यूक्रेन गई ये गुजराती महिला भारत वापस क्यों नहीं आना चाहती हैं

इमेज स्रोत, Tejal Patel
- Author, भार्गव परीख
- पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां रह रहे हज़ारों भारतीयों को निकालने की कोशिश जारी है, लेकिन गुजरात की एक महिला है जो भारत लौटना नहीं चाहती हैं, इनके भारत नहीं लौटने की वजह भी बहुत दिलचस्प है.
दो दिनों तक पैदल चलकर ख़ारकीएव से पोलैंड पहुंचीं गुजरात की तेजल पटेल बताती हैं, "मैं एक एजेंट को लाखों रुपये देकर और अपने बच्चों को भारत में छोड़कर अच्छे पैसे कमाने के लिए यूक्रेन आयी थी, मेरे यूक्रेन आने के पांच महीने के भीतर ही युद्ध शुरू हो गया."
तेजल के मुताबिक़, वह अपने परिवार की मदद के लिए यूक्रेन आयी थीं और एजेंट को दिए गए पैसों के लिए क़र्ज़ का भुगतान भी बाक़ी है लेकिन इस युद्ध ने सबकुछ बदलकर रख दिया है.
वह पिछले कुछ महीनों से ख़ारकीएव में नौकरी कर रही थीं. ख़ारकीएव यूक्रेन का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और रूस यहां लगातार हमला कर रहा है. 24 फ़रवरी को यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से आम लोगों को शहर में अपनी जान बचाने के लिए बंकरों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा था.
यूक्रेन के लाखों लोग पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं. पोलैंड और रोमानिया जैसे पड़ोसी देशों तक पहुंचने वालों में हज़ारों भारतीय शामिल हैं जो पैदल चलकर दूसरे देश तक पहुंचे हैं.
यूक्रेन में हज़ारों भारतीयों के फंसने के बाद, परिवार वालों की अपील पर भारत सरकार ने भारतीयों को वापस लाने का अभियान यानी 'ऑपरेशन गंगा' शुरू किया.

इमेज स्रोत, Tejal Patel
आर्थिक तंगी के बाद किया यूक्रेन का रुख़
तेजल पटेल के परिवार के मुताबिक कोरोना संकट के दौरान परिवार आर्थिक तंगी में आ गया था जिसके बाद आमदनी के लिए तेजल यूक्रेन पहुंचीं.
तेजल पटेल ने बीबीसी गुजराती को बताया, "कोरोना में हमारे परिवार की मुश्किलें बढ़ गई थीं. मेरे पति प्रवीण एक स्कूल वैन चला रहे थे. मैं एक निजी फ़र्म में आठ हज़ार रुपये महीने की नौकरी कर रही थी. हमारा काम बंद हो गया था, आमदनी बंद हो गई थी."
"दो साल में घर से बहुत सारे गहने बिक गए. इस साल जब स्कूल खुला, तो हमारे पास अपने दो बच्चों की स्कूल फ़ीस देने के लिए भी पैसे नहीं थे."
तेजल ने यूक्रेन जाने का फ़ैसला कैसे किया, ये पूछे जाने पर उन्होंने बताया, "मेरे पति के एक दोस्त विदेश जाने के इच्छुक लोगों के लिए वीज़ा की व्यवस्था करने और नौकरी दिलाने वाले एजेंट के तौर पर काम करते थे. जब हम लोगों ने उन्हें अपनी मुश्किल बतायी तो उन्होंने हमें विदेश जाने के बारे में बताया."
तेजल पटेल का कहना है कि उनके पति को विदेश में नौकरी नहीं मिल रही थी, लेकिन उन्हें यूक्रेन में गुजराती छात्रों के लिए खाना पकाने की नौकरी मिल गई, इसलिए उन्होंने यूक्रेन जाने का मन बना लिया.
उन्होंने बताया, "मेरे पति को कोई नौकरी नहीं मिल रही थी लेकिन यूक्रेन में गुजराती लड़कों के एक होटल में खाना पकाने वाले गुजराती की नौकरी थी. मैंने अपने पति और बच्चों के साथ चर्चा की और एजेंट को साढ़े सात लाख रुपये का भुगतान करके यहां आने का फ़ैसला लिया."

इमेज स्रोत, Tejal Patel
गहने गिरवी रखकर आई थीं यूक्रेन
बीबीसी गुजराती से तेजल ने बताया, "चूंकि विदेश में काम करने वाला एजेंट पति का दोस्त था, इसलिए यह तय हुआ कि मैं अपने आभूषण उसके पास जमा कर दूं और अपना वेतन साप्ताहिक तौर पर उसे भेज कर क़र्ज़ चुकाऊं."
"मैं पिछले साल अगस्त महीने में यहां पहुंची थी और मुझे यहां एक भारतीय होटल में नौकरी मिल गई. मुझे रहने, खाने और पीने के लिए भुगतान नहीं करना पड़ा."
"मैं रोज़ सुबह उठकर उन 27 लड़कों के लिए 75 पराठे, दाल-भात और सब्जियां बनाती थी जो हमारे होटल से टिफिन मंगावते थे. मासिक वेतन में से कुछ पैसे अपनी पॉकेट में रखने के बाद मैं हर महीने 30 हज़ार रुपये अपने पति को भेज देती थी."
तेजल बताती हैं, "पांच महीने में क़र्ज़ थोड़ा कम हुआ है लेकिन अभी भी 5.5 लाख रुपये का क़र्ज़ है और युद्ध छिड़ गया है." पोलैंड पहुंचने के अपने सफ़र के बारे में उन्होंने बताया, ''मैं लड़कों के साथ बस से आ रही थी लेकिन यूक्रेन पोलैंड सीमा से 28 किलोमीटर पहले ही ट्रैफ़िक जाम की वजह से बस रुक गई.''
"मैं गुजराती लड़के-लड़कियों के साथ पैदल सीमा तक पहुंची. रास्ते में हमारा खाना ख़त्म हो गया था. हमने दो ब्रेड और पानी के साथ 24 घंटे बिताए. यूक्रेन-पोलैंड सीमा पर भारी भीड़ थी. पोलैंड पहुंचने में 48 घंटे का समय लग गया और रास्ते में फ़ोन में भी गुम हो गया."
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यूक्रेन में पढ़ने वाले 76,000 विदेशी छात्रों में से लगभग 20,000 भारतीय छात्र हैं. अधिकांश छात्र यहां की सरकारी यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं.
यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए ऑपरेशन गंगा के तहत अब तक 76 विमानों में 16,000 लोगों को लाया जा चुका है.

इमेज स्रोत, Tejal Patel
अब पोलैंड में करना चाहती हैं नौकरी
तेजल पटेल यूक्रेन में युद्ध की स्थिति से निराश ज़रूर हैं लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है. उन्होंने बताया, "यूक्रेन आकर, मैंने अच्छा पैसा कमाना शुरू कर दिया था लेकिन जल्द ही युद्ध शुरू हो गया."
"भले ही मैं बी.कॉम हूं. भारत में मुश्किल से 8,000 रुपये प्रति महीने की नौकरी मिल पाती है. मेरे पति भी स्नातक हैं. उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है. उन्होंने एक वैन ख़रीदी और अब स्कूल के लिए काम करते हैं."
तेजल अब पोलैंड में काम करना चाहती हैं. उन्होंने बताया, "मुझे यहां एक मॉल में एक भारतीय दुकान में काम मिला है लेकिन मैंने पोलैंड में एक घर किराए पर लेने के लिए अपने सोने के झुमके बेचे हैं."
पोलैंड में वर्क परमिट की उम्मीद में तेजल कहती हैं, "मेरे पति का दोस्त एजेंट है. उन्हें पोलैंड में वर्क परमिट मिलने की उम्मीद है, लेकिन मैं भारत नहीं लौटूंगी."
"चाहे जो काम मुझे यहाँ करना पड़े. खाना बनाना और अन्य काम जो भी. क्योंकि यहां भारत से ज़्यादा पैसा कमा सकते हैं, इसलिए मैं यहाँ रहूँगी और एक साल में कर्ज़ का भुगतान करूँगी. भारत पैसे भेजूंगी ताकि बेटे की पढ़ाई हो. अगले साल वो 12वीं में आ जाएगा, तब ट्यूशन वग़ैराह का ख़र्च भी बढ़ जाएगा."
"बेटी की शादी के ख़र्च के लिए पैसा जमा करना है, बेटी अभी सातवीं कक्षा में पढ़ रही है. इतना पैसा जमा करने के बाद ही भारत लौटूंगी. सरकार भले लोगों को मुफ़्त में ले जा रही है लेकिन मैं नहीं लौटूंगी."
तेजल के पति प्रवीण पटेल ने बीबीसी गुजराती से बताया, "मेरी पत्नी वहां सुरक्षित है, यह मेरे लिए बड़ी बात है. एक बार जब वह विदेश में बस जाएगी, तो मैं अपने बच्चों को अपने माता-पिता के साथ छोड़कर वहां भी जाऊंगा. पत्नी मेरे लिए काम की तलाश करेगी और हम साथ रहेंगे. दो पैसे कमाएंगे और अपने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए बचत करेंगे."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















