सऊदी अरब: रेगिस्तान में नखलिस्तान बनाने की निओम परियोजना पर विवाद क्यों है?

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- Author, मर्लिन थॉमस और विवेक वेनेमा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अंधेरे में चमकते समुद्र तट. रेगिस्तान से भरे शहर में अरबों की तादाद में पेड़. हवा में उड़ती ट्रेनें. नकली चांद. साथ ही कारों और कार्बन से मुक्त शहर, जो रेगिस्तान में एक सीधी रेखा में 170 किलोमीटर लंबा बसा है.
यह सब निओम शहर में होगा. नियोम फ्यूचरिस्टक इको शहर होगा, जो सऊदी अरब के पर्यावरण लक्ष्य के हिसाब से बनाया जाएगा.
इसके विज्ञापन में इसे आने वाले कल का आदर्श शहर कहा जा रहा है. ऐसा शहर, जहां मानवता धरती के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर आगे बढ़ेगी.
निओम शहर 500 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट है. यह सऊदी अरब के उस विजन 2030 का हिस्सा है, जिसमें उसकी अर्थव्यवस्था का दारोमदार तेल खनन से हटाने का फैसला किया है.
निओम का पूरा क्षेत्रफल 26,500 वर्ग किलोमीटर का होगा. निओम के डेवलपर दावा कर रहे हैं इसक क्षेत्रफल कुवैत या इसराइल से भी बड़ा होगा.
यह शहर पूरी तरह से सऊदी न्याय व्यवस्था से बाहर होगा. ये व्यवस्था पूरी तरह स्वायत्त होगी और इसे निओम में निवेश करने वाले तय करेंगे.

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ट्रैफिक फ्री 'सुपरब्लॉक'
निओम के एडवाइजरी बोर्ड में शामिल पूर्व बैंकर अली शिहाबी कहते हैं, "यह मेगा शहर 170 किलोमीटर लंबा होगा. इसे लाइन कहा जाता है. यह रेगिस्तान में एक सीधी लाइन में 170 किलोमीटर लंबे इलाके में बसा होगा."
अगर किसी को ये अविश्वसनीय लग रहा है तो शिहाबी उसका संदेह दूर करने के लिए तैयार दिखते हैं. वह कहते हैं, "ये शहर एक साथ नहीं बल्कि ब्लॉक दर ब्लॉक कई चरणों में बनेगा."
शिहाबी का कहना है कि ये बार्सिलोना के ट्रैफिक फ्री 'सुपरब्लॉक' की तरह होगा. यहां हर प्लाजा पूरी तरह आत्मनिर्भर होगा, जिसमें दुकानें और स्कूल जैसी सुविधाएं होंगी.
हर शख्स की जरूरत की चीज सिर्फ एक बाइक राइड पर उपलब्ध होगी. शहर बस जाने पर यहां हाई-स्पीड ट्रेनें भी चलेगी.
डेवलपरों का कहना, "यहां कोई भी यात्रा 20 मिनट से ज्यादा की नहीं होगी."
इसके साथ ही निओम में ओक्सागोन भी होगा. ओक्सागोन पानी के ऊपर सात किलोमीटर लंबा शहर होगा. यह दुनिया का सबसे लंबा तैरता स्ट्रक्चर होगा.
नियोम के सीईओ नदमी अल नसर ने कहा कि 2022 में यहां मैन्यूफैक्चरिंग के लिए शुरुआती लोग आ जाएंगे.
दुनिया का सबसे आत्मनिर्भर
निओम की वेबसाइट किसी साइंस फिक्शन के हिस्सा लगती है. इसमें कहा गया है कि यह मेगा इलाका 2025 तक तैयार हो जाएगा.
लेकिन क्या इस शहर के विजन पर लोगों को विश्वास है? क्या इतना विशाल अत्याधुनिक शहर बनाना संभव होगा, जो रेगिस्तान के बीच पर्यावरण पर दबाव बनाए बगैर टिका रहे.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एनर्जी एक्सपर्ट डॉ. मनल शिहाबी का कहना है कि निओम पर्यावरण के कितना अनुकूल होगा, इसे आंकने के लिए कई चीजों पर गौर करना होगा.
मिसाल के तौर पर ये पूछा जा सकता है कि क्या निओम के अंदर पैदा होने वाला खाद्यान्न वहां क्या बहुत ज्यादा संसाधन का इस्तेमाल करके पैदा करना संभव होगा.
निओम की वेबसाइट में दावा किया है कि नियोम भोजन के मामले में दुनिया का सबसे आत्मनिर्भर शहर होगा.
नियोम में ग्रीनहाउस और वर्टिकल फार्मिंग की योजना है. ये उस देश के लिए काफी क्रांतिकारी विचार है, जो इस वक्त अपने भोजन का 80 फीसदी आयात करता है.
लेकिन सवाल ये है कि क्या यह सब पर्यावरण पर दबाव डाले बगैर किया जा सकता है.

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ग्रीन इनिशिएटिव
आलोचक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के इस प्रिय प्रोजेक्ट को ''ग्रीनवॉशिंग'' कह रहे हैं.
उनका कहना है देश की असली समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के बड़े वादे किए जा रहे हैं.
ये इकोलॉजिक गीगाप्रोजेक्ट सऊदी अरब को और ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने के प्रिंस के विज़न के मुताबिक है.
पिचले साल ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले सऊदी अरब ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव कार्यक्रम लॉन्च किया था. उस वक्त कहा गया था कि सऊदी अरब 2060 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लेगा.
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एक्सपर्ट जोना डेपलेज कहती हैं क्लाइमेट कम्यूनिटी में पहले तो इसे एक बड़ा कदम माना गया. लेकिन पड़ताल करने पर यह पहल खरा उतरती नहीं दिखती.
तेल उत्पादन बढ़ाने का एलान
जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में कहा गया था कि धरती के तापमान में बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री तक सीमित करने के लिए अब से लेकर 2030 तक दुनिया भर में तेल उत्पादन में पांच फीसदी की कटौती करनी होगी.
लेकिन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन खत्म होने के ठीक कुछ सप्ताह बाद ही सऊदी अरब ने तेल उत्पादन बढ़ाने का एलान कर दिया.
कहा जा रहा है कि ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज ने तो कह दिया था कि सऊदी अरब तेल निकालना बंद नहीं करेगा. उन्होंने कहा था, "हम तेल निकालने के लिए आखिर तक डटे रहेंगे. हम अपने हाइड्रोकार्बन का आखिरी मॉलिक्यूल तक निकालेंगे."
डेपलेज कहती हैं कि यह काफी चौंकाने वाला है. वो मौजूदा संदर्भ में भी तेल निकालना जारी रखना चाहते हैं.
किसी देश का उत्सर्जन इस बात पर निर्भर करता है कि यह कितना ईंधन जला रहा है. यह कितना पेट्रोल या गैस निकालता है उससे इस पर फर्क नहीं पड़ता. इसलिए लाखों बैरल तेल उत्पादन और निर्यात करने वाले सऊदी अरब के ईंधन उत्सर्जन में इसे शामिल नहीं किया जाएगा.

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रचनात्मक सोच
निओम के समर्थकों का कहना है कि अब पवन और सौर ऊर्जा से चलने वाली स्मार्ट और सस्टेनेबल सिटी बनाने की शुरुआत करने की जरूरत है.
निओम की एडवाइजरी काउंसिल के अली शिहाबी ने कहा, '' सऊदी अरब रेगिस्तानी शहर है. इसकी जरूरत का आधा पानी खारे पानी को मीठा करने वाले संयंत्रों से आता है. पानी मीठा करने के लिए प्लांट के लिए भी जैव ईंधन का इस्तेमाल होता है.
लेकिन ये काफी खर्चीली प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया में जहरीला रसायन पैदा होता है जो आखिरकार समुद्र में गिरता है. इसका मरीन इको-सिस्टम पर घातक असर होगा.
निओम में पानी मीठा करने की प्रक्रिया में रिन्युबल एनर्जी (गैर परंपरागत ऊर्जा) और खारे पानी की जरूरत होगी. इसका कचरा समुद्र में गिराने के बजाय उद्योगों के काम आएगा.
लेकिन दिक्कत ये है कि पानी मीठा करने के लिए संयंत्रों में रिन्युबल एनर्जी का इस्तेमाल कभी सफल नहीं रहा है.
शिहाबी कहते हैं, "निओम एक पायलट प्रोजेक्ट है. अगर हम मध्यपूर्व की पानी की समस्या को सुलझा सकें और ये प्रोजेक्ट सफल रहा तो निओम ने अब तक जो कुछ किया है वह काफी कारगर माना जाएगा."
संपत्ति निर्माण का वादा
कुछ और बड़े सवाल भी हैं. जैसे, निओम किनके लिए है?
दरअसल लाल सागर तट और जॉर्डन की पहाड़ी सीमा के बीच का सूना इलाका एक मिनी-स्टेट बनाने के लिए बिल्कुल सही कैनवास है. हालांकि यहां पहले से लोग रह रहे हैं. यहां पारंपरिक हुतेत बेडुइन जनजाति के लोग रहते हैं.
इस प्रोजेक्ट से नौकरियां पैदा होने और पिछड़े इलाकों में संपत्ति निर्माण का वादा किया जा रहा है. लेकिन स्थानीय आबादी को अभी तक कोई फायदा नहीं दिखा है.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि दो गांवों को खाली करा लिया गया वहां से 20 हजार हुतेत लोगों को हटा दिया गया है. उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है.
डेमोक्रेसी फॉर अरब वर्ल्ड की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सराह ली विटसन का कहना है, '' यहां के देशज लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के नियम-कानून की धज्जियां उड़ा कर जबरदस्ती हटाया जा रहा है. ''
अप्रैल में इन लोगों को जबरदस्ती हटाने के दौरान एक शख्स की मौत हो गई. अप्रैल 2020 में अब्दुलरहीम अल हुतेती ताबुक में अपना घर छोड़ने से इनकार कर दिया और ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करते रहे. कुछ दिनों बाद उन्हें सऊदी सुरक्षा बलों ने गोली मार दी. वो पहले ही कह चुके थे कि उनकी हत्या हो सकती है.

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लेकिन वॉशिंगटन में सऊदी अरब के दूतावास के प्रवक्ता फहद नाजेर ने कहा है हुतेती लोगों को जबरदस्ती नहीं हटाया गया है. हालांकि उन्होंने अल हुतेती के मारे जाने की घटना से इनकार नहीं किया. इसे उन्हें छोटी-मोटी घटना बताया.
निओम को एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन से लेकर सऊदी अरब की इकोनॉमी को डाइवर्सिफाई करने वाला शहर बताने वाले जनसंपर्क अभियान की भी आलोचना हो रही है.
आलोचकों का कहना है कि निओम सिर्फ धनी लोगों के इस्तेमाल के लिए होगा.
कहा जा रहा है कि इसमें सऊदी अरब के राजसी परिवार के लिए महल बनाए गए हैं.
सेटेलाइट तस्वीरों में वहां गोल्फ कोर्स और हेलिपैड बने दिख रहे हैं.
हालांकि अली शिहाबी कहते हैं कि इस शहर में मजदूर से अरबपति तक सब रहेंगे.

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मुश्किल फैसला
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने कहा था, '' देश के ग्रीन फ्यूचर की ओर शुरू की गई ये यात्रा आसान नहीं है. लेकिन हम मुश्किल फैसले लेने से बच नहीं रहे हैं. हम अर्थव्यवस्था को बरकरार रखने और पर्यावरण के बचाए रखने के बीच के झूठे विकल्प को खारिज करते हैं. ''
साफ तौर पर निओम इस विज़न का हिस्सा है. लेकिन सऊदी अरब सबसे मुश्किल फैसला लेने से अब तक बचता आ रहा है. और वो है जैव ईंधन के उत्पादन को छोड़ने का फैसला.
मनाल शिहाबी का कहना है, तेल और गैस पर बेहद निर्भरता वाले देश के लिए आर्थिक लिहाज से ये फैसला काफी मुश्किल होगा. उसके लिए अचानक इसका इस्तेमाल और इससे जु़ड़े संसाधनों का दोहन रोकना मुश्किल होगा. ''

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डेपलेज का कहना है कि पर्दे के पीछे सऊदी अरब और जैव ईंधन पर निर्भर देश ने अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन की भाषा को कमजोर करने की कोशिश करते आए हैं.
लेकिन फहद नाजेर अपने देश पर लग रहे ग्रीनवॉशिंग के आरोपों से इनकार कते हैं. उनका कहना है कि सऊदी अरब ग्रीन फ्यूचर की ओर बढ़ रहा है.
बहरहाल, निओम को लेकर किए जा रहे वादों पर उठते सवालों के बीच अली शिहाबी हमें लाइन पर एक घर रिजर्व करने की दावत देते हैं. वो कहते हैं दूसरे ऐसा करें उसके पहले आप कर लें. ''
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