यूक्रेन में जंग से जुड़े हर सवाल का जवाब, जानिये बीबीसी संवाददाताओं से

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यूक्रेन में रूस का हमला जारी है. दोनों ओर से दावे-प्रतिदावे किए जा रहे हैं. इस बीच दोनों देशों में सुलह की कोशिश एक बार तेज हुई है. पल-पल बदल रहे घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की निगाह है. ऐसे में कई सवाल आ रहे हैं, जिनमें यूक्रेन-रूस की जंग के ताजा घटनाक्रम की जानकारी मांगी जा रही है. बीबीसी के संवाददाता आपके इन सवालों के जवाब दे रहे हैं.
मार्क लोवेन
संवाददाता बीबीसी न्यूज़, यूक्रेन-पोलैंड सीमा से
सवाल - यूक्रेन में कितने विदेशी लड़ाके घुसे हैं? (जॉर्ज मीनाचेरी, केरल )
जवाब - यह फिलहाल साफ नहीं है. यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इंटरनेशनल ब्रिगेड कही जाने वाली फौज में विदेशी लड़ाकों को शामिल होने को कहा था, लेकिन इस अपील पर कितने लोग शामिल हुए इसका पता नहीं.
इसराइल में यूक्रेन के दूतावास ने एक फेसबुक पोस्ट कर इसराइलियों को यूक्रेन जाकर रूस से लड़ने के लिए कहा था. लेकिन बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया.
सवाल- क्या यूक्रेन की मदद के लिए किसी देश ने कोई सेना भेजी है? (थॉमस ओगरेन, सैन लुइ-अमेरिका )
जवाब - आधिकारिक तौर पर तो किसी ने सेना नहीं भेजी है. नेटो का भी कोई सदस्य देश सीधे-सीधे रूस से लड़ाई का जोखिम नहीं लेना चाहता. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बार-बार कहा है वह अमेरिकी सैनिकों को वहां लड़ने नहीं भेजेंगे.
लेकिन हमें यह भी पता नहीं है कि क्या विदेशी सैनिक यूक्रेन की ओर से छिप कर लड़ रहे हैं, क्योंकि यूकेनी राष्ट्रपति विदेशी लड़ाकों को शामिल होने की अपील कर चुके हैं.

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सवाल- क्या यूक्रेन के पड़ोसी सुरक्षित हैं? (क्रिस्टिना ओनोफ्रास, रोमानिया)
जवाब - यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या रूस के आसपास और नेटो का हिस्सा सुरक्षित हैं. अगर सुरक्षित है तो कब तक? नेटो के पूर्वी इलाके के देश जो यूक्रेन की सीमा से सटे हैं वे चिंतित हैं.
लिथुआनिया ने अपने यहां इमरजेंसी घोषित कर दी है. स्वीडन और फिनलैंड नेटो के सदस्य नहीं हैं लेकिन वे पिछले सप्ताह इस सैन्य गठबंधन की बैठक में शामिल हुए. अमेरिका ने भी पोलैंड में मौजूद अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है.
कुछ देश चिंतित हैं. यूक्रेनी सीमा से सटे कुछ देशों में इसे लेकर चिंता है लेकिन फिलहाल उनका पूरा ध्यान यूक्रेनी नागरिकों और रिश्तेदारों की मदद पर लगा है. जो लोग यूक्रेन से भाग रहे हैं उनकी मदद के लिए पड़ोसी देश के लोग और रिश्तेदार आगे आ रहे हैं.
सवाल- यूक्रेन को ताकतवर रूसी वायुसेना के खिलाफ हथियारों और साजो-सामान की सप्लाई उसके मोर्चों पर कैसे पहुंचेगी?(एंडी सेरेडिन ट्विटर पर )
जवाब- यह सप्लाई यूक्रेन की पश्चिमी सीमा यानी मुख्य तौर पर पोलैंड से पहुंचेगी.अमेरिका और कनाडा से आए सैन्य विमान आ रहे हैं और उन्हें सीमा पार से मोर्चों पर पहुंचाया जा रहा है. रूसी वायुसेना की ताकत का सामना करने के लिए यूक्रेन को यह सप्लाई बढ़ाई जा रही है..
यूक्रेन का एयरस्पेस फिलहाल नागरिक उड़ानों के लिए बंद किया जा चुका है. यूक्रेन ले जाए जाने के लिए कुछ सैन्य साजो-सामान ट्रेन से पोलैंड पहुंचाए जा रहे हैं. चेक रिपब्लिक में भी ऐसी मदद इकट्ठा हो रही है.
यूक्रेन की सेना के लिए भारी पैमाने पर लॉजिस्टिक ऑपरेशन चल रहा है.

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लीज़डूसेट
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संवाददाता, कीएव
सवाल - क्या नेटो यूक्रेन की मदद के लिए सेना भेजेगा? (मेमफाम, इंग्लैंड)
जवाब - लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि किस मोड़ पर नेटो को लगेगा कि अब यूक्रेन की सैन्य मदद के लिए आगे आना चाहिए? दरअसल नेटो ने कहा है कि वह यूक्रेन की एक-एक जमीन की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा.
उसने यूक्रेन में हथियार और लड़ाई के दूसरे साजो-सामान भेजे हैं. पिछले कुछ वर्षों में उसने यूक्रेन की सेना को ट्रेनिंग भी दी है. यहां तक कि रूसी हमले तक वह उन्हें ट्रेनिंग दे रहा था.
लेकिन नेटो ने बार-बार कहा है नेटो अपने सैनिक नहीं उतारेगा क्योंकि यूक्रेन इस सैन्य गठबंधन का सदस्य नहीं है.
हालांकि अगर रूस यूक्रेन से आगे बढ़ कर किसी नेटो देश पर हमला करता है तो वह कार्रवाई कर सकता है.
नेटो के संविधान के अनुच्छेद 5 में कहा गया है कि नेटो के किसी भी सदस्य देश पर हमला पूरे नेटो पर हमला माना जाएगा.
सवाल- रूसी बोलने वाले यूक्रेनी लोगों की इस ज़ंग के बारे में क्या राय है?(मान चुन सिउ, लंदन )
जवाब- रूसी बोलने वाले यूक्रेनी की इस जंग के बारे में क्या राय है? यह सवाल कइयों के मन में उठ रहा है. दरअसल रूसी हमले के बाद पूर्वी यूक्रेन में कुछ जगहों पर जश्न का माहौल दिखा. 2014 से यहां रूस समर्थित अलगाववादियों का कब्जा है.
इस इलाके से निकल रहे लोगों ने बीबीसी के हमारे कुछ सहयोगियों को बताया कि रूस की ओर से दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता देने के बाद वहां को के लोगों में खुशी देखी गई.
इन इलाके के लोगों की जिंदगी पिछले आठ साल में मुश्किल हुई है. उनका संपर्क अपने परिवारों से काट दिए गए हैं. पेंशन भी खत्म हो गई है.
रूसी बोलने का मतलब रूसी समर्थक होना नहीं है. कई यूक्रेनी रूसी भी बोलते हैं. इनमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदोमीर जेलेंस्की भी शामिल हैं.
सवाल - यूक्रेन में हमले से बचने के लिए जो लोग छिपे हुए हैं क्या उन्हें पर्याप्त खाना, पानी और सफाई व्यवस्था मिल रही है ? क्या इंटरनेशनल रेडक्रॉस वहां काम कर रही है और असप्तालों में मरीजों, घायलों को मदद मिल रही है? क्या कीएव में पर्याप्त खाना बचा है?(अर्लिन, ओरेगॉन -अमेरिका)
जवाब- जब कर्फ्यू उठाया जाता है तो हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बंद हो जाते हैं. अगर दुकानें उस दौरान खुलती हैं तो लोग उनकी ओर तेजी से दौड़ पड़ते हैं. हालांकि वहां दुकानों में सामान की पर्याप्त सप्लाई है.
हमने सुना है कि मेट्रो स्टेशन लोगों की पनाहगाह बन गए हैं. लोग एक दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं. लेकिन जब कर्फ्यू 36 घंटों तक लगा होता है तो खाने-पीने का सामान कम हो जाता है. कुछ नागरिकों ने स्थानीय होटलों में रहना शुरू किया है.
ये होटल लोगों को खाना देने के लिए हरचंद कोशिश कर हे हैं. लोगों में जबरदस्त सामुदायिक भावना है. हर कोई मदद के लिए आगे बढ़ रहा है. स्थानीय संगठनों से लेकर अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठन तक पूरे जोश से मदद के काम में लगे हैं. लेकिन चिंता की बात ये है कि जंग लंबी खिंची तो खाद्य पदार्थों की सप्लाई धीमी पड़ सकती है.
सवाल- वो क्या वजह है, जिनसे यूक्रेन पर रूस का कब्जा नहीं हो पा रहा है? (जॉन, अमेरिका)
जवाब - कीएव में रह रहे लोगों को लग रहा है रूसी सैना बस अब शहर पर कब्जा होने ही वाला है. लेकिन यूक्रेनी सेना पूरी ताकत से मुकाबला कर रही है. कहा जा रहा है कि रूसी सेना सिटी सेंटर से महज 30 किलोमीटर दूर है.
हर दिन यूक्रेनी सेना और ज्यादा टुकड़ियों और साजोसामान के साथ डटी हुई है. यूक्रेनी सेना हर ओर बढ़ रही लेकिन जितनी तेजी से उम्मीद थी उतनी तेजी से नहीं.
फिलहाल यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि चीजें पुतिन के मुताबिक हो रही है या नहीं. ऐसी खबरें हैं कि रूसी सेनाओं के पास ईंधन खत्म हो रहा है. रूसी सैनिक लड़ने की इच्छाशक्ति खत्म हो रही है. यूक्रेनी जवाबी हमला किया जा रहा है.
खारकीव जैसे शहरों में दोनों सेनाएं आमने-सामने लड़ रही है.
सवाल- रूस का यूक्रेन पर कब्जा हो गया तो क्या होगा? (नलान्हला, दक्षिण अफ्रीका)
जवाब - यह यूक्रेन के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है. यह दुनिया के लिए खतरनाक और खास मोड़ साबित हो सकता है.
पहली बात तो यह रूस को कीएव समेत यूक्रेन के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में लेना होगा. कीएव में 30 लाख लोग रहते हैं . यहां लोग यूरोप और नेटो समर्थक हैं.
इतिहास बताता है कि सैन्य तख्तापलट या हमलों से पहले टेलीविजन स्टेशन और राष्ट्रपति के भवनों पर कब्जा कर लिया जाता है.
अगर यूक्रेन में रूसी कब्जे की कोशिश तेज हुई तो बड़ा जवाबी हमला हो सकता है. इसके साथ ही यूक्रेन के लोग विद्रोह कर सकते हैं. यूक्रेन को कई जगहों, स्रोतों और कई तरह से मदद मिल सकती है.
यह कल्पना करना मुश्किल है कि अगर रूसी कब्जा हुआ तो ज्यादा दिनों तक टिकेगा. कब्जा हुआ तो यह इतिहास के सबसे काले दिनों में शामिल हो जाएगा.

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