भाषण में कहा, ''मैं एकबार फिर जोर देकर कहता हूं कि यूक्रेन हमारे लिए केवल एक पड़ोसी देश नहीं है. यह हमारे इतिहास, हमारी संस्कृति और अध्यात्मिक स्थान का अहम हिस्सा है.''
रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन की सरकार पर अमेरिका की 'कठपुतली' होने का आरोप लगाया. उन्होंने बिना किसी आधार के यह भी आरोप लगाया कि यूक्रेनी नागरिकों के साथ उनके नेता दरिंदगी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि रूस का यह पड़ोसी मुल्क परमाणु हथियार भी हासिल कर सकता है, इसलिए यह रूस के लिए एक खतरा है.
अपने भाषण में पुतिन ने यूक्रेन के नेटो में शामिल होने के खतरे को फिर से दोहराया और कहा कि अगर पड़ोसी मुल्क नेटो का हिस्सा बनता है तो रूस पर हमले का खतरा बना रहेगा.
उन्होंने बिना का किसी ठोस सबूत के यह दावा किया कि यूक्रेन में रूसी भाषा बोलने वालों का 'जनसंहार 'किया जा रहा है.
4. रूस-यूक्रेन विवाद आखिर क्यों इतना आगे बढ़ गया ?

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इस विवाद की जड़ें 2014 से जुड़ी हैं, जब रूस ने क्राइमिया पर कब्जा कर पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादियों को समर्थन देना शुरू किया.
यूक्रेन के अलगाववादी गुटों ने 'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ दोनेत्स्क और लुहान्स्क' का गठन किया.
दोनों देशों के बीच इस विवाद में अब तक करीब 14 हजार लोगों की मौत हो चुकी है.
18, फरवरी को बीबीसी की यूक्रेनी सर्विस ने खबर दी थी कि इस इलाके में हाल के सालों की सबसे भारी गोलीबारी देखी गई.
'इंटरनैशनल मॉनिटर्स फ्रॉम ऑर्गेनाइजेशन फॉर सिक्यॉरिटी ऐंड कोऑपरेशन इन यूरोप' की रिपोर्ट के अनुसार 17 से 18 फरवरी के बीच बीच सीजफायर उल्लंघन के सैकड़ों मामले सामने आए हैं.

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