रूस-यूक्रेन युद्ध का तीसरा सप्ताह: सायरन की आवाज़ें, रॉकेट और मिसाइल हमले- तस्वीरें

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रूस के हमले को तीन सप्ताह हो चुके हैं और नीचे दी गई तस्वीरें अब यूक्रेन में आम हो गई हैं.
देश भर में लोगों की सुबह अक्सर हवाई हमलों के डरावने सायरन और रॉकेट, मिसाइल हमलों के निशानों से भरे आसमानों के बीच होती है.
इसी तरह का एक दृश्य राजधानी कीएव के पूर्व में स्थित बैरीशिवका में देखने को मिला.

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रूस भले ही यूक्रेन के शहरों की तरफ़ धीरे-धीरे बढ़ रहा है लेकिन उसकी ओर से भीषण गोलाबारी जारी है.
रूस कहता है कि वो सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. नीचे तस्वीर में देश के मध्य में स्थित कलीनविका में एक स्टोरेज फैसिलिटी की हालत दिखती है.

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हालाँकि, यूक्रेन का कहना है कि रूसी बल नागरिकों को भी अपना निशाना बना रहे हैं.
सबसे बुरी तरह से प्रभावित इलाकों में से एक पूर्व में स्थित खारकीएव है.
बीबीसी संवाददाता क्वेंटीन समरविले ने बताया कि इस शहर में घुसना मानो किसी और दुनिया में जाने के समान है.

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रूस की ओर से लगातार जारी गोलाबारी की वजह से अब तक 15 लाख लोग देश छोड़ कर जा चुके हैं.
हमारे संवाददाता ने बताया कि जो लोग यहां रह गए हैं वो ज़्यादा से ज़्यादा सामान स्टॉक में रखना चाहते हैं.
इसलिए अभी भी सुबह के समय दवा की दुकानों, बैंकों, सुपरमार्केट और पेट्रोल पंपों पर कतारें दिखती हैं.

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खारकीएव को ज़िदा रखने के लिए पर्दे के पीछे एक बहुत बड़ा सैन्य और मानवीय प्रयास चल रहा है.
नीचे दिख रहे स्वयंसेवक खारकीएव की रक्षा करने वालों और ज़रूरतमंदों के लिए खाना तैयार कर रहे हैं.

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दिनोंदिन मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.
आधिकारिक आंकड़ों से इतर माना जा रहा है कि इस गोलाबारी में हज़ारों लोगों की जान गई है और हज़ारों घायल भी हुए हैं.
कुछ लोग हमले के कारण अपंग तक हो गए हैं.

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क़रीब दो सप्ताह से रूसी सैनिकों से घिरे बंदरगाह वाले शहर मारियुपोल की स्थिति भयावह बताई जा रही है.
अधिकारियों का कहना है कि रूसी हमलों के कारण यहां 1600 लोगों की जान गई हैं और प्रशासन रूस की ओर से लगातार हो रही बमबारी के बीच शव तक नहीं इकट्ठे कर पा रहा है.

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सिर्फ मारियुपोल ही नहीं, माइकोलेव शहर में भी संघर्ष जारी है. यहां क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन स्थानीय लोग भी कड़ा प्रतिरोध कर रहे हैं.
क्लस्टर बम उन्हें कहते हैं जब हवा से लगातार छोटे-छोटे हमले किए जाते हैं.
हालांकि, माइकोलेव के राज्यपाल विताली किम समय से पहले इस जीत का जश्न मनाना नहीं चाहते.
उन्होंने बीबीसी के एंड्रयू हार्डिंग से कहा, "हम ये लड़ाई जीत रहे हैं, लेकिन ये युद्ध नहीं."

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निप्रो पर शुक्रवार को पहली बार हमला हुआ.

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यूक्रेन की राजधानी का सबसे बुरा हाल है. हमले की शुरुआत से ही यहां यूक्रेनी सेना लगातार रूसी सैनिकों से लड़ रही है.
कीएव में ही वॉलंटियर्स खाई खोदवे से लेकर बैरिकेडिंग तक कर रहे हैं. हमारे संवावददाता जेरेमी बॉवेन कहते हैं कि ये शहर अब एक किले में तब्दील होता जा रहा है.

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अन्य लोग कीएव की जंग में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. अलग-अलग जगहों पर खुली रसोई शुरू हो गई हैं.

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हालांकि, कई यूक्रेनियों से के लिए जिनमें सिर्फ महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, क्योंकि पुरुषों को लड़ने के लिए यहीं रहना पड़ता है- भागने के लिए संघर्ष करना आम बात हो गई है. अब तक 25 लाख से ज़्यादा लोग देश छोड़ चुके हैं.

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सदमा भी वास्तवकि है. मोल्डोवा में एक शरणार्थी कैंप में जोकर बच्चों का मन बहलाने का काम कर रहे हैं.

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इस सदी के कई संघर्षों में जैसा कि देखा गया है, युद्ध का एक शिकार संस्कृति भी होती है. लविव का सुरम्य पश्चिमी शहर अब तक अछूता रहा.
लेकिन अब ये शहर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए तैयारी में जुट गया है. मुख्य सड़कों पर चेकप्वाइंट्स बना दिए गए हैं और सड़कों पर हर तरफ़ सैनिक दिख सकते हैं.
लेकिन बीबीसी के जोल गंटर कहते हैं कि कुछ तैयारियां बंद दरवाज़ों के पीछे चल रही हैं.
वो कहते हैं कि लविव की गैलरियों, संग्रहालयों और गिरिजाघरों में शहर की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है.

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