मुकेश अंबानी की नज़र ब्रिटेन की बड़ी फ़ार्मेसी कंपनी 'बूट्स' पर

बूट्स

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    • Author, पीटर होस्किन्स और एनाबेले लिआंग
    • पदनाम, बीबीसी संवादादाता

मुकेश अंबानी यूके की हाई स्ट्रीट चेन बूट्स के अधिग्रहण की योजना बना रहे हैं. मुकेश रिलायंस इंडस्ट्रीज के सबसे बड़े शेयरधारक और अध्यक्ष हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज खुदरा से लेकर ऊर्जा तक के सेक्टर में बड़ा नाम है.

रिलायंस अमेरिका की कंपनी अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के साथ संभावित खरीद की बोली पर काम कर रही है.

इस साल की शुरुआत में, वॉलग्रीन्स बूट्स एलायंस ने बूट्स बिजनेस की समीक्षा की घोषणा की और कथित तौर पर कंपनी को ब्रिकी की बात कही.

इस सौदे से बूट्स का भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य पूर्व में बूट्स का विस्तार होगा और साथ ही यूके में कारोबार बढ़ेगा.

योजना के मुताबिक रियायंस और अपोलो की बूट्स में हिस्सेदारी होगी, हालांकि ये अभी साफ नहीं कि इस बिज़नेस में बराबर के पार्टनर होंगे या नहीं.

बूट्स की यूके में 2,200 से ज्यादा फार्मेसी, स्वास्थ्य और ब्यूटी स्टोर हैं. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार इसकी कीमत 7.5 अरब डॉलर तक हो सकती है. फाइनेंशियल टाइम्स ने ही सबसे पहले इस खबर की जानकारी दी थी.

वॉलग्रीन्स बूट्स एलायंस ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जबकि रिलायंस से अब तक बीबीसी को कोई जवाब नहीं आया है.

कौन हैं मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी

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मुकेश अंबानी दुनिया के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति हैं. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार 65 साल के मुकेश अंबानी एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं, जिनकी अनुमानित कुल संपत्ति 100 अरब डॉलर से अधिक है.

मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी टेक्सटाइल निर्माता थे जो बाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज बन गई.

रिलायंस इंडस्ट्री भारत के सबसे बड़े समूहों में से एक है. जो पेट्रोकेमिकल्स, तेल और गैस, दूरसंचार और खुदरा सहित दूसरे कई बिजनेस कर रही हैं.

वर्तमान में मुकेश अंबानी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है. अंबानी परिवार के पास पहले से ही यूके में करोड़ों पाउंड की संपत्ति है.

साल 2019 में रिलायंस ब्रांड्स लिमिटेड ने खिलौना बेचने वाली हैमलेस को खरीदा था. ये डील कितने में हुई इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई.

पिछले साल, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ऐतिहासिक ब्रिटिश कंट्री क्लब स्टोक पार्क को 5 करोड़ 70 लाख पाउंड में खरीदा था.

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173 साल पुराने बूट्स के बिज़नेस का भविष्य महीनों से सवालों के घेरे में है.

जनवरी में अमेरिका के रहने वाले इसके मालिक वॉलग्रीन्स बूट्स एलायंस ने कहा था, ''उसने अपनी इसकी समीक्षा अपनी प्राथमिकताओं और रणनीतिक दिशा को देखते हुए शुरू की है. जिसमें अमेरिका में हेल्थकेयर पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना शामिल है''

कंपनी ने कहा था, "बूट्स के भविष्य और सभी हितधारकों के लिए सही निर्णय लेने के बाद, आगे की घोषणाएं उचित समय पर की जाएगी."

ब्रिटेन के सुपरमार्केट समूह ऐस्डा के मालिक भाइयों मोहसिन और जुबेर इस्सा के साथ निजी इक्विटी फर्म टीडीआर कैपिटल ने भी कथित तौर पर बूट्स के लिए शुरुआती बोली लगाई है.

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रिटेल बिजनेस में अंबानी की महत्वाकांक्षाएं

अरुणोदय मुखर्जी, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

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मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस क्षेत्र में एक दिग्गज के रूप में पेश करके रिटेल बिज़नेस में खुद को फैला रहे हैं.

अंबानी की रिटेल बिज़नेस में महत्वाकांक्षाएं लक्जरी फैशन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और किराने के सामान तक सभी कैटेगरी में हैं.

कंपनी पूरे भारत में 12 हजार से अधिक स्टोर के साथ सबसे तेज़ी से बढ़ते और सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाले रिटेल बिज़नेस को चलाने का काम करती है.

मुकेश अंबानी वॉलमार्ट के फ्लिपकार्ट और अमेजन से लड़ने के लिए भी अपनी ई-कॉमर्स को बढ़ाने के लिए निवेश में बढ़ोतरी कर रहे हैं.

सितंबर 2020 में रिलायंस रिटेल में करीब 3.5 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ था. इसमें कुछ सबसे बड़े इंवेस्टमेंट गूगल और फेसबुक से आई, जिसने अंबानी को अपने दूरसंचार और ऑनलाइन रिटेल बिजनेस को आपस में मिलाने में मदद मिली.

मुकेश अंबानी की महत्वाकांक्षाएं भारत तक ही सीमित नहीं हैं क्योंकि उनकी नजर दुनिया भर के कारोबार पर है, जैसे साल 2019 में उन्होंने नामी खिलौने की दुकान हैमलेस को खरीदा था.

विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस फार्मेसी और वेलनेस सेक्टर में पकड़ नहीं है. बूट्स के साथ मिलकर अंबानी इसी पकड़ को मजबूत करना चाहते हैं.

भारत ने हाल ही में ऑनलाइन फार्मेसी खुदरा विक्रेताओं में वृद्धि देखी है और ये संभावित सौदा रिलायंस की पकड़ को इस क्षेत्र में तेजी पूरा करने का काम करेगा.

लेकिन वॉलमार्ट और अमेजन जैसे बड़े ऑनलाइन खुदरा विक्रेता सब कुछ बेचते हैं. यहां विक्रेताओं ने यहां ग्राहकों को हर कैटेगरी में सामान उपबल्ध करवाया है जिसके लिए उन्होंने बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में पैर जमाने के लिए संघर्ष किया है.

ये देखना भी दिलचस्प होगा कि रिलायंस विदेश में फार्मेसी और वेलनेस बिज़नेस में खुद को कैसे रखती है.

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