रूस-यूक्रेन के बीच आसमान में घमासान, किसके हाथ लगेगी बाज़ी?

- Author, जोनाथन बिएल
- पदनाम, बीबीसी रक्षा संवाददाता, डोनबास, यूक्रेन से
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में अब तक पूरा ध्यान जमीनी लड़ाई पर रहा है.
लेकिन अब आसमान में चल रही लड़ाई की अहमियत भी काफी बढ़ गई है. दोनों के बीच अब यहां बाजी जीतने की होड़ है.
यूक्रेनी वायुसेना के एक अफसर ने बीबीसी को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया है कि कैसे यूक्रेन के आसमान पर कब्जे की लड़ाई चल रही है.
कैप्टन वेसिल करवाचुक के चेहरे पर हमेशा एक मुस्कुराहट बनी रहती है.
यह आपको अचरज में डाल सकता है क्योंकि पिछले 50 दिनों से चली आ रही जंग में लड़ रहे किसी सैनिक से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती.
करवाचुक किसी गुमनाम सैन्य ठिकाने पर मौजूद हैं और वहीं से उन्होंने हमसे वीडियो लिंक के जरिये बात की.
वह जानते हैं कि आने वाले कुछ हफ्तों के दौरान फुर्सत नहीं मिलने वाली नहीं है.
कीएव पर कब्जा करने की कोशिश में भले ही रूस को मात खानी पड़ी हो लेकिन पूर्वी यूक्रेन के डोनबास में उसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है.
हालांकि लड़ाई के अगले दौर में निप्रो (यूक्रेन का चौथा बड़ा शहर) के एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल ब्रिगेड के यूक्रेनी महिला और पुरुष सैनिकों पर काफी दारोमदार होगा.
रूसी हमले से यूक्रेन के आसमान की हिफाजत पिछले कुछ वक्त से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है.
यूक्रेनी वायुसेना के एक दूसरे अफसर ने कहा कि यह कुछ ऐसा ही जैसे आप ऐसी बड़ी मक्खीमार का इस्तेमाल कर रहे हों, जिसमें बड़े-बड़े छेद हों.
कैप्टन करवाचुक साफ कहते हैं, "आप पूरे एयरस्पेस को कवर नहीं कर सकते."
असल में आर्मी बेस में बैठ कर हमसे उनकी बातचीत भी कम अहम नहीं है.
खास कर वैसे हालात में जब जंग के शुरुआती दिनों में ही यूक्रेनी वायुसेना के कई अड्डे पूरी तरह या आंशिक तौर पर ध्वस्त हो गए थे.

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रूस को बढ़त लेकिन यूक्रेनी सेना भी दे रही टक्कर
यूक्रेनी सेना ने माना है कि जंग के शुरुआती दिनों में उसे खासा नुकसान हुआ है. सार्वजनिक तौर पर यूक्रेन का ऐसा स्वीकार करना दुर्लभ है,
लेकिन इसके बावजूद यूक्रेनी वायुसेना के अड्डे अब भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं.
ओरिक्स युद्ध में हुए नुकसान को ट्रैक करने के लिए विजुअल माध्यम का सहारा लेते हैं.
उनका कहना है कि यूक्रेन ने 82 रूसी विमानों को नष्ट कर दिया है उन्हें नुकसान पहुंचाया है या फिर उन्हें कब्जे में ले लिया है. इनमें लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन शामिल हैं.
यूक्रेन के भी 33 विमान ध्वस्त हुए हैं.
यूक्रेनी सेना की इस सफलता ने उन सैन्य विशेषज्ञों को भ्रम में डाल दिया है, जिन्होंने कहा था कि रूसी सैनिक जल्द ही यूक्रेनी वायुसेना को दबा देगी.
आसमान में हो रही लड़ाई में रूसी सेना पहले ही काफी बढ़त की स्थिति में है. उसने यूक्रेनी सेना से तीन गुना ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात कर रखे हैं.
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन का कहना है कि रूसी विमान 250 से अधिक मिलिट्री मिशन चला चुके हैं. हर दिन वे 30 हवाई हमले करते हैं.
हालांकि पश्चिमी देशों के अधिकारियों का कहना है कि रूस को अभी भी आसमान में अपने वर्चस्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
दूसरी ओर, यूक्रेनी वायुसेना अपने पुराने मिग-29 लड़ाकू विमानों से रूसी सेना को टक्कर देने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है. वह हर दिन लगभग दस मिलिट्री मिशन पूरे कर रही है.
यूक्रेन को पता है कि रूस को आसमान में बढ़त हासिल है.
यही वजह है कि वह पश्चिमी देशों से यूक्रेन के आसमान को बंद करने की अपील करता रहा है. यूक्रेन कई बार अपने यहां नो फ्लाई जोन बनाने की मांग कर चुका है.

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मिसाइलों पर दारोमदार
लेकिन डोनबास में रूस के जिस नए हमले की आशंका जताई जा रही है, वह यूक्रेन के लिए और अधिक कड़ी चुनौती साबित हो सकता है.
रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट में एयरपावर के सीनियर रिसर्च फेलो जस्टिन ब्रोंक कहते हैं कि पूर्वी इलाके के एयर स्पेस में रूस को ज्यादा आजादी मिली हुई दिख रही है.
यहां उसे बाकी इलाकों से ज्यादा बढ़त इसलिए हासिल है क्योंकि इससे सटे वायु क्षेत्रों पर उसका कब्जा है.
अगर यूक्रेन इस इलाके में लड़ाई जीतना चाहता है उसे लंबी, मध्यम और छोटी तीनों दूरियों की मिसाइलों की जरूरत होगी. इस रणनीति को 'लेयर्ड डिफेंस' कहा जाता है.
पश्चिमी देश इस वक्त यूक्रेन को छोटी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दे रहे हैं. सिर्फ अमेरिका ने ही उसे 2000 स्टिंगर दिए हैं.
ब्रिटेन ने भी उसे काफी स्टारस्ट्रीक हाई वेलोसिटी मिसाइलें दी हैं.
लेकिन कैप्टन करवाचुक का कहना है कि उनका देश कंधों से दागी जाने वाली मिसाइलों का आभारी है. इन्हें मैनपैड कहा जाता है. अग्रिम मोर्चे पर यही मिसाइलें प्रभावी रही हैं.
मैनपैड नीचे उड़ान भरने वाले रूसी विमानों के खिलाफ काफी कारगर साबित हुए हैं. रूस ज्यादातर लंबी रेंज की क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल कर रहा है.
कैप्टन करवाचुक कहते हैं, '' हमारे पास मध्यम और लंबी रेंज के एयर डिफेंस सिस्टम की कमी है. हमारे पास ये पर्याप्त संख्या में नहीं हैं.
फिलहाल रूस की ओर से डोनबास में नए सिरे से हमले की तैयारियों ने यूक्रेन की सीमित हवाई ताकत पर और दबाव डाल दिया है.

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हालांकि जंग अब पूरी तरह यूक्रेन के पूर्वी इलाके में केंद्रित हो गया है. लेकिन देश के दूसरे हिस्सों को भी सुरक्षा की जरूरत है.
जमीन पर यूक्रेन हाल के दिनों में पूर्वी इलाकों में अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम भेजता दिख रहा है.
लेकिन उसके लिए सिर्फ डोनबास में ही अपने पूरे एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किए रखना संभव नहीं हो सकता.
कैप्टन करवाचुक कहते हैं, "हम आधे यूक्रेन को बगैर सुरक्षा को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते."
आसमान में जो भारी पड़ेगा वही जीतेगा जंग
यूक्रेन अपने एयर डिफेंस का इस्तेमाल सिर्फ रूसी विमानों को निशाना बनाने के लिए ही नहीं कर रहा है बल्कि वह उसके क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है. यूक्रेनी सेना को कुछ सफलता मिली है लेकिन वे हर चीज को ध्वस्त नहीं कर सकते.
कैप्टन करवाचुक का आकलन है कि उनकी यूनिट रूस की लंबी दूरी की 50 से 70 फीसदी मिसाइलों को नष्ट कर रही है.
उदाहरण के तौर पर वह कहते हैं कि रूस ने निप्रो के आसपास छह मिसाइलें दागी थीं. लेकिन यूक्रेनी सेना ने इनमें से चार मिसाइलों को रोक दिया था.
इसका मतलब यह है कि अब भी अच्छी-खासी संख्या में रूसी मिसाइलों को अंदर हमले करने में कामयाबी मिल रही है.
पेंटागन का कहना है कि रूसी सेना जंग शुरू होने से अब तक 1550 मिसाइलें दाग चुकी है.
रूस का कहना है कि वह हाइपरसोनिक मिसाइलें भी इस्तेमाल कर रहा है.
यूक्रेनी सेना ऐसे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकती क्योंकि ये मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना तेजी से मार करती हैं.
लेकिन कड़वा सच तो यही है कि बगैर अहम मदद के यूक्रेन के लिए लंबे समय तक रूस के हवाई और मिसाइल हमलों का सामना करना मुश्किल होगा.
पश्चिमी देशों के एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि यूक्रेन अभी जिन हथियारों की मांग कर रहा है, उनमें लंबी और मिड रेंज की मिसाइलें की सूची सबसे ऊपर है.
उन्होंने कहा, '' यूक्रेन एयर डिफेंस के लिए हथियारों पर काफी जोर दे रहा है. उन्हें बड़ी तादाद में इनकी जरूरत है. ''
कैप्टन करवाचुक ने हमसे कहा, '' पिछले युद्धों को देखें तो यह साफ है कि आसमान में जिसका वर्चस्व होगा वही युद्ध जीतेगा. ''
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