सऊदी के क्राउन प्रिंस बोले- मैं उदार इस्लाम टर्म से सहमत नहीं

इमेज स्रोत, Getty Images
36 साल के मोहम्मद बिन सलमान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस हैं. क्राउन प्रिंस पिछले पाँच सालों से मुल्क का नेतृत्व कर रहे हैं. 2019 के बाद से क्राउन प्रिंस के 86 साल के पिता किंग सलमान विरले ही किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं. मोहम्मद बिन सलमान को पश्चिम के देशों में एमबीएस नाम से जाना जाता है.
उन्होंने अपने नेतृत्व में सऊदी अरब में कई ऐसे फ़ैसले किए जिनकी तारीफ़ हुई और कहा गया कि एमबीएस सऊदी अरब को एक इस्लामिक रूढ़िवादी मुल्क से आधुनिक देश बना रहे हैं.
लेकिन 2018 में वॉशिंगटन पोस्ट के सऊदी मूल के पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या ने उनकी छवि और सोच पर कई गंभीर सवाल ख़ड़े किए. अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने कहा था कि ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश ख़ुद एमबीएस ने दिया था.
एमबीएस की एक निर्दयी छवि भी बनी. 2017 में अपने ही परिवार के सदस्यों और वहाँ के कई अमीरों को भ्रष्टाचार के आरोप में क़ैद करवा दिया था. इन सारी छवियों के बीच अमेरिका में जब सत्ता परिवर्तन हुआ और वहाँ की कमान जो बाइडन के हाथ में आई तो उन्होंने क्राउन प्रिंस से बात करने से इनकार कर दिया. बाइडन प्रशासन की ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति केवल अपने समकक्षों से ही बात करेंगे. यानी सऊदी में राष्ट्रपति बाइडन के समकक्ष वहाँ के किंग सलमान हैं और उनसे ही बात होगी न कि क्राउन प्रिंस से.

इमेज स्रोत, Getty Images
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कई सुधार किए
साल 2016 में क्राउन प्रिंस ने विज़न 2030 से पर्दा हटाया था. इस विज़न के तहत कई तरह के सुधार शुरू किए गए. उन्होंने सऊदी को और अधिक खुला बनाया. क्राउन प्रिंस ने सिनेमा और कंसर्ट से पाबंदी हटाई.
यहाँ तक कि हिप-हॉप कलाकारों को भी बुलाया गया. महिलाओं को गाड़ी चलाने का अधिकार मिला और उनके लिबास को लेकर भी उदारता दिखाई गई. क्राउन प्रिंस ने प्रतिक्रियावादी मौलवियों की भूमिका सीमित की. धार्मिक पुलिस को ख़त्म किया. इसके साथ ही एमबीएस ने इसराइल से संबंध ठीक करने की गुंजाइश भी तलाशी.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी मैगज़ीन 'द अटलांटिक' को इंटरव्यू दिया है. यह इंटरव्यू सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए यानी सऊदी प्रेस एजेंसी पर तीन मार्च को प्रकाशित किया गया है. द अटलांटिक से एमबीएस ने इस्लाम, वहाबिज़म, क़ुरान, इसराइल और अमेरिका समेत तमाम मुद्दों पर विस्तार से बात की है.
द अटलांटिक ने एमबीएस पूछा कि क्या वह सऊदी अरब को इतना आधुनिक बनाएंगे कि उसकी इस्लामिक पहचान कमज़ोर पड़ जाए?

इमेज स्रोत, Getty Images
इस सवाल के जवाब में क्राउन प्रिंस ने कहा, ''दुनिया में हर देश की स्थापना अलग-अलग विचारों और मूल्यों के आधार पर हुई है. मिसाल के तौर पर अमेरिका लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मुक्त अर्थव्यवस्था जैसे मूल्यों के आधार पर बना है. लोग इन्हीं मूल्यों के आधार पर एकजुट रहते हैं. लेकिन क्या सभी लोकतंत्र अच्छे हैं? क्या सभी लोकतंत्र ठीक से काम कर रहे हैं? निश्चित तौर पर नहीं.''
''हमारा मुल्क इस्लाम के मूल्यों और विचारों की बुनियाद पर बना है. इसमें क़बाइली संस्कृति है, अरब की संस्कृति है. साथ ही सऊदी की संस्कृति और मान्यताएं हैं. यही हमारी आत्मा है. अगर हम इसे छोड़ देते हैं तो देश नष्ट हो जाएगा. हमारे लिए सवाल यह है कि सऊदी अरब को विकास और आधुनिकीकरण के सही रास्ते पर कैसे लाया जाए. इसी तरह के सवाल अमेरिका के लिए हैं कि कैसे लोकतंत्र, मुक्त बाज़ार और स्वतंत्रता को सही रास्ते पर रखा जाए. यह सवाल इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ये ग़लत रास्ते पर जा सकते हैं.''
''इसलिए हम अपने मूल्यों से दूर नहीं होंगे क्योंकि यही हमारी आत्मा है. सऊदी अरब में पवित्र मस्जिदें हैं और इन्हें कोई हटा नहीं सकता. हमारी यह ज़िम्मेदारी है कि ये पवित्र मस्जिदें हमेशा रहें और हम मुल्क को सऊदी के लोगों के लिए, इस इलाक़े के लिए सही रास्ते रास्ते पर रखना चाहते हैं. शांति और सह-अस्तित्व के आधार पर हम चाहते हैं कि बाक़ी दुनिया में चीज़ों को जोड़ें.''

इमेज स्रोत, Getty Images
उदार इस्लाम टर्म से सहमत नहीं - मोहम्मद बिन सलमान
द अटलांटिक के पत्रकार ने एमबीएस से पूछा- 'मुझे लगता है कि आप भी इस बात से सहमत होंगे कि अगर हम आपके पद पर आसीन किसी व्यक्ति से 1983 में बात कर रहे होते, उसकी तुलना में अभी जिस तरह से उदार इस्लाम को आगे बढ़ाया जा रहा है, वह पूरी तरह अलग है.'
इस सवाल के जवाब में क्राउन प्रिंस ने कहा, ''मैं उदार इस्लाम जैसे टर्म का इस्तेमाल नहीं करता हूँ क्योंकि इस टर्म के इस्तेमाल से अतिवादी और आतंकवादी ख़ुश होते हैं. उदार इस्लाम जैसे टर्म का इस्तेमाल उनके लिए अच्छी ख़बर है. अगर हम उदार इस्लाम कहते हैं तो लगता है कि सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों में इस्लाम को बदला जा रहा है जो कि सच नहीं है.''
''हमलोग इस्लाम की असली तालीम की ओर लौट रहे हैं. यही पैग़ंबर की राह है और इसी राह को चार ख़लिफ़ाओं ने अपनाया था. यह राह मुक्त और शांतिपूर्ण समाज की है. उनके शासन में ईसाई और यहूदी भी रहते थे. उन्होंने हमें सभी संस्कृतियों और धर्मों को सम्मान करना सिखाया है. यह पैग़ंबर और चार ख़लिफ़ाओं की तालीम है. यही सबसे सही है और हम उसी जड़ की ओर लौट रहे हैं. हुआ यह है कि अतिवादियों ने अपने हितों को साधने के लिए हमारे मज़हब को अगवा कर बदल दिया.''
क्राउन प्रिंस ने कहा, ''वे कोशिश कर रहे हैं कि लोग उनकी तरह से इस्लाम को देखें. समस्या यह है कि उनसे कोई तर्क नहीं कर रहा है और न ही गंभीरता से लड़ रहा है. ऐसे में उन्हें अपना अतिवादी विचार फैलाने का मौक़ा मिल रहा है. इसी वजह से सुन्नी और शिया दोनों समूहों में घोर अतिवादी आतंकवादी संगठन बने.''

इमेज स्रोत, Getty Images
अतिवाद पर राय
द अटलांटिक ने पूछा, 'यहाँ के धार्मिक धड़ों से जुड़े लोगों का कहना है कि 1960 और 1970 के दशक में मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रभाव में अतिवाद बढ़ा, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि सऊदी का भी प्रभाव है. सऊदी रूढ़िवाद भी अहम है. वहाबिज़म भी है. आप सऊदी अतिवाद को कैसे डील कर रहे हैं? '
क्राउन प्रिंस ने जवाब में कहा, ''अतिवाद को बढ़ाने में मुस्लिम ब्रदरहुड और इखवान की अहम भूमिका रही है. अन्य अतिवाद को साथ लाने में ये सेतु बने हैं. ओसामा बिन-लादेन मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य था. अल-ज़वाहिरी भी इसी से जुड़ा था. आईएसआईएस के नेता भी इससे जुड़े रहे हैं. इसलिए ब्रदरहुड रास्ता है. पिछले दशकों में अतिवादी समूहों के निर्माण में इसकी अहम भूमिका रही है. लेकिन केवल मुस्लिम ब्रदरहुड की बात नहीं है. कई ऐसी चीज़ें हैं, जिनसे अतिवाद को बढ़ावा मिला. ऐसा केवल मुस्लिम दुनिया से नहीं हुआ. अमेरिका से भी हुआ. मिसाल के तौर पर इराक़ पर हमले से अतिवादियों को अपनी बात समझाने में आसानी हुई. यह सच है कि कुछ अतिवादी सऊदी में भी हैं.''

इमेज स्रोत, Getty Images
क्राउन प्रिंस ने वहाबिज़म को लेकर कहा, ''मैं यह कहना चाहूंगा कि मोहम्मद इब्न अब्द अल-वहाब कोई पैग़ंबर नहीं थे. वह एक स्कॉलर थे और वैसे स्कॉलर ही थे, जैसे अन्य लोग पहले सऊदी स्टेट में थे. समस्या यह है कि अरब प्रायद्वीप में केवल अब्द अल-वहाब के स्टूडेंट्स ही इतिहास लिखना या पढ़ना जानते थे. उन्होंने अपने हिसाब से लिखा.''
''अब्द अल-वहाब के लिखे का इस्तेमाल अतिवादी अपने एजेंडे के लिए करते हैं. लेकिन मैं इस बात को लेकर निश्चिंत हूँ कि अब्द अल-वहाब, बिन बाज़ और अन्य लोग ज़िंदा होते तो वे अतिवादियों और आतंकवादियों से लड़ते. आईएसआईएस सऊदी में किसी ज़िंदा मज़हबी हस्ती की मिसाल नहीं देता है. जो लोग इस दुनिया में नहीं हैं, उनके नाम पर अपना एजेंडा लोग पूरा करते हैं.''
क्राउन प्रिंस ने कहा, ''सऊदी अरब अब्द अल-वहाब नहीं है. सऊदी में सुन्नी और शिया हैं और सुन्नियों के बीच भी चार स्कूल हैं और शियाओं के भीतर भी कई स्कूल हैं. सभी धार्मिक बोर्ड का प्रतिनिधित्व करते हैं. आज की तारीख़ में किसी भी एक स्कूल के विचार से सऊदी में धर्म को नहीं देखा जा सकता है.''
''आज हम सही रास्ते पर हैं. हम अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, हम विशुद्ध इस्लाम की ओर जा रहे हैं और यही सबके हक़ में है. अगर आप 2016 में इंटरव्यू कर रहे होते तो आप कहते कि यह सब अनुमान और कल्पना है. लेकिन हमने इसे किया है. अभी आप अपनी आँखों से सऊदी को देख सकते हैं. आप पिछले छह या सात साल पहले के सऊदी का वीडियो देखिए. हमने बहुत कुछ किया है और अभी करना बाक़ी है.''
सऊदी के क्राउन प्रिंस ने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति उनके बारे में ग़लतफ़हमी रखते हैं तो वह इसकी परवाह नहीं करते हैं. क्राउन प्रिंस ने यह भी कहा कि वह इसराइल को दुश्मन नहीं मानते हैं बल्कि सहयोगी की संभावना देखते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














