जियोफ़ोन नेक्स्ट और अरामको के साथ डील पर क्या बोले मुकेश अंबानी?

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- Author, आलोक जोशी
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत को न सिर्फ़ टू जी मुक्त करना है बल्कि फ़ाइव जी युक्त बनाना है - इस बार की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की सालाना जनरल मीटिंग में रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने यह नया नारा दिया है.
अंबानी ने एजीएम में यह ऐलान भी किया कि गूगल के साथ मिलकर बनाया गया नया फ़ाइव जी स्मार्टफ़ोन 10 सितंबर गणेश चतुर्थी को ग्राहकों के हाथ में आ जाएगा.
हालांकि जियोफ़ोन नेक्स्ट नाम के इस फ़ोन का दाम नहीं बताया गया है लेकिन फ़ीचर्स के बारे में काफ़ी कुछ बताया गया है. फिर भी तस्वीर देखने के बाद जानकारों की टिप्पणी है कि फ़ोन काफ़ी सस्ता होने की उम्मीद है, क्योंकि डिज़ाइन कुछ पुराना-सा लग रहा है. कंपनी ने कहा भी है कि यह सिर्फ़ भारत का ही नहीं अपनी तरह का दुनिया में सबसे सस्ता स्मार्टफ़ोन होगा.
फ़ोन तो जब सामने आएगा तब उससे जुड़े बाक़ी सवालों के जवाब मिलेंगे और नए सवाल भी उठेंगे. यूं भी अगले कुछ दिन यह फ़ोन ख़बरों में छाया रहेगा, इसे हासिल करने और दिखाने की भी होड़ लगेगी और इसके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा ख़बरें खोदकर निकालने की भी.
लेकिन रिलायंस के फ़ाइव जी कारोबार में गूगल के साथ यह साझीदारी बड़ी भूमिका निभाएगी.
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अंबानी ने कहा भी कि गूगल क्लाउड की आधुनिक टेक्नोलॉजी से रिलायंस को न सिर्फ़ फ़ाइव जी नेटवर्क में बल्कि रिलायंस के अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
रिलायंस रिटेल और जियो मार्ट के साथ ही यह जियो सावन और जियो हेल्थ या दूसरे डिजिटल बिज़नेस को भी नया दम दे सकती है.
एजीएम से पहले जो उम्मीदें जताई जा रही थीं या जिन सवालों के जवाब चाहिए थे, कमोबेश उन सभी के जवाब मुकेश अंबानी के भाषण में मिल गए.
- ये भी पढ़ें- रिलायंस लाएगा सस्ता स्मार्टफ़ोन, गूगल से मिलाया हाथ

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मुकेश अंबानी ने ये भी घोषणा की कि सऊदी अरामको के चेयरमैन यासिर अल-रुमाय्यन अब रिलायंस के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर होंगे.
इसके साथ ही कंपनी के पेट्रोलियम और केमिकल कारोबार के भविष्य पर चिंताएं कम करने का इंतज़ाम भी हो रहा है. मुकेश अंबानी ने सौर ऊर्जा, सतत ऊर्जा या रिन्यूएबल एनर्जी और न्यू मैटीरियल्स कारोबार में भारी भरकम निवेश की योजनाओं का एलान कर दिया है.
साथ ही यह भी कहा है कि वो अपने लीगेसी बिज़नेस यानी पेट्रोलियम गैस और पेट्रोकेमिकल के पुराने कारोबार को नई दुनिया के कारोबार में बदलने का इंतज़ाम करेंगे. यही नहीं उन्होंने कहा कि जिस जामनगर में अब तक का कारोबार फलाफूला है, उसी जामनगर से कंपनी का न्यू एनर्जी बिज़नेस भी चलेगा.
हालांकि आज बाज़ार में रिलायंस के शेयरों की चाल से लगता है कि बाज़ार को इस भाषण में ख़ास मज़ा नहीं आया.
दो बजे भाषण शुरू होने के ठीक पहले शेयरों में कुछ तेज़ी दिखी थी, लेकिन उसके बाद यह धीरे-धीरे फिसलता ही गया. इसकी वजह शायद यही हो सकती है कि जितना कुछ कहा गया उसका अंदाज़ा बाज़ार को पहले से ही था. यानी उम्मीद से बढ़कर कुछ नहीं आया.
लेकिन अगर पिछले एक साल का हिसाब देखें तो पता चलेगा कि रिलायंस के ज़्यादातर बड़े ऐलान अब एजीएम में नहीं बल्कि उसके बाहर होते हैं.
गुरुवार को मुकेश अंबानी ने जोड़कर बताया कि कंपनी ने कुल मिलाकर साल भर में क़रीब सवा तीन लाख करोड़ रुपए की पूंजी जुटाई है. यह सारा काम पिछली एजीएम के बाद ही हुआ है और इसका ऐलान भी अलग अलग ही हुआ.
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इस नज़र से देखें तो गूगल, फ़ेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट के साथ रिलायंस की साझेदारी को आगे बढ़ाने वाले ऐलान और देशभर में एक करोड़ से ज़्यादा दुकानदारों के साथ साझेदारी और नए कारोबारों में पैसा लगाने के ऐलान पर नज़र रखनी होगी.
कंपनी ने पिछली बार जो चार ग्रोथ इंजन बताए थे, वो चार अलग-अलग कंपनियां कब बनेंगी इसका जवाब तो सामने आया नहीं है लेकिन अब दो और नए कारोबार पनपते दिख रहे हैं. इसमें से एक है दुनिया भर में दूसरों के लिए भीमकाय आकार के सोलर एनर्जी प्लांट लगाने का कारोबार और दूसरा ऐसे कारोबारों के लिए पैसा जुटाने और फ़ाइनेंस करने का काम है.
इनका पूरा ब्योरा भी सामने आना बाक़ी है, लेकिन साफ़ है कि रिलायंस की नज़र अब दुनिया के कारोबार पर है और मुकेश अंबानी ने रिलायंस के इंटरनेशनलाइज़ेशन या वैश्वीकरण की तरफ़ साफ़ साफ इशारा भी कर दिया है.
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एक और बड़ी बात यह है कि जो कंपनी पॉलिएस्टर के कपड़े बेचने के कारोबार से आगे बढ़कर पेट्रोलियम रिफ़ाइनरी और गैस क्रैकर जैसे कारोबार में पहुँच गई थी यानी आम आदमी से पूरी तरह दूर हो चुकी थी, अब रिलायंस रिटेल और जियो जैसे कारोबारों ने उसे फिर से एक बड़ी कंज्यूमर कंपनी बना दिया है.
चेयरमैन के भाषण में इस बात पर ख़ासा ज़ोर था कि वो इस सिलसिले को और तेज़ करना चाहते हैं.
मोटे-मोटे ऐलान भी सामने हैं और उनपर शेयर बाज़ार की ठंढी प्रतिक्रिया भी.
लेकिन आज के भाषण में शुरू के सैंतीस मिनट से ज़्यादा का समय कंपनी के कारोबार की बजाय कोरोना संकट, महामारी से मुक़ाबले में रिलायंस और उसके कर्मचारियों की भूमिका पर दिया गया.
अपने कारोबार से पहले समाज के सामने खड़े संकट और वर्क फ्रॉम होम, स्टडी फ्रॉम होम, ऑक्सीजन, अस्पताल, अन्न सेवा, और मिशन इंप्लाई केयर पर इतना समय देकर मुकेश अंबानी क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं यह भी सोचना चाहिए.
और फिर आज के भाषण में जो कारोबारी ऐलान हुए हैं उनकी परतें खोलकर उनके विश्लेषण की कोशिश अभी लंबी चलेगी. और कंपनी भी अभी क्या-क्या और सामने लाती है कहना आसान नहीं है.
इसीलिए यह कहना पड़ेगा कि भाषण भले ही ख़त्म हो गया हो, पिक्चर अभी बाक़ी है.
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